NEET छात्रा रेपकांड-मनीष से 25 सवाल, कहां थे, क्या किया:लड़की के अंडरगारमेंट पर स्पर्म किसका, CBI के पास जवाब नहीं, 1200 पन्नों की SIT रिपोर्ट

NEET की छात्रा से रेप हुआ? हां। किसने किया? पता नहीं। छात्रा के कपड़े से स्पर्म मिला। किसका है? पता नहीं। छात्रा ने कमरे से दवा के कितने खाली रैपर मिले? 1, 5 या 6. यह सार SIT की कोर्ट में जमा की गई 1200 से अधिक पन्नों की केस डायरी का है। छात्रा 6 जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल के अपने कमरे में बेहोश मिली। 11 जनवरी को उसकी मौत हुई। 62 दिन बाद भी पुलिस, SIT और CBI के हाथ खाली हैं। CBI की जांच शुरू हुए 30 दिन हो गए। एजेंसी अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं जुटा पाई है। पटना से जहानाबाद तक माहौल जरूर खूब बना है। पॉक्सो कोर्ट में SIT और CBI की पोल खुल गई। जांच अधिकारियों के पास कोर्ट के सवालों के जवाब नहीं थे। हमने SIT की केस डायरी की पड़ताल की। इसमें शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन और प्रभात मेमोरियल अस्पताल के डॉक्टर सतीश से किए गए सवाल और उनके जवाब हैं। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, मनीष रंजन ने SIT की पूछताछ में क्या कहा। छात्रा का इलाज करने वाले डॉक्टर ने SIT को क्या बताया। जांच में कौन सी 3 बड़ी लापरवाही हुई। सबसे पहले, मनीष ने SIT के 25 सवालों के क्या जवाब दिए सवाल 1. आपका नाम, पिता, ग्राम, थाना एवं जिला? जवाब : नाम – मनीष कुमार रंजन, पिता – उदल प्रसाद, गांव- रूकनपुर, थाना- फतुहा, जिला – पटना। सवाल 2. आप वर्तमान में कहां रह रहे थे? जवाब : शंम्भू गर्ल्स हॉस्टल के ऊपर, मुन्नाचक, डॉ. शहजानंद गली, थाना- चित्रगुप्त नगर, पटना। सवाल 3. किसी और जगह आपने घर बनाया था? जवाब: गांव- खरका, थाना- मखदुमपुर, जिला- जहानाबाद। यहां करीब 10 साल पहले गांव के एक आदमी से 1000 स्क्वायर फीट जमीन 1 लाख रुपए में खरीदी। इस पर 2 रूम, किचन, बरामदा और बाथरूम वाला घर बनाया था। सवाल 4. मखदुमपुर, जहानाबाद वाले घर पर कब-कब जाते थे? जवाब: 2018-19 से हर 2-3 महीने में घर जाता था। कुछ दिन रहता था फिर वापस आ जाता था। सवाल 5. मखदुमपुर, जहानाबाद वाले घर किसके साथ जाते थे? जवाब : ज्यादातर ड्राइवर के साथ जाता था। सवाल 6. आपके कितने बच्चे हैं? जवाब : 2 बेटी और 1 बेटा है। बड़ी बेटी देहरादून NIFT से इंटर्नशीप कर रही है। दूसरी बेटी पावापुरी मेडिकल कॉलेज में 3rd इयर की स्टूडेंट है। बेटा इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा है। सवाल 7. दिनांक 05/01/26 और 06/01/26 को आप कहां थे? जवाब : 05/01/26 और 06/01/26 को शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में था। सवाल 8. आपके साथ 5 और 6 जनवरी 2026 को कौन-कौन थे? जवाब : मेरे साथ मेरी पत्नी संगीता रंजन और बेटा आकाश रंजन थे। सवाल 9. घटना के बारे में आपको कब पता चला? जवाब : घटना के बारे में सबसे पहले 7 जनवरी 2026 को पता चला। सवाल 10. घटना के बारे में किससे और क्या पता चला? जवाब: हॉस्टल संचालिका ‘नीलम देवी’ ग्राउंड फ्लोर पर लिफ्ट के पास रो रही थी। पूछने पर बताई कि हॉस्टल में एक बच्ची ने दवा खा लिया है। वह बीमार है। सवाल 11. घटनाक्रम के बारे में बताएं? जवाब: मुझे डेट स्पष्ट याद नहीं है। नीलम देवी (संचालिका), वार्डन (जिनका नाम साफ याद नहीं है) और अमरेंद्र (गार्ड) को पूछताछ के लिए पुलिस ले गई थी। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ा। 14 जनवरी को पुलिस मुझे ले आई। सवाल 12. क्या आपने पुलिस को घटना के बारे में जानकारी दी थी? जवाब : नहीं। सवाल 13. शम्भू गर्ल्स हॉस्टल में आप कहां रहते थे? जवाब : 5th फ्लोर पर रहता था। मैं आने-जाने के लिए लिफ्ट का प्रयोग करता था। सवाल 14. क्या गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियां भी लिफ्ट इस्तेमाल करती थीं? जवाब : नहीं, वे सभी सीढ़ियों का प्रयोग करती थीं। सवाल 15. क्या आप कभी पीड़िता को देखे या मिले थे? जवाब : नहीं, पीड़िता से हम कभी नहीं मिले। सवाल 16. क्या आपने पीड़िता के परिजन को सूचना दी थी? जवाब: नहीं। सवाल 17. क्या आप पीड़िता को देखने अस्पताल गए थे? जवाब : नहीं। सवाल 18. आपका व्यवसाय क्या है? जवाब : मेरा एक बुद्धा विहार नाम का अस्पताल है। यहां मैं डायरेक्टर के पोस्ट पर हूं। बुद्धा विहार मल्टी स्पेशलिस्ट इमरजेंसी हॉस्पिटल है। 8-8 घंटे की शिफ्ट में डॉक्टर आते हैं। मेरे अलावा अस्पताल में 2 और डायरेक्टर सुधीर और ब्रजेश हैं। मेरी एक ऑक्सीजन सप्लाई की दुकान है। सवाल 19. बुद्धा विहार अस्पताल कितने साल पुराना है? जवाब : लगभग 4 साल पुराना है। सवाल 20. क्या आपकी 5वीं मंजिल पर CCTV कैमरा लगा है? जवाब : नहीं, CCTV कैमरे ग्राउंड फ्लोर से लेकर 4th फ्लोर तक हैं। इन्हें हॉस्टल संचालिका ने लगवाया था। सवाल 21. आप आखिरी बार जहानाबाद कब गए थे? जवाब : लगभग 2 माह पहले। सवाल 22. घटना से पहले आप कहां थे? जवाब : मैं अपनी पत्नी संगीता रंजन और ड्राइवर छोटू कुमार के साथ 23 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 7:30 बजे अपनी गाड़ी से पहले दिल्ली गया। इसके बाद दिल्ली से चंडीगढ़ अपनी बेटी के पास गया था। वहां से बेटी को लेकर देहरादून गया। इंटर्नशीप के लिए बेटी को वहां छोड़कर दिल्ली आया। 1 जनवरी को खाटू श्याम दर्शन करते हुए 2 जनवरी को वापस पटना आया। सवाल 23. आप पटना से बाहर थे तब उस समय घर पर कौन था? जवाब : बेटा आकाश और दूसरी बेटी घर पर थी। सवाल 24. क्या आपका एग्रीमेंट पेपर उपलब्ध है? जवाब : हॉस्टल संचालिका नीलम देवी के साथ एग्रीमेंट किया गया है। मैंने 4th फ्लोर का हॉल दिया है। सवाल 25. क्या आप कुछ उल्लेखनीय बात बताना चाहेंगे? जवाब : नहीं। अब जानिए, छात्रा का इलाज करने वाले प्रभात मेमोरियल के डॉक्टर सतीश ने SIT को क्या बताया सवाल 1. घटना के संदर्भ में क्या कहना है? जवाब: मैं इमरजेंसी क्रिटिकल केयर ड्रामा का चीफ कंसल्टेंट हूं। 6 जनवरी को शाम 7:28 बजे 18 साल की लड़की दो लड़के और एक औरत के साथ इमरजेंसी में आई थी। उसका ब्लड प्रेशर 90 था। शरीर ठंडा पड़ गया था। ठीक से सांस नहीं ले पा रही थी। हमने उसके सेंट्रल लाइन में कैनुला (पतली नली जिसे नस में डाला जाता है) लगाया। BP कंट्रोल किया। इसके बाद उसकी सांस की नली को प्रोटेक्ट किया। उनकी नाक के रास्ते एनजी ट्यूब डाला था। सवाल 2. सेंट्रल लाइन क्या है?
जवाब : सेंट्रल लाइन बड़ी नस है, जिसके सहारे हम मरीज के शरीर में दवा और तरल डालते हैं। मरीज मुंह से भोजन करने की स्थिति में नहीं हो तो उसे इसी तरह पोषक तत्वों वाला तरल दिया जाता है। सवाल 3. इसके बाद आपने क्या किया? जवाब: हमने मरीज के खून का सैंपल जांच के लिए भेजा। मरीज शॉक में थी। उसके हाथ-पैर ठंडे थे। उसके लक्षण देखकर हमने पाया कि यह ड्रग ओवरडोज, उसमें भी ओपिओइड पॉइजनिंग हो सकता है। (मतलब दर्द से राहत देने वाली दवा का ओवरडोज) प्रोटोकॉल के अनुसार हमने मरीज का यूपीटी टेस्ट कराया। (UPT यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट है। इससे पता चलता है कि मरीज गर्भवती है या नहीं।) कोई भी यंग फीमेल अचेत हालत और शॉक में आती है तो यह टेस्ट कराया जाता है। हमें शक हुआ कि जहर से मरीज की हालत खराब हुई है। इसलिए उसके यूरिन को टेस्ट के लिए भेजा। इस टेस्ट को यूरिन टॉक्सिकोलॉजी बोलते हैं। इससे पता चलता है कि मरीज के शरीर में किस तरह का जहर है। सवाल 4. यूरिन टॉक्सिकोलॉजी और यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट की रिपोर्ट में क्या आया? जवाब : प्रेगनेंसी टेस्ट नेगेटिव था। यूरिन टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट में बेंजोडाईजेपिन्स और ओपॉयड्स स्क्रीनिंग पॉजिटिव आया था। (बेंजोडाईजेपिन्स नींद की दवा है। वहीं, ओपॉयड्स दर्द की दवा में होता है) सवाल 5. इलाज के दौरान क्या कोई महिला गायनेकोलॉजिस्ट ने मरीज को देखा था? जवाब: हां। हमने अल्ट्रासाउंड कराया था। इसमें इंटरनल इंजरी का पता नहीं चला था। गायनी कंसल्टेशन के जो कमेंट है, वह हमने आपको दिया है। मैं उस पर ज्यादा कमेंट नहीं करूंगा। सवाल 6. इसके बाद और क्या-क्या ट्रीटमेंट किया गया? जवाब : हमने मरीज के ब्रेन का सीटी स्कैन कराया था। पता चला कि उसके पूरे ब्रेन पर प्रेशर पड़ा है। थोड़ा खून भी बहा था। इसका इलाज किया था। सवाल 7. आपके हॉस्पिटल में किन-किन डॉक्टरों ने छात्रा का इलाज किया? जवाब : मैं प्राइमरी कंसलटेंट था। डॉक्टर राजेश पराजनी कंसलटेंट थे। डॉक्टर अभिषेक, अमन और अभिनव भी टीम में थे। सवाल 8. छात्रा के परिजनों ने आप लोगों को क्या बताया था? जवाब : परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी ठीक-ठाक थी। 5 जनवरी की शाम 5 बजे पटना स्टेशन पर उतरी। हॉस्टल गई। हॉस्टल वार्डन का फोन आया कि आपकी बेटी जब से आई है तब से खाना नहीं खाया है। छात्रा हमारे पास आई तब उसके साथ वार्डन और दो लोग थे जो खुद को छात्रा के मामा बता रहे थे। उन्होंने बताया कि छात्रा 6 घंटे से बेहोश है। सवाल 9. क्या परिजनों ने छात्रा के साथ किसी घटना की आशंका आपके सामने व्यक्त की थी? जवाब : नहीं। हमने बार-बार पूछा था कि आपको कोई शक है तो बताएं। जैसे किसी ने जहर दे दिया या फिर कोई और बात हुई है। हमारे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड है कि हमने क्या-क्या पूछा। उन्होंने किसी अनहोनी की आशंका जाहिर नहीं की थी। किसी तरह की मारपीट या दूसरी घटना को लेकर आशंका नहीं जताई थी। सवाल 10. कितने तारीख को पेशेंट को डिस्चार्ज किया गया था? जवाब : पेशेंट को डिस्चार्ज नहीं किया गया था। पेशेंट को यहां से वे लोग दूसरे हॉस्पिटल लेकर गए थे। हमने पुलिस को बताया था कि छात्रा के परिजन बहुत परेशान कर रहे हैं। दूसरी जगह ले जाना चाहते हैं। मैंने कॉल कर पुलिस को बुलाया था। पुलिस के सामने सारी फॉर्मेलिटी पूरी की गई। इसके बाद हमने बच्ची को दूसरे अस्पताल ले जाने दिया। पुलिस, SIT और CBI की जांच में अब तक क्या 3 बड़ी लापरवाही हुई? 1- मनीष को गिरफ्तार किया, लेकिन रिमांड पर नहीं लिया पुलिस ने मनीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन अभी तक न SIT और न CBI ने रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ की है। SIT ने बेऊर जेल जाकर मनीष से पूछताछ की। कोर्ट में उसने बयान बदल दिया। SIT ने कोर्ट को बताया कि 5 और 6 जनवरी को मनीष शम्भू गर्ल्स हॉस्टल के ऊपर स्थित अपने घर में था। हॉस्टल की संचालिका नीलम अग्रवाल ने बताया था कि उसने घटना की जानकारी मनीष को नहीं दी। उसे वार्डन ने बताया होगा। मनीष ने कोर्ट में कहा कि 5 जनवरी की सुबह 10 बजे वो बेटी को लेकर पावापुरी के मेडिकल कॉलेज गया था। उसी दिन रात के 8 बजे वापस लौटा। 6 जनवरी की सुबह 10:30 बजे अपने ऑफिस के लिए निकल गया। 7 जनवरी की सुबह उसे हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल ने घटना की जानकारी दी थी। शातिर है मनीष, बार-बार बदल रहा बयान पीड़ित परिवार के वकील एसके पांडेय ने कहा, ‘मनीष रंजन बेहद शातिर है। वह बार-बार अपना बयान बदल रहा है। छात्रा की मौत मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी तो 14 जनवरी को घर से बाहर क्यों गया? उसे गिरफ्तार करने ASP सदर अपनी टीम के साथ उसके घर पहुंचे तो वह वहां नहीं था। उन्होंने कहा, ‘मनीष की पत्नी ने पुलिस को बताया कि वह कार से बाहर गए हैं। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसे पटना के भागवत नगर में पकड़ा। पुलिस ने भी केस डायरी में लिखा है कि वह प्रभावशाली व्यक्ति है। जांच प्रभावित कर सकता है। इसलिए उसे गिरफ्तार किया।’ ऐसे में सवाल है कि किसके दबाव में मनीष को पुलिस ने बचाया? मनीष को कौन बचा रहा है? वह किसका करीबी है? ड्राइवर से हॉस्पिटल का डायरेक्टर बन गया मनीष

वकील एसके पांडेय ने दावा किया, ‘मनीष कुछ साल पहले तक जहानाबद के एक पूर्व सांसद का ड्राइवर था। अब बुद्धा विहार नाम से एक मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल का डायरेक्टर है। करोड़ों रुपए की संपत्ति का मालिक है।’ वकील ने आरोप लगाया, ‘मनीष हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाता है। वह लड़कियों को मजबूर कर गलत धंधे में लाता है। इसकी जांच होनी चाहिए।’ SIT और CBI जांच करे, क्यों बयान बदल रहा मनीष वकील एसके पांडेय ने कहा, ‘पोस्टमार्टम और FSL की रिपोर्ट रेप और हत्या की तरफ इशारा करती है, लेकिन यहां पर जांच एजेंसी झूठी और मनगढ़ंत कहानी तैयार करती है। इसी वजह से कोर्ट में सुनवाई के दौरान SIT और CBI के बयान मैच नहीं कर रहे।’ 2- छात्रा के साथ रेप हुआ, कपड़े से स्पर्म मिला, किसका है पता नहीं 6 जनवरी को छात्रा बेहोश मिली। 11 जनवरी को उसकी मौत हुई। 16 जनवरी को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हुई। 9 जनवरी को पटना पुलिस ने चित्रगुप्त नगर थाना में FIR दर्ज किया। तत्कालीन थानेदार व सब इंस्पेक्टर रौशनी कुमारी ने 9 से 17 जनवरी तक केस की जांच की। 18 जनवरी से 13 फरवरी तक पटना पुलिस की SIT ने केस की जांच की। 14 फरवरी से लेकर अब तक CBI केस की जांच कर रही है। SIT ने माना कि रेप हुआ था। कपड़े पर मिला स्पर्म किसका है, यह पता लगाने के लिए कई लोगों के सैंपलों की जांच हुई, लेकिन न बिहार पुलिस और न CBI अब तक पता लगा पाई है कि रेप किसने किया और वह स्पर्म किसका था। अब तक ये सवाल बरकरार है कि छात्रा की मौत हुई कैसे? 3- छात्रा के कमरे से नींद की कितनी दवा के कितने खाली पत्ते मिले, अलग-अलग बयान SIT की केस डायरी में बताया गया है कि 10 जनवरी की दोपहर 1 बजे प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल से पुलिस ने मेडिसिन का एक खाली पत्ता जब्त किया था। यह छात्रा के मामा के पास था। दूसरी तरफ वकील एसके पांडेय ने बताया कि CBI ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान उन्हें दवा के 6 खाली पत्ते मिले थे। वहीं, SIT को दिए बयान में हॉस्टल की वार्डन चंचल ने कहा कि उसने छात्रा के कमरे में बेड के नीचे से दवा के 5 रैपर बरामद किए थे। दवा के पत्तों को लेकर तीन तरह की बातें सामने आने के बाद कोर्ट ने सवाल खड़ा किया है।

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