SI से DSP बना गौतम-कैसे बनाई 100 करोड़ की संपत्ति:पत्नी से ज्यादा मुस्लिम गर्लफ्रेंड के नाम प्रॉपर्टी, नौकरानी की ग्लैमरस लाइफ, जानिए कमाई का नेटवर्क

1994 में गौतम कुमार बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर बना। तब इसके पास संपत्ति के नाम पर पटना का पुश्तैनी घर ही था। आज 100 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति का मालिक है। पत्नी रूबी कश्यप से ज्यादा प्यार प्रेमिका शगुफ्ता शमीम के लिए दिखाता नजर आया है। पत्नी के नाम 4 तो प्रेमिका के नाम 7 संपत्ति ली है। नौकरानी पारो के लिए भी रानियों जैसे ठाठबाठ के इंतजाम थे। ग्लैमरस लाइफ जी रही थी। थार में सवार होकर अपने साहेब के घर झाड़ू-पोछा लगाने और बर्तन साफ करने आती थी। बुलेट ड्राइव कर रील्स बनाती थी। 32 साल के करियर में सब इंस्पेक्टर से डीएसपी बनने वाले गौतम ने सिलीगुड़ी में चाय बागान खरीदे। नोएडा और गुरुग्राम में फ्लैट लिए। बिहार पुलिस की एजेंसी आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इसके काली कमाई की जांच कर रही है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, पुलिस की नौकरी में रहते हुए गौतम ने कैसे 100 करोड़ रुपए की कमाई की? माफियाओं संग सांठगांठ से लेकर स्मगलिंग कराने तक, कैसे काम किए? कहां और कब कितनी जमीन ली? पहले जानिए गौतम कुमार के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? 29 मार्च को EOU ने गौतम के खिलाफ पटना में केस दर्ज किया। 31 मार्च को इसके 6 ठिकानों पर छापेमारी की। उनके ठिकानों से 80 करोड़ रुपए की संपत्ति मिली। जांच के बाद यह 100 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। पुलिस मुख्यालय ने गौतम का लाइन क्लोज कर दिया है। उसे किशनगंज SDPO-1 पद से हटाया गया है। गौतम के साथ घूमती थी उसकी नौकरानी गौतम की कई ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें वह अपनी नौकरानी पारो के साथ घूमता दिखा है। पारो किशनगंज के धरमगंज के किला बागान की रहने वाली है। पारो को रील्स बनाने और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का शौक है। उसने अपने इंस्टाग्राम पेज पर थार कार और बुलेट बाइक से साथ वीडियो पोस्ट किए हैं। एक तस्वीर में वह नोटों की गड्डियां लिए दिखी है। कुछ तस्वीरों में वह निलंबित SDPO और उनके साथियों के साथ नजर आ रही है। पत्नी से ज्यादा प्रेमिका शगुफ्ता शमीम के लिए खरीदी प्रॉपर्टी गौतम की शादी पूर्णिया के मधुबनी मोहल्ला में रहने वाली रूबी कश्यप से हुई थी। शादी के बाद 1999 में रूबी सरकारी टीचर बनीं। अभी पूर्णिया सदर के मिडिल स्कूल में तैनात हैं। इन दोनों के तीन बेटे सिद्धार्थ गौतम, सिद्धांत गौतम और राघव कश्यप हैं। शादीशुदा होने के बाद भी गौतम की एक प्रेमिका है। उसने पूर्णिया के लाइन बाजार में झंडा चौक के आशियाना कॉलोनी में रहने वाली गर्लफ्रेंड शगुफ्ता शमीम पर खूब पैसे खर्च किए। EOU की जांच में अब तक 25 प्रॉपर्टी खरीदे जाने के सबूत मिले हैं। इनमें से 16 प्रॉपर्टी का जिक्र FIR में है। उसने पत्नी के नाम 4, बेटे सिद्धार्थ के नाम पर 1, सास पूनम देवी के नाम पर 3 और महिला दोस्त के नाम से 7 प्रॉपर्टी खरीदी थी। शगुफ्ता के नाम से खरीदी गई सभी 7 जमीन NH पर है। जांच एजेंसी का दावा है कि इन जमीनों की कीमत करोड़ों रुपए है। शातिराना खेल खेलते हुए डीएसपी ने बेहद कम कीमत में इनकी रजिस्ट्री कराई है। इन जमीनों को खरीदने के लिए काली कमाई के कैश रुपए का इस्तेमाल हुआ है। नौकरी के 19वें साल में मिला प्रमोशन, कैसा रहा है गौतम का करियर? गौतम 1994 में बिहार पुलिस का सब इंस्पेक्टर बना। नौकरी के 19वें साल 2013 में प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बना। इसके बाद 2019 में गैलेंट्री अवार्ड पाकर डीएसपी बन गया। कुल मिलाकर बिहार पुलिस में 32 साल नौकरी की। सब इंस्पेक्टर से डीएसपी बनने तक के सफर में गौतम ने कैसे 100 करोड़ रुपए की संपत्ति जुटाई? इस सवाल का जवाब EOU तलाश रही है। इनकी दो टीमें किशनगंज और पूर्णिया में कैम्प कर रही है। इंटरनल तरीके से गौतम की कुंडली खंगाल रही है। माफियाओं संग मिलीभगत कर गौतम ने की काली कमाई जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार गौतम ने काली कमाई करने के लिए माफियाओं के साथ सांठगांठ कर रखी थी। लंबे समय से उसका तगड़ा कनेक्शन बॉर्डर वाले इलाके के शराब माफिया, कोल माफिया, एंट्री माफिया और अलग-अलग सामानों की स्मगलिंग करने वालों से रहा है। डीएसपी रहते हुए वह पिछले कई सालों से माफियाओं को संरक्षण दे रहा था। गौतम को 2023 में किशनगंज का SDPO-1 बनाया गया था। करीब तीन साल से इसकी पोस्टिंग वहीं थी। किशनगंज की सीमा पश्चिम बंगाल और नेपाल से लगती है। यहां शराब से लेकर कई तरह के कीमती सामानों की स्मग्लिंग होती है। आरोप है बॉर्डर पार कराने के लिए माफियाओं से हर काम के एवज में गौतम को मोटी रकम मिलती थी। मोबाइल से खुलेंगे राज, फर्जी नाम पर ले रखे थे दो नंबर छापेमारी के दौरान EOU की टीम ने गौतम के 4 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। अब यही मोबाइल इसके सारे काले कारनामों का राज उगलेंगे। जब्त किए गए सभी मोबाइल जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजे जाएंगे। अब तक की जांच में एक चौकाने वाली बात सामने आई। गौतम दो ऐसे मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर रहा था, जिनके सिम कार्ड उनके अपने नाम और पता पर नहीं थे। दोनों मोबाइल नंबर फर्जी नाम-पते पर लिए गए। अब इन नंबरों के कॉल डिटेल खंगाले जाएंगे। CDR निकाल कर पता किया जाएगा कि कब और किससे बात हुई। फर्जी नाम पर सीमकार्ड लेने की वजह क्या थी? नेपाल, सिलीगुड़ी से दिल्ली तक खरीदी प्रॉपर्टी गौतम ने बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली से लेकर नेपाल तक में प्रॉपर्टी खरीदी थी। इसने पूर्णिया के डगरुआ थाना इलाके में कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीद रखी है। ये प्रॉपर्टी डरा-धमका कर लोगों से कम कीमत में लिखवाए गए। प्रॉपर्टी के पेपर को निकाला गया है। अब इसकी जांच चल रही है। इस मामले में जांच टीम जल्द ही डगरुआ के स्थानीय लोगों से पूछताछ करेगी। गौतम कुमार को लेकर लोगों के जरिए कुछ नए खुलासे होने की उम्मीद है। गौतम ने गुरुग्राम, नोएडा, पुणे, सिलीगुड़ी और गंगटोक में कीमती प्रॉपर्टी खरीद रखी है। एक विधायक के साथ पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में चाय बागान खरीदा है। वह सिलीगुड़ी में नई प्रॉपर्टी खरीदने की तैयारी में था। हाल के दिनों में कई बार वहां गया था। सीनियर अधिकारियों से सेटिंग, सीमांचल में खूब वसूले रुपए गौतम ने अधिकारियों से सेटिंग कर रखी थी। इसके चलते वह मनचाही पोस्टिंग लेता रहा। मनचाही पोस्टिंग के लिए नेताओं के बीच भी पैठ बना रखी थी। इसने अपनी नौकरी के सबसे अधिक साल सीमांचल इलाके में गुजारे। मूल रूप से पटना के गौतम की पहली पोस्टिंग सब इंस्पेक्टर के रूप में सीमांचल में हुई थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसने काली कमाई के लिए सेटिंग कर अपना ट्रांसफर रोड ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में करा लिया था। उसने हाइवे पर ट्रक ऑपरेटर्स को शिकार बनाया। उनसे खूब रुपए वसूले। गौतम की पोस्टिंग पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और बगहा में रही है। पूर्णिया में बनाया 2 करोड़ रुपए का घर पूर्णिया के डगरुआ थाना में थानेदार रहते वक्त 2012 में गौतम ने मधुबनी मोहल्ले में 3 कट्ठा जमीन अनिल सिंह के नाम पर खरीदवाया था। फिर 9 साल बाद 2021 में इसी जमीन को अनिल सिंह से अपने बेटे सिद्धार्थ गौतम को गिफ्ट करवा दिया। इसी जमीन से सटे 4 कट्‌ठा जमीन 2015 में खुद के और अपनी पत्नी के नाम पर खरीदा। इसके बाद दोनों जमीन को मिलाकर कुल 4000 स्क्वायर फीट में 4 फ्लोर का आलिशान घर बनाया। इस घर की कुल कीमत 2 करोड़ रुपए से अधिक है। गाड़ियों का शौकिन है गौतम गौतम कुमार गाड़ियों का शौकिन है। इसने 55 लाख रुपए खर्च कर 4 गाड़ियां खरीद रखी है। 16 लाख रुपए की एक थार अपनी सास के नाम पर खरीदी। इस गाड़ी की सवारी खुद करता है। इसका इस्तेमाल उनका बेटा और पत्नी भी करती हैं। डीएसपी ने अपने नाम से 17 लाख रुपए की क्रेटा कार भी खरीद रखी है। 8 बैंक अकाउंट्स की हुई जांच अपनी जांच के क्रम में EOU की टीम ने 8 बैंक अकाउंट्स खंगाला है। इसमें डीएसपी गौतम कुमार के 3, पत्नी रूबी कश्यप के एक, पति-पत्नी के नाम का एक जॉइंट अकाउंट, बेटा सिद्धार्थ गौतम का एक और महिला दोस्त शगुफ्ता के 2 बैंक अकाउंट शामिल हैं। 60.27% अधिक मिली चल-अचल संपत्ति 1994 में गौतम बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर बना। तब इसके पास चल-अचल संपत्ति के नाम पर पटना का पुश्तैनी घर ही था। पुलिस की नौकरी में आने के बाद से लेकर अब तक 3 करोड़ 64 लाख 99 हजार 600 रुपए की चल-अचल संपत्ति का मालिक है। नौकरी करते हुए सैलरी के रूप में अब तक की इसकी कमाई कुल 3.22 करोड़ रुपए है। 1 करोड़ 51 लाख 9 हजार 644 रुपए खर्च किए हैं। कुल मिलाकर इसकी बचत 1 करोड़ 70 लाख 90 हजार 356 रुपए की रही। इस आधार पर EOU ने इनके खिलाफ 1 करोड़ 94 लाख 9 हजार 244 रुपए की आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज किया, जो 60.27% अधिक है। पत्नी, सास और महिला दोस्त भी नामजद EOU ने अपनी जांच में एक बात स्पष्ट की है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में अकेले गौतम कुमार शामिल नहीं था। ब्लैक मनी को व्हाइट में बदलने में कई लोगों ने इसका साथ दिया। काली कमाई खपाने में पत्नी, सास और महिला दोस्त ने भरपूर साथ दिया है। गौतम के साथ इन्हें भी नामजद किया गया है। इन सभी के बैंक अकाउंट्स में कैश में रुपए जमा कराए गए। उन रुपयों को चेन ट्रांसफर करते हुए अलग-अलग अकाउंट्स में भेजा गया और उनसे जमीने खरीदी गईं। इस बात के सबूत EOU को मिले हैं। नेपाल में खरीदी कमर्शियल प्रॉपर्टी, बढ़ेगी गौतम की मुसीबत गौतम की मुसिबतें बढ़ने वाली है। इसने नेपाल में किशनगंज से सटे इलाके में कॉमर्शियल प्रॉपर्टी खरीद रखी है। इस मामले में EOU बहुत जल्द भारतीय दूतावास और CBI के माध्यम से इंटरपोल की मदद लेने वाली है। गौतम के सभी सहयोगियों की हो रही जांच EOU के ADG नैयर हसनैन खान ने बताया कि गौतम कुमार के खिलाफ जांच अभी जारी है। यह लंबी चलेगी। इनके खिलाफ नए तथ्य सामने आए हैं। हमारी विशेष टीम वहां कैम्प कर रही है। सामने आए तथ्यों की जांच कर रही है। सीनियर अधिकारियों पर खड़े हुए सवाल सब इंस्पेक्टर से लेकर डीएसपी तक के सफर में गौतम कुमार जिस तरह से भ्रष्टाचार करता रहा तो सवाल उठता है कि क्या कभी SP, DIG और IG रैंक के अधिकारियों को इसके काले कारनामों की जानकारी नहीं हुई? अगर जानकारी हुई तो कभी कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? इन सवालों का जवाब तलाशने के लिए हमने पूर्व DGP अभयानंद से बात की। उन्होंने कहा, ‘सीनियर को पता कैसे नहीं चलेगा? SP अपने थानेदार, DGP अपने SP, मुख्यमंत्री अपने चीफ सेक्रेटरी और DGP के बारे में नहीं बता सकते हैं। ऐसा संभव नहीं। अगर सीनियर अधिकारियों का पब्लिक से मिलना जुलना नहीं भी होता है और वो सिर्फ पब्लिक से मिलने वाले आवेदनों को ही पढ़ लेंगे तो उन्हें अपने हर अफसर के कारनामों की जानकारी मिल जाएगी।’ अभयानंद ने कहा, ‘जहां तक बात सब इंस्पेक्टर के ट्रांसफर-पोस्टिंग की है तो इनकी अधिक संख्या है। सब इंस्पेक्टर का एक बार ट्रांसफर हो गया तो वापसी के लिए ये लोग इंटरनली व्यवस्था कर लेते हैं। अगर DIG मन लायक मिल गया तो ये मनचाही पोस्टिंग लेने में सफल हो जाते हैं।’ उन्होंने बताया, ‘भ्रष्टाचार में डूबे ऐसे लोगों को सजा नहीं मिलना बढ़ावा देता जा रहा है। भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के लिए हमने एक तरीका बनाया था कि सरकार को हर साल दिए जाने वाले संपत्ति के ब्यौरा से कोई पुलिस अफसर जानकारी छीपाता है और उसकी संपत्ति आय से अधिक मिलती है तो उसे डिसमिस कर दिया जाता था।’

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