आश्रम में नाबालिग लड़की की मौत मामले में सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब; पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख, पुलिस से भी मांगा जवाब

चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर महिला को आंशिक राहत देकर पीएसईबी को उसके नाम और जेंडर परिवर्तन के आवेदन पर कानून अनुसार जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया है। जस्टिस कुलदीप तिवारी ने कहा कि यदि याची 3 सप्ताह के भीतर मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करती है तो बोर्ड संशोधित शैक्षणिक प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर तेजी से फैसला ले। 1995 में जन्मी याची को जन्म के समय पुरुष के रूप में दर्ज किया गया था। उसने अपनी लैंगिक पहचान को ट्रांसजेंडर महिला के रूप में स्वीकार किया और नया नाम अपना लिया। हालांकि शैक्षणिक दस्तावेजों में अब भी पुराना नाम और जेंडर दर्ज था। बोर्ड से कई प्रयासों के बावजूद सुधार न होने पर उसने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में शिक्षा बोर्ड के नियम 2.1 को चुनौती दी गई, जिसके तहत नाम और जेंडर परिवर्तन के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र और भारत सरकार के गजट में प्रकाशन अनिवार्य किया गया है। भास्कर खास जालंधर स्थित गांधी वनिता आश्रम में नाबालिग लड़की की संदिग्ध हालात में हुई मौत के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि घटना को हादसा बताकर दबाने की कोशिश की गई है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों का उल्लेख सामने आया है। याचिका में मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। अदालत ने पूछा कि इतने गंभीर और चौंकाने वाले घटनाक्रम के बावजूद अब तक जिम्मेदार अधिकारियों और संस्था संचालकों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कोर्ट ने चिंता जताई कि बच्ची के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए, फिर भी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हुई है। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से स्पष्ट है कि बच्ची के शरीर पर कई चोटें थीं, लेकिन राज्य यह तक स्पष्ट नहीं कर पाया कि संस्था के पदाधिकारियों, प्रबंधन या कर्मियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई। सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष यह स्पष्ट उत्तर देने में असफल रहा कि मामले में कोई एफआईआर दर्ज हुई या नहीं। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य जरूरी सामग्री जुटाने में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई। कोर्ट ने समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि संस्था पदाधिकारियों और कार्यप्रणाली के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, यदि नहीं की गई तो क्यों नहीं, इस पर सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाए। यह जनहित याचिका पंचकूला निवासी राजीव कवात्रा ने दायर की है। याचिका में बताया गया कि साल 19 नवंबर, 2020 को चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी फिरोजपुर ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 92015 के तहत नाबालिग को राज्य संरक्षण में रखने का आदेश दिया था।

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