वेब सीरीज लुखे में महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के मामले में सेशन जज एच.एस. ग्रेवाल की अदालत ने कहा कि वीडियो क्लिप में इस्तेमाल की गई भाषा बेहद अशोभनीय, अपमानजनक और पूरे महिला वर्ग का अपमान करने वाली है। मामला सेक्टर-36 थाना में दर्ज एफआईआर नंबर-72 से जुड़ा है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79, 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 67-A के तहत केस दर्ज किया गया है। इस मामले में कोर्ट ने एक दिन पहले पंजाबी एक्टर योगराज सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप से उठा विवाद एफआईआर के अनुसार, 8 मई 2026 को रिलीज हुई वेब सीरीज लुखे की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। शिकायतकर्ता एडवोकेट उज्जवल भसीन ने आरोप लगाया कि वीडियो में महिलाओं के लिए बेहद अपमानजनक और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे पूरे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। कोर्ट ने भी अपने आदेश में कहा कि वीडियो क्लिप में इस्तेमाल किए गए शब्द इतने आपत्तिजनक हैं कि परिवार के साथ बैठकर उन्हें सुनना मुश्किल है। स्क्रिप्ट के मुताबिक निभाया किरदार योगराज की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में दलील दी कि वह पूर्व भारतीय क्रिकेटर, पंजाबी अभिनेता और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति हैं। उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने कहा कि वेब सीरीज की स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी और उन्होंने केवल अभिनेता के तौर पर अपना किरदार निभाया। उनका किसी को ठेस पहुंचाने या महिलाओं का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। वकीलों ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। साथ ही कहा गया कि मामले में उनसे कोई बरामदगी नहीं होनी है और वह जांच में सहयोग करने को तैयार हैं। अभिव्यक्ति की आजादी की भी सीमा होती है अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि आपत्तिजनक शब्द किसने लिखे और समाज को इस हद तक आहत करने की अनुमति किसने दी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि महिलाओं के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा “बेहद शर्मनाक, अपमानजनक और अश्लील” है। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार महिलाओं की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने की सीमा तक नहीं जा सकता। पूरी साजिश का खुलासा जरूरी सेशन जज ने कहा कि मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है और यह पता लगाया जाना बाकी है कि वेब सीरीज के कंटेंट को तैयार करने और रिलीज करने में कौन-कौन लोग शामिल थे। कोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी को गहराई से जांच करने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि कानून निर्दोष लोगों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं, न कि गलत काम करने वालों को बचाने के लिए। शिकायत में क्या, 4 पॉइंट में पढ़िए… अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया: जिला बार एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष एवं एडवोकेट उज्ज्वल भसीन और जतिन वर्मा की तरफ से यह शिकायत 12 मई को एसएसपी को भेजी गई है। उन्होंने दलील दी है कि सोशल मीडिया पर 17 सेकेंड का एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें महिलाओं के खिलाफ शर्मनाक, अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कहा गया है “जनानी दिन में चूल्हे…” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। जो चीज बोली जा रही है वह बकायदा स्क्रीन में लिखा आता है। महिलाओं की गरिमा पर सीधा हमला: पत्र में दूसरा तर्क है यह न केवल अपमानजनक है, बल्कि हमारी माताओं, बहनों, बेटियों और पत्नियों सहित हर महिला की गरिमा, शालीनता और सम्मान पर सीधा हमला है। योगराज सिंह जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रभावशाली व्यक्ति के मुंह से ऐसी भाषा का प्रयोग किया गया है। योगराज सिंह के खिलाफ FIR की मांग: शिकायत में लिखा गया कि क्या ऐसे बयान वास्तव में सिख सिद्धांतों से जुड़ी समानता और सम्मान की शिक्षाओं को दर्शाते हैं? ऐसी भाषा उन नैतिक मूल्यों के खिलाफ है, जो एक “गुरु सिख” से अपेक्षित होते हैं। महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए योगराज सिंह और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। सेलिब्रिटी होने के बावजूद गैरजिम्मेदाराना भाषा: शिकायत के आखिर में उन्होंने दलील दी है कि एक जानी-मानी हस्ती होने के नाते उनके ऐसे बयान समाज में महिलाओं के प्रति नफरत की विचारधारा को सामान्य बनाने और सार्वजनिक भावनाओं को आहत करने का काम करते हैं।