इकरा हसन बोलीं- गोली मार दो या मुझे जेल भेजो:सहारनपुर में पुलिस से बहस; कार्यकर्ताओं की रिहाई के लिए थाने में बैठीं

सहारनपुर में कैराना से सपा सांसद इकरा हसन मंगलवार को शाम 4 बजे से रात साढ़े 9 बजे तक सदर बाजार थाने में डटी रहीं। उनकी पुलिस अफसरों से तीखी बहस भी हुई। सांसद ने पुलिसवालों से कहा- मुझे गोली मार दो, फांसी पर चढ़ा दो, इससे ज्यादा क्या कर लोगे? अगर कोई आदमी अपनी पीड़ा लेकर आया है तो उसे सुना नहीं जाता है। अब यही तरीका बचा है कि या तो हमें भी जेल भेज दो या हमारे कार्यकर्ताओं को रिहा करो। हम जेल जाने को तैयार हैं। थाने में एसपी सिटी व्योम बिंदल ने सांसद इकरा हसन से करीब 10 मिनट तक बातचीत की। एसपी सिटी ने कहा, बिना जमानत कराए किसी को नहीं छोड़ेंगे। इस पर इकरा हसन ने कहा, हम जमानत नहीं कराएंगे, जैसे गिरफ्तार किया है, वैसे ही छोड़ना पड़ेगा। इसके बाद वह धरने पर बैठ गईं। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने गिरफ्तार पूर्व राज्यमंत्री और सपा नेता मांगेराम कश्यप समेत चार लोगों को बुधवार सुबह रिहा करने का भरोसा दिया। इस पर सांसद ने धरना खत्म कर दिया। इकरा हसन को पुलिस ने महिला थाने में बैठाए रखा था
इससे पहले मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे इकरा हसन मोनू कश्यप नाम के युवक की मां को लेकर डीआईजी अभिषेक सिंह के पास गई थीं। मोनू कश्यप की उसके 2 दोस्तों ने हत्या कर दी थी। एक युवती समेत तीन आरोपी जेल में हैं। मोनू की मां का आरोप है कि हत्याकांड की प्लानिंग में युवती के परिजन भी शामिल हैं, जिन्हें अब तक पकड़ा नहीं गया है। आरोप है कि डीआईजी ने पीड़िता की बातों को अनसुना कर दिया। इसके बाद इकरा हसन डीआईजी दफ्तर के बाहर आ गईं। तभी महिला इंस्पेक्टर फोर्स के साथ वहां पहुंचीं और थाने लेकर आ गईं। इकरा का आरोप है कि उन्हें करीब 10 मिनट तक महिला थाने में हिरासत में रखा गया। हालांकि सहारनपुर पुलिस का कहना है कि सांसद को हिरासत में नहीं लिया गया था। अब 4 तस्वीरें देखिए… बुजुर्ग महिला को लेकर डीआईजी के पास पहुंची थीं इकरा हसन इकरा हसन ने कहा, मैं जसाला गांव की एक पीड़ित बुजुर्ग महिला को लेकर डीआईजी अभिषेक सिंह के पास गई थी। महिला अपने बेटे की हत्या के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रही थी। सांसद का आरोप है कि डीआईजी ने मेरी बात सुनी, लेकिन पीड़िता की मांगों को मानने से मना कर दिया। इसके बाद वे अपने कार्यालय से उठकर चले गए। इस पर महिला भावुक हो गई और आहत होकर कार्यालय से बाहर निकल गई। इकरा हसन ने कहा कि डीआईजी ने महिला को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया। सांसद बोलीं- मैंने ट्रैफिक बाधित नहीं किया सांसद ने महिला के समर्थन में विरोध जताया। इकरा हसन कार्यालय से बाहर पार्किंग एरिया में आ गईं। उनका आरोप है कि इसके बाद सड़क जाम करने के आरोप में डीआईजी के निर्देश पर पुलिस को बुलाया गया और उन्हें हिरासत में ले लिया गया। सांसद के मुताबिक, ट्रैफिक बाधित करने की बात कहकर पुलिस उन्हें महिला थाने ले गई। उन्होंने दावा किया कि इस घटना का वीडियो भी उनके पास मौजूद है। कहीं कोई ट्रैफिक बाधित नहीं किया। इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उन्हें करीब 10 मिनट तक महिला थाने में बैठाकर रखा गया। सांसद ने इसे दबाव बनाने की कार्रवाई बताया और कहा कि प्रशासन को पीड़ितों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। थाने में क्या-क्या हुआ, सांसद ने क्या कहा… पूरी बात समझिए… पहले डीआईजी कैंपस का सीन… सवाल- क्या आप जो जसाला वाला मामला हुआ था, उसमें आई थीं? इकरा- जी हां। सवाल- अच्छा, तो क्या बातचीत हुई थी आपकी वहां? इकरा- हम जो विक्टिम हैं, उनके साथ आए थे। (तभी महिला पुलिसकर्मी वहां आती है और उन्हें अंदर चलने के लिए कहती है) इकरा महिला पुलिसकर्मी से कहती हैं- नहीं, आप हाथ मत लगाइए। महिला पुलिसकर्मी- नहीं, हाथ नहीं लगा रही, मैं इधर से चलने के लिए कह रही हूं। इकरा- हाथ मत लगाइए। महिला पुलिसकर्मी- हाथ नहीं लगाया। इकरा- अभी लगाया आपने। महिला पुलिसकर्मी- अरे, मैं रास्ता बता रही हूं। इकरा- अभी लगाया आपने। महिला पुलिसकर्मी- आप उधर जा रही हैं। इकरा- अभी लगाया आपने। (तभी पत्रकार दोबारा सवाल पूछता है) सवाल: तो क्या कहना चाहेंगी मैडम, क्या तानाशाही हो रही है? इकरा- देख ही रहे हैं आप। अगर एक सांसद, एक पीड़ित परिवार के साथ डीआईजी से मिले और डीआईजी पीड़ित परिवार को उनके सामने कहे कि ‘जाइए, जो हमें करना है हम करेंगे’, तो यह तानाशाही है। और फिर हमें यहां महिला थाने लाया गया। (थाने के अंदर जाते हुए) इकरा- चलो न अब आगे-आगे। मुझे हाथ क्यों लगा रही हैं? अब महिला थाने का सीन… (इकरा हसन कमरे में कुर्सी पर बैठ जाती हैं और पुलिसकर्मी उन्हें पानी ऑफर करते हैं) महिला पुलिसकर्मी- पानी… इकरा- नहीं, हमें नहीं…। हमें आपका पानी नहीं पीना है। ठीक है? नहीं, आपका तो बिल्कुल भी नहीं पीना है। महिला पुलिसकर्मी- आप लोगों को कोई दिक्कत… इकरा- आप लोग पीड़ित की पीड़ा नहीं समझ रहे। हां, एक मां है, जिसका बच्चा मर गया, उसे इस तरीके से… और आप हमें पानी पिलाएंगे? हमें नहीं पीना आपका पानी, अपने पास रखिए। महिला पुलिसकर्मी- वो जो होगा, वो होता रहेगा। उससे कोई दिक्कत नहीं। इकरा- हां, ठीक है। दिक्कत तो उसे है ना मां को, आपको क्यों होगी? इकरा- बताइए किसलिए लाया गया? हमारे पास और भी काम हैं। सिर्फ दफ्तर में बैठने का काम तो हमारा है नहीं और भी काम हैं हमारे पास। पुलिस अधिकारी- कोई नहीं, आप 10 मिनट ठहरिए, आज जैसा भी होगा, बता देंगे। आखिर में पत्रकारों से बातचीत… सवाल- सांसदजी, एक बार जरा विस्तार से बताएंगी कि क्या कुछ हुआ है? इकरा- भैया, हम गए थे डीआईजी साहब के पास। जसाला में जो कार्रवाई हुई है, जो मां है, वह लगातार यह कह रही हैं कि उनको इंसाफ नहीं मिला है। इंसाफ की गुहार को लेकर हम डीआईजी साहब के पास आए थे। मोनू कश्यप की माताजी ने अपना पक्ष रखा। डीआईजी साहब ने मां की बात को सुनने से मना कर दिया। उन्होंने उस गरीब, मजलूम, बूढ़ी माता को कहा कि ‘आप जाइए यहां से’। मैं उनके साथ गई थी, मुझसे वो बर्दाश्त नहीं हुआ और फिर डीआईजी साहब वहां से खुद उठकर चले गए। तो हम बाहर आए, हम दोबारा एक एप्लिकेशन बनाने की योजना बना रहे थे, बात कर रहे थे तभी हम पर पुलिस वाले चढ़ गए कि ‘यहां पर हंगामा मत कीजिए’। हम पार्किंग में थे, हम सड़क पर नहीं थे। रिकॉर्डिंग हमारे पास भी है। सड़क लगातार चलती रही है। अब सड़क के, ट्रैफिक की बुनियाद पे यह मुझे यहां पर महिला थाने में लेकर आए हैं। तो यह सरासर तानाशाही है और सिर्फ यह जो भाजपा के लोग हैं, उनके लिए पुलिस वाले काम कर रहे हैं साफ तौर से। सवाल- क्या लगता है आपको, ट्रैफिक की बात को लेकर आपको लेकर आए हैं या कुछ और? इकरा- आप लोग भी वहां पर थे, ट्रैफिक लगातार चल रहा था। हमारे पास भी वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है। ट्रैफिक में कोई खलल नहीं आई थी, हम पार्किंग की स्पेस में खड़े थे और इन्हीं लोगों के द्वारा कहा गया था कि दोबारा एक एप्लिकेशन दे दो, उसी की बात वहां कर रहे थे। तो इन्होंने पूरे जिले की महिला पुलिस वहां बुला ली, हमें डराने के लिए, हम पर दबाव बनाने के लिए। लेकिन हम डरेंगे नहीं, इनको जो करना है यह वो कर सकते हैं। यह मेरे लोग हैं, जब यह पीड़ा में हैं तो मैं पीड़ा में हूं और इनके साथ मैं खड़ी रहूंगी। सवाल- अभी आपको कहां रखा है इन्होंने? इकरा- अभी महिला थाना सहारनपुर में लेकर आए हैं। अब वो मामला जानिए, जिसकी पैरवी में इकरा हसन गई थीं… शामली में कांधला थाना क्षेत्र के गांव जसाला के मोनू कश्यप (25) 21 अप्रैल की रात पंजोखरा स्थित रेलवे लाइन के पास घायल मिले थे। पुलिस ने मोनू को सीएचसी पहुंचाया, जहां से डॉक्टरों ने मेरठ रेफर कर दिया। इलाज के दौरान मोनू की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिवार ने हत्या की आशंका जताई थी। मोनू की मां ने उसके दोस्तों सचिन और शुभम पर हत्या का आरोप लगाया। पुलिस ने मोनू की कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन खंगाली। जांच में पता चला कि घटना के समय सचिन और शुभम मोनू के साथ मौजूद थे। पुलिस ने 25 अप्रैल को सचिन और शुभम को गिरफ्तार किया। वारदात के बाद आरोपी कांधला क्षेत्र के अलग-अलग नलकूपों पर छिपे हुए थे। गिरफ्तारी के समय दोनों दिल्ली भागने की फिराक में थे। दोनों आरोपी मजदूरी और बिजली फिटिंग का काम करते हैं। प्रेमिका से बात कराने को लेकर विवाद हुआ था
पूछताछ में सामने आया कि सचिन और शुभम, मोनू के करीबी दोस्त थे। मोनू की दो गर्लफ्रेंड थी। आरोपियों की इच्छा थी कि वह उनमें से एक युवती से उनकी बात कराए, लेकिन मोनू लगातार इससे इनकार करता था। इसी बात को लेकर तीनों के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने इसी रंजिश में हत्या की साजिश बनाई। 21 अप्रैल को सचिन और शुभम ने मोनू को फोन कर रेलवे ट्रैक के पास पार्टी करने के बहाने बुलाया। वहां तीनों ने बैठकर शराब पी। शराब पीने के दौरान दोनों आरोपियों ने फिर युवती से बात कराने की मांग की। मोनू ने जब दोबारा मना किया तो विवाद बढ़ गया। इसके बाद दोनों ने मिलकर उसकी पिटाई शुरू कर दी। जैसे ही ट्रेन नजदीक पहुंची, दोनों ने मोनू को ट्रेन के आगे धक्का दे दिया। हादसे में मोनू गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। एसपी सिटी व्योम बिंदल ने कहा, सूचना मिली थी कि डीआईजी कार्यालय के बाहर कुछ लोगों के द्वारा सड़क को रोककर जाम लगाया गया है। पुलिस तत्परता से वहां पहुंची। वहां पर रोड को सुचारू रूप से चलाया गया। जो लोग इसमें शामिल थे, उनके विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है। 3 ग्राफिक से जानिए इकरा हसन कौन हैं? ————————— यह खबर भी पढ़ें – मायावती ने पुलिस भेजी, मुलायम के साथ उड़ गया विजय:20 साल तक सीटें जिताता रहा; भदोही का ‘बाहुबली’ कैसे जेल पहुंचा भदोही की एमपी/एमएलए कोर्ट ने 15 मई को बाहुबली विजय मिश्रा के पूरे परिवार को सजा सुना दी। पत्नी रामकली और बहू रूपा मिश्रा को ज्ञानपुर जेल भेजा गया। विजय मिश्रा आगरा और उसका बेटा विष्णु लखीमपुर जेल में पहले से बंद है। पढ़ें पूरी खबर…

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