UPSC सिविल सर्विस एग्जाम 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है। पंचकूला के रहने वाले एकांश ढुल ने तीसरी रैंक हासिल की है। एकांश ढुल परिवार के साथ सेक्टर 12A में रहते हैं। उनकी मां निर्मला स्कूल प्रिंसिपल हैं। पिता कृष्ण ढुल भाजपा नेता हैं। एकांश ने साल 2024 में UPSC में 342वां और साल 2025 में 295वां रैंक हासिल की थी। फिलहाल वह शिमला में ट्रेनिंग ले रहे हैं। शुक्रवार शाम को वह पंचकूला पहुंचे, यहां परिवार ने उनका जोरदार स्वागत किया। रिजल्ट के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एकांश के पिता कृष्ण ढुल को फोन कर बेटे की तीसरी रैंक आने पर बधाई दी। CM ने कहा कि एकांश ने पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। अब जानिए एकांश के पिता ने क्या कहा…. बेटे का IAS अफसर बनने का सपना एकांश के पिता कृष्ण ढुल ने बताया कि एकांश ने जीवन में एक ही लक्ष्य बनाया था – IAS अफसर बनना। “एक पिता के तौर पर उसने मुझे आगे बढ़ते हुए देखा है। उसका भी यही लक्ष्य था कि कैसे मैं अपने पिता से बड़ा नाम करूं। उसे लगता था कि राजनीति या व्यापार में नाम बनाने में काफी लंबा समय लगेगा। 12वीं के बाद UPSC की तैयारी शुरू की कृष्ण ने कहा कि हमें RSS में सिखाया जाता है कि कैसे सामने वाले व्यक्ति से बड़ी लकीर खींचनी है। उसे यही लगता था कि IAS अफसर बनकर ही वह अपने पिता से बड़ा नाम कर सकता है।” 2018 में 12वीं करने के बाद उसका यही लक्ष्य था। पहले, 22 साल की उम्र में जब उसकी 342वीं रैंक आई, तो हमें बहुत खुशी हुई। इसके बाद उसने फिर एग्जाम क्लियर किया। सवा घंटे से ज्यादा कभी नहीं पढ़ा उन्होंने कहा कि एकांश लंबे समय तक नहीं पढ़ता था। वह तभी तक पढ़ता था जब तक उसके दिमाग में जानकारी जाती थी। वह घंटे-सवा घंटे से ज्यादा नहीं पढ़ता था। पढ़ाई के दौरान हमारा यही मकसद रहता था कि उसे बढ़ावा दिया जाए। उसमें सीखने की क्षमता काफी है। वह अच्छे से जानता है कि कैसे काम सीखना है और कैसे अपनी गलती सुधारनी है। चंडीगढ़ से स्कूलिंग, BA दिल्ली से की एकांश ढुल ने 10वीं क्लास चंडीगढ़ के सेक्टर 27 स्थित भवन स्कूल से की। इसके बाद 12वीं उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर -26 स्थित संत कबीर स्कूल से की। ग्रेजुएशन के लिए वह दिल्ली चले गए। उन्होंने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बीए ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की। दिल्ली में ही UPSC की कोचिंग ली इसके बाद एकांश ने दिल्ली से ही UPSC की कोचिंग ली। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि आत्म-अध्ययन और अनुशासन ही सफलता की असली कुंजी हैं। पहली बार की सफलता से बहुत कुछ सीखा, लेकिन संतोष नहीं मिला। इसलिए खुद से वादा किया कि अगली बार और बेहतर करूंगा, और वही हुआ। ————————- UPSC रिजल्ट से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें :- पानीपत की श्रेया गुप्ता को UPSC में 114वीं रैंक, बिना कोचिंग और मोबाइल से दूरी बनाकर पाई सफलता, पिता एडवोकेट UPSC परीक्षा में यमुनानगर की मानसी की 78वीं रैंक:आठ-आठ घंटे की थी तैयारी; मां डॉक्टर, पिता सीए और भाई एडवोकेट सोनीपत के वैभव ने UPSC में 344वीं रैंक हासिल की:बिना कोचिंग तीसरे प्रयास में मिली सफलता; परिवार में जश्न का माहौल रेवाड़ी के मंजीत सिंह की UPSC में 490वीं रैंक: पिता दिल्ली पुलिस में एएसआई और दादा थे एसआई, पहले प्रयास में पाई सफलता