चंडीगढ़ में इंटर स्कूल खेलों के नियम बदलेंगे:दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों को एक साल इंतजार, बिना ग्रेडेशन वाली गेम्स होंगी बाहर

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग इंटर स्कूल खेलों में हो रही अनियमितताओं को रोकने के लिए नई स्पोर्ट्स पॉलिसी लागू करने जा रहा है। नई नीति के तहत अब दूसरे राज्यों से चंडीगढ़ में दाखिला लेने वाले छात्र और खिलाड़ियों को इंटर स्कूल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए कम से कम एक साल इंतजार करना होगा। विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई कोच और खेल संघ दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों का चंडीगढ़ के स्कूलों में दाखिला कराकर उन्हें तुरंत इंटर स्कूल प्रतियोगिताओं में उतार देते थे। खासकर पंजाब और हरियाणा के खिलाड़ी इंटर स्कूल गेम्स में भाग लेने के लिए चंडीगढ़ में एडमिशन लेते थे और एक साल बाद वापस अपने राज्यों में लौट जाते थे। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस तरह की अवसरवादी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए यह फैसला जरूरी था। सूत्रों के मुताबिक इस नियम को नई स्पोर्ट्स पॉलिसी में शामिल किया गया है और विभागीय बैठकों में इस पर चर्चा भी हो चुकी है। नई स्पोर्ट्स पॉलिसी जुलाई के दूसरे सप्ताह तक लागू होने की संभावना है, ताकि 2026-27 सत्र से खिलाड़ियों को इसका लाभ मिल सके। जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड पर फोकस इंटर स्कूल खेलों में उम्र संबंधी धांधली रोकने के लिए शिक्षा विभाग अब जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड की जांच को अनिवार्य बनाने जा रहा है। विभाग का मानना है कि कई मामलों में खिलाड़ियों की उम्र को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, इसलिए दस्तावेजों की सख्त जांच की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत 9वीं कक्षा के छात्र को इंटर स्कूल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए 31 मई से पहले दाखिला लेना होगा, जबकि 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों के लिए एडमिशन की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की जाएगी। बिना ग्रेडेशन वाली गेम्स होंगी बाहर नई स्पोर्ट्स पॉलिसी के तहत शिक्षा विभाग अब सिर्फ उन्हीं खेलों को इंटर स्कूल प्रतियोगिताओं में शामिल करेगा, जिनमें खेल विभाग ग्रेडेशन और स्कॉलरशिप देता है। वर्तमान में खेल विभाग 42 खेलों को ग्रेडेशन और स्कॉलरशिप प्रक्रिया में शामिल कर चुका है। ऐसे में नए सत्र से इंटर स्कूल प्रतियोगिताओं में केवल इन्हीं 42 खेलों को जगह मिलेगी। सूत्रों के अनुसार बिना ग्रेडेशन वाली कई गेम्स को इंटर स्कूल प्रतियोगिताओं से बाहर किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे खिलाड़ियों को भविष्य में स्कॉलरशिप और खेल कोटे का सीधा लाभ मिल सकेगा। कैंप में सिर्फ चयनित खिलाड़ी जाएंगे नई नीति के तहत अब नेशनल प्रतियोगिताओं के लिए आयोजित कैंप में केवल चयनित खिलाड़ियों को ही शामिल किया जाएगा। अभी तक ट्रायल के दौरान संभावित खिलाड़ियों की बड़ी सूची तैयार की जाती थी और कैंप में जरूरत से ज्यादा खिलाड़ियों को बुलाया जाता था। जानकारी के अनुसार ट्रायल के दौरान कन्वीनर, कोच, मैनेजर और संबंधित एसोसिएशन के पदाधिकारी मौजूद रहते थे, लेकिन अंतिम टीम का चयन बाद में कोच और मैनेजर करते थे। अब विभाग इस प्रक्रिया में बदलाव करेगा। उदाहरण के तौर पर फुटबॉल टीम में जहां अंतिम रूप से 18 खिलाड़ियों का चयन होना होता है, वहां कैंप में 27 खिलाड़ियों को बुलाया जाता था। विभाग का कहना है कि अब केवल चयनित 18 खिलाड़ियों को ही कैंप में शामिल किया जाएगा। बाकी खिलाड़ियों का रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के पास रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जाएगा। नई स्पोर्ट्स पॉलिसी में वाटर स्पोर्ट्स को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। इसके तहत रोइंग, यॉटिंग, कैनोइंग और क्याकिंग जैसी खेल गतिविधियों को शामिल किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे ग्रासरूट स्तर पर नए खिलाड़ियों को आगे आने का मौका मिलेगा और शहर में वाटर स्पोर्ट्स का आधार मजबूत होगा।

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