पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में अब कई महत्वपूर्ण रक्त जांचें सप्ताह में केवल तीन दिन- सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को ही की जाएंगी। राजेंद्र सर्जिकल वार्ड स्थित पैथोलॉजी विभाग में इस संबंध में एक सूचना चस्पा कर मरीजों और उनके परिजनों को सूचित किया गया है। इस निर्णय से बड़ी संख्या में मरीजों को इलाज में देरी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या विशेष रूप से उन मरीजों के लिए अधिक है जो दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए पीएमसीएच पहुंचते हैं। मरीजों को अगली डेट तक इंतजार करना पड़ रहा अस्पताल द्वारा जारी सूचना के अनुसार, एफटी-3, एफटी-4, टी-3, टी-4, टीएसएच, विटामिन-डी, विटामिन बी-12, एंटी-सीसीपी, प्रोलैक्टिन और पीएसए (फ्री व टोटल) जैसी जांचें अब केवल इन्हीं निर्धारित तीन दिनों में होंगी। पहले ये जांचें सप्ताह में अधिक दिनों तक उपलब्ध थीं। पीएमसीएच में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज आते हैं और चिकित्सकों द्वारा इन जांचों की सलाह नियमित रूप से दी जाती है। ऐसे में तय दिनों के अलावा आने वाले मरीजों को अगली तिथि तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उपचार की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। लंबी कतारें लग रही, सैंपल देने में घंटों इंतजार करना पड़ता है- परिजन मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सीमित दिनों में जांच होने से लंबी कतारें लग रही हैं और सैंपल देने में घंटों इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीण और दूर-दराज के जिलों से आने वाले मरीजों को दोबारा अस्पताल आना पड़ रहा है, जिससे उनका यात्रा खर्च बढ़ रहा है। इससे आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं। ठहरने की व्यवस्था पर अतिरिक्त खर्च हो रहा है और दिहाड़ी मजदूरों की आमदनी भी प्रभावित हो रही है। कई मामलों में जांच रिपोर्ट में देरी के कारण उपचार शुरू होने में भी विलंब हो रहा है। संसाधनों और मानवबल की कमी बनी वजह अस्पताल सूत्रों के अनुसार मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या और उपलब्ध संसाधनों पर दबाव के कारण जांच की समय-सारिणी सीमित करनी पड़ी है। पीएमसीएच में पुनर्निर्माण के बाद बेड क्षमता और सुविधाओं में विस्तार की प्रक्रिया जारी है, लेकिन डॉक्टरों और फैकल्टी की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। पैथोलॉजी विभाग में भी विशेषज्ञों और तकनीकी स्टाफ की कमी बताई जा रही है।
अस्पताल अधीक्षक ने किया आश्वस्त पीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है, जिसके बाद तमाम विभागों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और कई मुद्दे उनके संज्ञान में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच व्यवस्था को लेकर मिली जानकारी की समीक्षा की जाएगी और सभी आवश्यक जांचों को प्रतिदिन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई विभागों में मानव संसाधन की कमी है, जिसे दूर करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। मरीजों को सुधार की उम्मीद मरीजों और उनके परिजनों को उम्मीद है कि जांच सेवाएं जल्द सामान्य होंगी ताकि आवश्यक परीक्षण समय पर हो सकें और इलाज में देरी न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े सरकारी अस्पतालों में बढ़ते मरीज भार के अनुरूप संसाधन और मानवबल का संतुलन जरूरी है, अन्यथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है।