‘क्लीन एंड ग्रीन’ शिमला कूड़े के ढेर में तब्दील:41 कर्मचारियों की टर्मिनेशन से टकराव बढ़ा; राजभवन मार्च-जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला इन दिनों गंभीर सफाई संकट से जूझ रही है। ‘क्लीन एंड ग्रीन शिमला’ की पहचान रखने वाले शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था ठप है। पर्यटन व सार्वजनिक स्थलों पर भी कूड़ा बिखरा है, क्योंकि शिमला के 800 से ज्यादा सफाई कर्मचारी सात दिन से हड़ताल पर है। शिमला नगर निगम और कर्मचारियों के बीच तनातनी से अब टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। एक ओर कर्मचारी 10 प्रतिशत मानदेय बढ़ोतरी बहाल करने की मांग पर अड़े हैं, दूसरी ओर डीसी शिमला ने इसेंशियल सर्विस मेंटिनेंस एक्ट (ESMA) लगा रखा है। इसके बाद नगर निगम कमिश्नर ने बीते कल ही 41 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं। आखिर हड़ताल क्यों शुरू हुई? शिमला शहर में सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारी सालाना 10 प्रतिशत मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि यह बढ़ोतरी रोक दी गई, जिसके विरोध में उन्होंने हड़ताल शुरू कर दी। सफाई कर्मचारी सीटू (CITU) के बैनर तले आंदोलन कर रहे हैं। मेयर के साथ बैठक हुई, फिर भी क्यों नहीं खत्म हुई हड़ताल? पूरे शिमला शहर में चौतरफा गंदगी फैली है और नगर निगम इसे लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा। सीटू नेता विजेंद्र मेहरा ने कहा कि बीते मंगलवार को मेयर सुरेंद्र चौहान के साथ उनकी मीटिंग हुई। उन्होंने लिखित में मांगे पूरी करने का भरोसा दिया, बुधवार को सफाई कर्मचारी लिखित में आश्वासन का इंतजार करते रहे। लिखित में आश्वासन तो नहीं मिला, लेकिन टर्मिनेट जरूर कर दिया गया। एस्मा क्या है? एस्मा एक ऐसा कानून है, जिसके तहत जरूरी सेवाओं में हड़ताल या कामकाज बाधित करने पर प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। सफाई, स्वास्थ्य, परिवहन जैसी सेवाओं को आवश्यक सेवाओं में माना जाता है। शहर पर क्या असर पड़ा? करीब 32 किलोमीटर के दायरे में फैले शिमला शहर में सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। सात दिनों से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन बंद है। बाजारों, रिहायशी इलाकों और पर्यटक स्थलों पर कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं। गंदगी के कारण आवारा कुत्तों और बंदरों की समस्या भी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ शिमला घूमने पहुंचे पर्यटक भी परेशान हैं। पर्यटन सीजन के बीच फैली गंदगी शहर की छवि पर भी असर डाल रही है। स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि देशभर से आने वाले पर्यटकों के सामने शिमला की नकारात्मक तस्वीर जा रही है। आंदोलन और उग्र होने की चेतावनी सीटू नेता विजेंद्र मेहरा ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों पर दमन हुआ या और बर्खास्तगी की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में राजभवन और सचिवालय मार्च, जेल भरो आंदोलन, रास्ता रोको और चक्का जाम होगा। मेहरा ने नगर निगम प्रशासन पर ‘तानाशाही रवैया’ अपनाने का आरोप लगाया है। किन संगठनों का मिला समर्थन? सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को कई मजदूर, कर्मचारी और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला है। इनमें माकपा, होटल यूनियन, रेहड़ी-फड़ी यूनियन, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील कर्मचारी, किसान सभा, एसएफआई, डीवाईएफआई, पेंशनर एसोसिएशन समेत कई संगठन शामिल हैं। अब आगे क्या? फिलहाल नगर निगम और कर्मचारियों के बीच गतिरोध बना हुआ है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो राजधानी में सफाई संकट और गहरा सकता है। पर्यटन सीजन के दौरान यह विवाद प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। दूसरी ओर, कर्मचारियों ने भी साफ कर दिया है कि लिखित आश्वासन और मांगें माने बिना वे पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

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