करनाल में इलाज के दौरान बुजुर्ग डॉक्टर की मौत:घर से रेस्क्यू कर अस्पताल में कराया था भर्ती, ऑस्ट्रेलिया में पत्नी और बेटा

करनाल जिले में अकेले रह रहे 82 वर्षीय बुजुर्ग डॉक्टर की इलाज के दौरान मौत हो गई। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और घर पर असहाय हालत में मिले थे। हालत बिगड़ने पर सामाजिक संस्था की टीम ने उन्हें रेस्क्यू कर अस्पताल में भर्ती कराया था। देर रात तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घर पर बीमार हालत में मिले थे डॉक्टर
मृतक की पहचान 82 वर्षीय डा. हरिकिशन के रूप में हुई है। कुछ दिन पहले अपना आशियाना आश्रम की टीम ने उन्हें उनके घर से रेस्क्यू किया था। उस समय वे बीमार हालत में थे और अकेले रह रहे थे। उनके बेटे पिछले 10-12 साल से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं, जबकि उनकी पत्नी भी 3-4 साल से ऑस्ट्रेलिया में रह रही हैं। अपना आशियाना टीम के इंचार्ज राजकुमार अरोड़ा ने बताया कि जब टीम मौके पर पहुंची तो डा. हरिकिशन की हालत बेहद खराब थी। उनके शरीर पर जख्म भी थे। संस्था की ओर से उनकी देखभाल शुरू की गई। बुधवार तक उनकी रिपोर्ट सामान्य थी। वीरवार सुबह उनका बीपी चेक किया गया तो थोड़ा डाउन मिला। डॉक्टर को बुलाया गया। डॉक्टर ने उन्हें कॉफी पिलाने की सलाह दी। कॉफी पिलाने के बाद उन्हें पेशाब और शौच हुआ। डायपर बदला गया, लेकिन इसके बाद अचानक उनकी हालत फिर बिगड़ गई। रात को मेडिकल कॉलेज में कराया भर्ती हालत ज्यादा खराब होने पर रात को उन्हें कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। राजकुमार अरोड़ा ने बताया कि मृतक की पत्नी से ऑस्ट्रेलिया में फोन पर बात कर दी गई है। परिजनों के निर्देश के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यदि वे कहेंगे तो पुलिस के माध्यम से पोस्टमार्टम कराया जाएगा, अन्यथा नियमानुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा। 29 साल से सेवा कर रहे थे बिट्टू डा. हरिकिशन के साथ 29 साल तक सेवा कार्य करने वाले बिट्टू ने बताया कि वे डॉक्टर साहब को अपना गुरु मानते थे। वे नियमित रूप से उनकी सेवा के लिए जाते थे। बिट्टू के अनुसार 15 दिन पहले तक डॉक्टर साहब ठीक थे और गुरुद्वारे भी जाते थे। इसी दौरान वे गिर गए थे और चोट लग गई थी। चोट के बाद से वे बैडरेस्ट पर थे। तीन-चार दिन पहले उनकी हालत ज्यादा बिगड़ गई थी। बिट्टू ने बताया कि हालत खराब होने पर उन्हें रेस्क्यू किया गया और अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। आश्रम में भी मिलने नहीं दिया जाता था अपना आशियाना के सदस्य अंकुर ने बताया कि आश्रम में रहने के दौरान वे अपने मिलने वालों को बहुत याद करते थे। लेकिन उनकी हालत को देखते हुए किसी को मिलने की अनुमति नहीं दी जाती थी, क्योंकि संक्रमण और कमजोरी का खतरा था। बुजुर्गों को अकेला न छोड़ें राजकुमार अरोड़ा ने अपील की कि अगर कोई व्यक्ति अपने माता-पिता की देखभाल नहीं कर पा रहा है, तो उन्हें संस्था को सौंप सकता है। संस्था उनकी देखभाल के लिए केयरटेकर भी उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में बुजुर्ग माता-पिता को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

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