चंडीगढ़ में 1.88kg चरस समेत पकडे़ आरोपी की जमानत खारिज:कोर्ट ने कहा- भागने-गवाहों को प्रभावित करने का खतरा, पुलिस पर झूठा फंसाने का आरोप

चंडीगढ़ में 1.88 किलो चरस बरामदगी के मामले में आरोपी जयेश डेब्लॉ को स्पेशल कोर्ट से राहत नहीं मिली। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बरामद नशीले पदार्थ की मात्रा कमर्शियल श्रेणी में आती है। ऐसे में एनडीपीएस एक्ट की सख्त धारा 37 लागू होती है और जमानत देना संभव नहीं है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में चरस की बरामदगी यह संकेत देती है कि आरोपी किसी बड़े नेटवर्क या सप्लाई चेन से जुड़ा हो सकता है। ऐसे में जमानत मिलने पर उसके दोबारा अवैध गतिविधियों में शामिल होने, फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस को देखकर भागा आरोपी पुलिस के मुताबिक, 8 दिसंबर 2025 को मनीमाजरा थाना क्षेत्र में टीम नियमित गश्त कर रही थी। शाम करीब 4:15 बजे जब टीम बस स्टैंड के पास पहुंची, तो उन्हें एक युवक बैग लेकर आते हुए दिखाई दिया। युवक का व्यवहार संदिग्ध लग रहा था। जैसे ही उसने पुलिस को देखा, वह घबरा गया और इधर-उधर देखने लगा, जिससे शक और बढ़ गया। पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया इसके बाद पुलिस ने उसे रोककर पूछताछ की। संतोषजनक जवाब न मिलने पर नियमानुसार उसकी तलाशी ली गई। इस दौरान उसके बैग से करीब 1.88 किलो चरस बरामद हुई। इतनी बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपनी पहचान हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र के रहने वाले जयेश डेब्लॉ के रूप में बताई। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस पर झूठा फंसाने का आरोप सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट में कहा कि आरोपी को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उनका कहना था कि पुलिस ने जो चरस बरामद करने का दावा किया है, उसकी सैंपलिंग सही ढंग से नहीं की गई। यानी जब बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त किया गया, तो उसमें से जांच के लिए जो नमूने (सैंपल) लिए गए, वे पूरी तरह मिलाकर (एकसमान तरीके से) नहीं लिए गए। इस वजह से जांच की प्रक्रिया पर संदेह बनता है और इसका फायदा आरोपी को मिलना चाहिए। वकील ने यह भी बताया कि आरोपी 8 दिसंबर 2025 से लगातार जेल में बंद है और अभी तक मामले का ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने दलील दी कि ऐसे मामलों में सुनवाई लंबी चलती है, इसलिए आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखना सही नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट से अनुरोध किया गया कि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाए, ताकि वह बाहर रहकर अपना बचाव कर सके। कमर्शियल क्वांटिटी में चरस दलील खारिज कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को मानने से इनकार कर दिया। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि आरोपी के पास से जो 1.88 किलो चरस बरामद हुई है, उसे “थोड़ी ज्यादा” या मामूली मात्रा नहीं माना जा सकता। यह मात्रा लगभग 2 किलो के करीब है और कानून के अनुसार यह कमर्शियल क्वांटिटी (बड़ी मात्रा) में आती है, जिसे गंभीर अपराध माना जाता है। कोर्ट ने आगे समझाया कि ऐसे मामलों में NDPS एक्ट की धारा 37 लागू होती है, जो जमानत देने के लिए सख्त शर्तें तय करती है। इन शर्तों के तहत कोर्ट को यह संतुष्ट होना जरूरी होता है कि आरोपी पहली नजर में निर्दोष है और जमानत मिलने के बाद वह कोई अपराध नहीं करेगा। इस मामले में कोर्ट को ऐसा कोई ठोस आधार नहीं मिला, जिससे यह माना जा सके कि आरोपी निर्दोष है। सिर्फ यह कहना कि जांच में कमी है या आरोपी को फंसाया गया है, पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि “prima facie” यानी पहली नजर में दिखने वाली बातों के आधार पर ही जमानत नहीं दी जा सकती। इसके लिए मजबूत और पुख्ता कारण जरूरी होते हैं, जो यहां मौजूद नहीं हैं। इसी वजह से कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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