केंद्र सरकार ने संसद में महिला आरक्षण और लोकसभा परिसीमन बिल पेश किए। इससे लोकसभा की सीटें बढ़ेंगी और महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा। देश में लोकसभा सीटों की संख्या 545 से बढ़ाकर 850 किया जा रहा है। जिसमें से 33 फीसदी यानि 273 से 283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। इन बिलों से पंजाब में लोकसभा की करीब 6-7 सीटें बढ़ेंगी और इतनी ही सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी। हालांकि महिलाओं के लिए रिजर्व सीटों की हर साल रोटेशन भी होगी। पंजाब में इन बिलों का क्या असर पड़ेगा, महिला आरक्षण का रोटेशन सिस्टम क्या है, क्या यह पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव में भी लागू होगा, इन सब सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सवाल: महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा पूरा मामला क्या है?
जवाब: केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान था। लेकिन ये लागू नहीं हो सका। ऐसा इसलिए क्योंकि उस कानून में शर्त थी कि महिला आरक्षण नई जनगणना और फिर परिसीमन के बाद ही लागू होगा। नई जनगणना अभी शुरू ही हुई है। डेटा आने में करीब 2 साल लग सकते हैं। उसके बाद परिसीमन होगा। ऐसे में महिला आरक्षण 2034 चुनाव तक टल सकता था। मोदी सरकार इसे 2029 में ही लागू करना चाहती है। इसीलिए विशेष सत्र में 3 नए विधेयक लाई है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026। केंद्र सरकार इन विधेयकों के जरिए 3 बड़े काम करना चाहती है… पहला- लोकसभा की अधिकतम सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करना (815 राज्यों के लिए और 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए)।
दूसरा- अभी तक सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर तय होती थीं, इस संवैधानिक रोक को हटाकर एक लचीला फॉर्मूला लाना, जिससे संसद में साधारण बहुमत से तय किया जा सके कि किस जनगणना का इस्तेमाल होगा।
तीसरा- एक परिसीमन आयोग बनाना जो 2011 की जनगणना के आधार पर चुनाव क्षेत्रों की नई सीमाएं खींचे और सीटें फिर से बांटे। सवाल: पंजाब में लोकसभा सीटों की स्थिति पहले क्या थी और अब क्या है?
जवाब: साल 1952 से 1966 तक पंजाब बड़ा राज्य था, इसलिए 22 लोकसभा सीटें होती थीं। इसके बाद 1966 में पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट के तहत पंजाब का विभाजन कर हरियाणा अलग राज्य बनाया गया और चंडीगढ़ भी अलग हो गया। इसके बाद पंजाब में लोकसभा की सीटें 22 से घटकर 13 रह गईं। इसके बाद 1976 में भारतीय संविधान का 42वां संशोधन अधिनियम के तहत आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण रोक दिया गया और राज्यों की लोकसभा सीटें फ्रीज कर दी गईं। 2002 के परिसीमन में पंजाब की सीटों की संख्या न बढ़ीं या न घटीं। सिर्फ आरक्षण व सीटों के नाम बदले। सीमाएं बदलीं, पुरानी सीटें रोपड़, तरनतारन, फिल्लौर खत्म हुई और इनकी जगह नई सीटें बनीं। नई बनी तीनों सीटों का नाम आनंदपुर साहिब, खडूर साहिब, और फतेहगढ़ साहिब रखा गया जो कि सिख इतिहास से जुड़े हैं। फतेहगढ़ साहिब को अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित रखा गया जैसे पहले फिल्लौर थी। आनंदपुर साहिब और खडूर साहिब सामान्य सीटें बनीं। 1976 में सीटें फ्रीज किए जाने के बाद से पंजाब में 13 ही लोकसभा सीटें हैं। सवाल: केंद्र के परिसीमन बिल से पंजाब में लोकसभा सीटों पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: केंद्र के बिल के मुताबिक नए बिल के लागू होने के बाद सीटों की संख्या अभी वालों कों के मुकाबले डेढ़ गुना हो जाएगी। इस लिहाज से पंजाब में अभी 13 सीटें हैं तो आधी और बढ़ जाएंगी। जिससे 6 या 7 सीटों की बढ़ोतरी हो सकती है। इस लिहाज से पंजाब में 2029 के लोकसभा चुनाव में 19 से 20 सीटें हो सकती हैं। सवाल: महिला आरक्षण लागू होगा तो उनके खाते कितनी सीटें आएंगी?
जवाब: केंद्र ने महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का बिल पेश किया है। इस हिसाब से देखें तो 13 से बढ़कर सीटें 19-20 होंगी तो उसमें से 33% यानी 6 से 7 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी। सवाल: क्या 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में परिसीमन और महिला आरक्षण लागू होगा?
जवाब: केंद्र सरकार के बिल के मुताबिक लोकसभा सीटों का परिसीमन होगा। अगर लोकसभा सीटें बढ़ेंगी तो उसी अनुपात में विधानसभा की सीटें भी बढ़ेंगी। पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं और एक साल में परिसीमन होना संभव नहीं है। वहीं परिसीमन जनगणना के बाद 2029 लोकसभा चुनाव के समय होना है, ऐसे में पंजाब चुनाव के वक्त सीटें नहीं बढ़ेंगी। 117 सीटों पर ही चुनाव होगा। महिला आरक्षण भी इस चुनाव में लागू नहीं होगा। हां, 2032 के विधानसभा चुनाव में जरूर पंजाब में सीटें बढ़ने के साथ महिला आरक्षण भी लागू होगा। सवाल: पंजाब में अब तक कितनी महिला सांसद बनीं?
जवाब: पंजाब में 1951 से लेकर अब तक हुए लोकसभा चुनावों की बात करें तो आम चुनावों में 13 महिलाएं सांसद बनी हैं। महिला आरक्षण न होने के बावजूद 2009 में पंजाब से सबसे ज्यादा 4 महिलाएं सांसद बनीं। वहीं शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल अब तक की सबसे ज्यादा 4 बार सांसद बनी हैं। पूर्व CM कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी महारानी परनीत कौर भी 3 बार सांसद बनीं। सवाल: 2024 में कितनी महिलाओं को टिकट दी गई, उनमें से कितनी जीतीं?
जवाब: 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में राजनीतिक दलों ने 65 उम्मीदवार मैदान में उतारे, जिसमें से सिर्फ 6 महिलाओं को टिकट दिया। यह कुल उम्मीदवारों का महज 9.2% था। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने लोकसभा चुनाव के लिए किसी भी महिला उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। भाजपा ने सबसे ज्यादा 3 महिलाओं को टिकट दिया है। कांग्रेस ने 2 और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने सिर्फ एक महिला को टिकट दिया है। इनमें से अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ही इकलौती महिला उम्मीदवार रहीं, जिन्होंने चुनाव जीता। सवाल: क्या हर 5 साल में सीटें बदलेंगी, महिला आरक्षण का रोटेशन सिस्टम का राजनीतिक पेंच क्या है?
जवाब : महिला आरक्षण में सबसे बड़ा राजनीतिक पेंच ‘रोटेशन सिस्टम’ का है। रिजर्व सीटें परमानेंट नहीं रहेंगी, बल्कि हर 5 साल बाद बदलती रहेंगी। इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं कि परिसीमन के बाद पंजाब में लोकसभा सीटों की संख्या 19-20 हो सकती है। ऐसे में लोकसभा चुनाव-2029 में 33% रिजर्वेशन के अनुसार 6-7 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी। जो सीटें रिजर्व होंगी, वो केवल एक कार्यकाल के लिए रहेंगी। अगले लोकसभा चुनाव यानी 2034 में फिर से लॉटरी या महिला वोटर्स की संख्या के आधार पर नई 6-7 सीटें रिजर्व होंगी। सवाल: 2029 में कौन-कौन सी महिला नेताओं के चुनाव लड़ने के चांसेज हैं?
सवाल: मौजूदा राजनीतिक हालात देखें तो सांसद चुनीं गईं महिलाओं में से हरसिमरत कौर बादल वर्तमान में बठिंडा से सांसद हैं। हरसिमरत कौर बादल की उम्र 62 साल के करीब है और 2029 तक वो 65 साल की हो जाएंगी। ऐसे में उनका चुनाव लड़ना तय है। वहीं, 3 बार की सांसद परनीत कौर 82 साल की हो चुकी हैं। 2029 तक उनकी उम्र 85 साल हो जाएगी। ऐसे में परनीत कौर का खुद चुनाव लड़ना मुश्किल माना जा रहा है। उनकी बेटी जयइंदर कौर भाजपा की प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं। माना जा रहा है कि परनीत कौर की जगह उनकी बेटी जयइंद्र कौर अगले लोकसभा चुनाव में पटियाला से दावेदारी पेश करेंगी।