करनाल जिले में दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे-44 स्थित बसताड़ा टोल प्लाजा पर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली के मुण्डका-बक्कर वाला टोल प्लाजा पर मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) सिस्टम शुरू होने के बाद अब यहां भी इसे लागू करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार 15 मई से इसका ट्रायल शुरू होने की संभावना है। ट्रायल सफल रहने पर 1 जून से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। जिससे वाहन बिना रुके अपनी गति से गुजर सकेंगे। पूरी तरह तैयार तकनीकी ढांचा बसताड़ा टोल प्लाजा पर एमएलएफएफ सिस्टम लागू करने के लिए सभी तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यहां ओवरहेड गैंट्री स्थापित की गई है और आधुनिक कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। इन कंट्रोल रूम से स्टाफ और सिक्योरिटी कर्मी पूरे सिस्टम की निगरानी करेंगे। जैसे ही यह सिस्टम शुरू होगा, पारंपरिक टोल बूथ और बैरियर पूरी तरह हटा दिए जाएंगे। कैसे काम करेगा एमएलएफएफ सिस्टम इस सिस्टम में आरएफआईडी रीडर और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट पहचान करने वाले कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे लगभग 50 मीटर की दूरी से ही वाहन की नंबर प्लेट को पढ़ लेते हैं। जैसे ही कोई वाहन गैंट्री के नीचे से गुजरता है, आरएफआईडी रीडर उसके फास्टैग को स्कैन करता है और यदि वह वैध है, तो टोल राशि अपने आप कट जाती है। साथ ही कैमरे नंबर प्लेट का रिकॉर्ड भी रखते हैं, ताकि बिना फास्टैग वाले वाहनों की पहचान की जा सके। पूरा डेटा सेंट्रल टोल सॉफ्टवेयर को भेजा जाता है, जहां भुगतान प्रक्रिया पूरी होती है। टोल नहीं कटने पर भेजा जाएगा बिल अगर किसी कारण से टोल राशि नहीं कटती है, तो वाहन मालिक को एसएमएस या मोबाइल ऐप के माध्यम से सूचना भेजी जाएगी। नए नियमों के तहत ऐसे मामलों में पेनल्टी भी लग सकती है। इससे टोल चोरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। हरियाणा का पहला और देश का तीसरा ऐसा टोल बसताड़ा टोल प्लाजा इस सिस्टम को लागू करने वाला हरियाणा का पहला और देश का तीसरा टोल प्लाजा होगा। इससे पहले गुजरात के एनएच-48 पर भरूच-सूरत खंड के चोरयासी टोल प्लाजा पर यह सिस्टम शुरू किया जा चुका है। वहीं 11 मई को दिल्ली के मुण्डका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस बैरियर-लेस सिस्टम का उद्घाटन किया है। कर्मचारियों में बढ़ी नौकरी को लेकर चिंता एमएलएफएफ सिस्टम के ट्रायल की जानकारी सामने आते ही टोल प्लाजा पर काम करने वाले कर्मचारियों में चिंता बढ़ गई है। टोल बूथों पर काम करने वाली लड़कियां एकत्रित हुईं और उन्होंने सरकार से उनके लिए वैकल्पिक रोजगार की मांग की। उनका कहना है कि सिस्टम लागू होने के बाद 200 से 300 कर्मचारियों की नौकरी खत्म हो सकती है, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। टोल प्रबंधन का पक्ष भी आया सामने टोल प्रबंधक मुकेश कुमार की माने तो अभी केवल 15 मई से ट्रायल शुरू होने की संभावना है। इसके बाद आगे की स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि टोल कंपनी का टेंडर 15 अगस्त तक है, इसलिए फिलहाल किसी कर्मचारी को हटाने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार की बड़ी योजना का हिस्सा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिसंबर 2025 में संसद में बताया था कि एमएलएफएफ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हाईवे मैनेजमेंट सिस्टम को 2026 के अंत तक पूरे देश में लागू करने की योजना है। इसके लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी और वाहन 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से गुजर सकेंगे। जनवरी 2026 में नियमों में किया गया बदलाव बैरियर-लेस टोलिंग को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने जनवरी 2026 में सेंट्रल मोटर व्हीकल्स नियमों में संशोधन किया। नए नियमों के अनुसार यदि किसी वाहन पर टोल बकाया है, तो उसकी ओनरशिप ट्रांसफर, फिटनेस सर्टिफिकेट का नवीनीकरण, इंटर-स्टेट ट्रांसफर और कमर्शियल परमिट जैसी सेवाएं रोक दी जाएंगी। इसके साथ ही “अनपेड यूजर फी” की नई परिभाषा भी जोड़ी गई है। लोगों के मन में उठ रहे सवाल नए सिस्टम को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब टोल पर रुकना पड़ेगा। इसका जवाब साफ है-नहीं। इस सिस्टम में न बैरियर होंगे और न ही बूथ, टोल अपने आप कट जाएगा।
वाहनों की गति को लेकर भी कोई बड़ी बाधा नहीं होगी। सरकार ने अधिकतम गति 90 किलोमीटर प्रति घंटा तय की है, लेकिन सिस्टम हर गति पर नंबर प्लेट को पढ़ सकता है। सूत्रों के अनुसार लोकल वाहन चालकों के लिए 20 किलोमीटर के दायरे में 350 रुपए मासिक पास की सुविधा भी दी जाएगी। नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई यदि किसी वाहन पर नंबर प्लेट नहीं है या उसे जानबूझकर छुपाया गया है, तो सीधे चालान किया जाएगा। जिन वाहनों में फास्टैग नहीं होगा, उनसे नंबर प्लेट के आधार पर टोल वसूला जाएगा। ऑनलाइन भुगतान करने पर सवा गुना और नकद भुगतान करने पर दोगुना टोल देना पड़ सकता है। मैनपावर होगी कम, ऑटोमेटिक सिस्टम एमएलएफएफ सिस्टम लागू होने के बाद टोल प्लाजा पर कर्मचारियों की संख्या कम हो जाएगी। केवल कुछ सुरक्षा कर्मी और इंजीनियर ही सिस्टम की निगरानी करेंगे। इमरजेंसी और सरकारी वाहनों के लिए अलग से कोई लेन नहीं होगी, क्योंकि ऐसे वाहनों के फास्टैग पहले से सिस्टम में दर्ज होते हैं। ट्रायल के बाद लागू होगा अंतिम निर्णय फिलहाल बसताड़ा टोल प्लाजा पर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अब 15 मई से ट्रायल शुरू होने का इंतजार है। ट्रायल सफल रहने पर 1 जून से इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर टोल कर्मचारियों में अपने भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है और वे सरकार से राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं।