नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के प्रिंसिपल बेंच ने पानीपत के गांव खुखराना में सीमेंट प्लांट द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन के मामले में सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) को पिछले उल्लंघनों पर अब तक की गई कार्रवाई की समीक्षा करने और छह सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। जांच में सामने आए गंभीर उल्लंघन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के वकील ने ट्रिब्यूनल को सूचित किया कि 27 फरवरी 2025 को संयुक्त समिति द्वारा सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट में प्लांट के भीतर प्रदूषण नियंत्रण मानकों की कई गंभीर अनदेखी पाई गई थी। HSPCB की निष्क्रियता पर उठे सवाल मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि हालांकि प्लांट प्रबंधन ने कुछ उल्लंघनों को बाद में ठीक करने का दावा किया है, लेकिन हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने पिछले नियमों के उल्लंघन के लिए ‘प्रोजेक्ट प्रोपोनेंट’ (प्लांट प्रबंधन) के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है। निरीक्षण के समय प्लांट था बंद रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जिस समय संयुक्त समिति ने दौरा किया, उस समय प्लांट बंद था। इस कारण से प्लांट के सभी हिस्सों का पूरी तरह से निरीक्षण नहीं किया जा सका और न ही गांव खुखराना के भीतर और बाहर परिवेशी वायु गुणवत्ता की वास्तविक मॉनिटरिंग की जा सकी। अगली सुनवाई मई में ट्रिब्यूनल ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 मई 2026 को तय की है। कोर्ट ने HSPCB के वकील के अनुरोध पर उन्हें मामले की फिर से जांच करने और छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। खुखराना गांव के निवासियों के लिए यह मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो लंबे समय से सीमेंट प्लांट से उड़ने वाली धूल के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।