अमरनाथ यात्रा की तारीखों का ऐलान:इस बार 19 दिन लंबी, बीमा डबल; रजिस्ट्रेशन कैसे, शर्तें क्या, सवाल-जवाब में जानिए

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग स्थित श्री बाबा अमरनाथ जी की यात्रा के लिए तारीखों का ऐलान हो गया है। इस बार यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी। इस बार यात्रा 57 दिन चलेगी। पिछली बार महज 38 दिन की यात्रा हुई थी। इस बार श्रद्धालुओं को 19 दिन ज्यादा मिलेंगे। यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कल यानी 15 अप्रैल से शुरू हो जाएंगे। ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन सुविधा भी कल से ही मिलेगी। इसके लिए 4 बैंकों को अधिकृत किया गया है। पंजाब समेत देश भर में इन्हीं बैंकों से रजिस्ट्रेशन सुविधा मिलेगी। इसके अलावा इस बार यात्रियों का दुर्घटना बीमा डबल यानी 10 लाख रुपए कर दिया गया है। सवाल-जवाब में पढ़िए यात्रा के बारे में पूरी जानकारी… सवाल: अमरनाथ यात्रा की शुरुआत क्यों हुई?
जवाब: पौराणिक कथाओं के अनुसार जब माता पार्वती ने भगवान शिव से उनके अमर होने का रहस्य पूछा तो शिवजी उन्हें हिमालय की एक एकांत गुफा में ले गए, ताकि कोई अन्य जीव इस कथा को न सुन सके। इसी गुफा में शिवजी ने पार्वती जी को जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्ति का मार्ग बताया। मान्यता है कि कथा सुनाते समय वहां मौजूद कबूतरों के एक जोड़े ने भी यह रहस्य सुन लिया और वह अमर हो गया। कहा जाता है कि आज भी श्रद्धालुओं को वहां कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है, जिसे शिव-पार्वती का प्रतीक माना जाता है। गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है, जिसे बाबा बर्फानी कहा जाता है। लोग इसके दर्शन को मोक्ष प्राप्ति का रास्ता मानते हैं। सवाल: यात्रा की शुरुआत कब हुई?
जवाब: अमरनाथ गुफा का इतिहास सदियों पुराना है। लेकिन आधुनिक समय में इसकी खोज और यात्रा की शुरुआत को लेकर अलग-अलग मत हैं। प्राचीन काल में 11वीं शताब्दी की किताब राजतरंगिणी में अमरेश्वर (अमरनाथ) मंदिर का उल्लेख मिलता है, जिससे पता चलता है कि प्राचीन काल में भी यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल था। एक मान्यता के अनुसार, 19वीं शताब्दी (लगभग 1850) में बूटा मलिक नाम के एक मुस्लिम चरवाहे ने इस गुफा की फिर से खोज की थी। कहा जाता है कि उसे एक साधु ने कोयले का थैला दिया था जो घर पहुंचने पर सोने के सिक्कों में बदल गया। जब वह साधु को धन्यवाद देने वापस गया, तो उसे वहां यह पवित्र गुफा मिली। हालांकि, आधिकारिक तौर पर यह यात्रा साल 1934 में डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह ने शुरू करवाई थी। सवाल: यात्रा पर कौन जा सकता है?
जवाब: श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की गाइडलाइन के मुताबिक यात्रा पर 13 साल से बड़े और 70 साल से कम उम्र के लोग जा सकते हैं। हालांकि, इनमें भी तय किया गया है कि 6 सप्ताह से ज्यादा समय की गर्भवती महिलाओं को यात्रा पर जाने की परमिशन नहीं मिलेगी। सवाल: यात्रा पर जाने के लिए क्या करना होगा?
जवाब: यात्रा पर जाने के इच्छुक लोगों को सबसे पहले अपना मेडिकल टेस्ट करवाना होगा। इसके लिए सरकारी अस्पताल में जाकर एमडी मेडिसिन डॉक्टर से मिलना होगा। डॉक्टर को यात्रा की बात बताकर मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट ले सकते हैं। सर्टिफिकेट जारी करने से पहले डॉक्टर आपका ECG, ब्लड प्रेशर और एक्सरे करेगा। इसकी रिपोर्ट ही मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट में लिखी जाएगी। सवाल: यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करवाना है?
जवाब: श्री अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जेएंडके बैंक, एसबीआई और पीएनबी में जाकर फॉर्म भरना होगा और 150 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस जमा करानी होगी। बैंकों में इसके अलग से काउंटर बनाए जाते हैं। फॉर्म और फीस जमा होने के बाद यात्री की बायोमेट्रिक ई-केवाईसी होगी। इसकी एक स्लिप मिलेगी, जिसे यात्रा की पर्ची के रूप में यात्री को अपने पास रखना होगा। यह पर्ची ही यात्रा के दौरान चेकिंग के समय दिखानी होगी। सवाल: यात्रा की शुरुआत कैसे करेंगे?
जवाब: रजिस्ट्रेशन होने के बाद यात्री यात्रा शुरू होने पर कभी भी जा सकता है। अपने घर से यात्री को पंजाब-जम्मू कश्मीर के बॉर्डर पर लखनपुर पहुंचना होगा। यहां सरकारी शेल्टर में यात्री को ठहरने और खाने-पीने की सुविधा मिलेगी। यहीं पर प्रत्येक रजिस्टर्ड यात्री और सेवा प्रदाता को रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (RFID) दी जाएगी। RFID कार्ड अनिवार्य कर दिए गए हैं। सौ प्रतिशत तीर्थ यात्रियों को ये कार्ड जारी किए जा रहे हैं। इसके बाद आयोजक ही यात्री को आगे यात्रा पर भेजते हैं और वापस लाते हैं। यात्रा की तारीख भी आयोजक ही तय करते हैं। सवाल: पैदल यात्रा कहां से और किन रास्तों से होगी?
जवाब: अमरनाथ की यात्रा पैदल यात्रा दो रूट से होती है। पहला अनंतनाग जिले का पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम रूट्स है। वहीं, दूसरा रास्ता गांदरबल जिले का बालटाल रूट है। यह करीब 14 किलोमीटर लंबा है, लेकिन इसमें चढ़ाई ज्यादा खड़ी है। यहां तक यात्री को पहुंचाने का काम श्राइन बोर्ड ही करता है। सवाल: यात्रियों के ठहरने की कहां-कहां व्यवस्था होगी?
जवाब: यात्रियों को ठहराने के लिए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ही व्यवस्था करता है। इस बार भी जम्मू के यात्री निवास में श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था होगी। हमेशा की तरह श्रद्धालु लखनपुर से यात्री निवास भगवती नगर (जम्मू) पहुंचेंगे। यहां से श्रद्धालुओं के जत्थे को रवाना किया जाएगा। इसके बाद बालटाल, पंथाचौक (श्रीनगर), नुनवान और चंदरकोट में यात्री निवास की सुविधा उपलब्ध है। सवाल: यात्रा के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं?
जवाब: यात्रा के रूट्स के संवेदनशील स्थानों पर सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। इस बार भी यात्रा के लिए मल्टीलेयर सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है। जबकि सेना ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात रहती है। सवाल: कितने दिन तक चलेगी यात्रा?
जवाब: पिछले साल यात्रा 3 जुलाई को शुरू होकर 9 अगस्त 2025 को संपन्न हुई थी। यात्रा की अवधि महज 38 दिन की थी। इस बार श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए 19 दिन अधिक मिलेंगे। यानी यात्रा पूरे 57 दिनों तक चलेगी। श्री बाबा अमरनाथ यात्रा की अवधि पहले भी 2 महीने होती रही है। हालांकि, अकसर यह देखा गया है कि समय से पहले (15-20 दिन) बाबा बर्फानी अंतर्ध्यान हो जाते हैं। उसके बाद यात्रियों की संख्या कम होती जाती है। हिंदू व धार्मिक संगठनों ने कई बार यात्रा की अवधि कम होने पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, श्री अमरनाथश्राइन बोर्ड यात्रा मार्गों पर बर्फ हटाने की प्रक्रिया, मरम्मत कार्यों और अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही यात्रा का फैसला करता है।

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