चंडीगढ़ में 15 जून तक पूरा होगा डिजिटल भूमि सर्वे:5 गांव और 15 सेक्टरों में ड्रोन सर्वे पूरा; अब हो रही दस्तावेजों की जांच

चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से शुरू किया गया नक्शा प्रोजेक्ट (नेशनल जियोस्पेशियल नॉलेज आधारित लैंड सर्वे ऑफ अर्बन हैबिटेशन्स) 15 जून तक पूरा हो जाएगा है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत शहर के पांच गांवों और 15 सेक्टरों में डिजिटल भूमि सर्वे किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार परियोजना में गांव बुड़ैल, अटावा, कजहेड़ी, पलसौरा और सारंगपुर को शामिल किया गया है। इसके अलावा सेक्टर-2 से सेक्टर-17 तक के क्षेत्रों का भी सर्वे किया जा रहा है। ड्रोन सर्वे पूरा, अब फील्ड वेरिफिकेशन जारी संबंधित क्षेत्रों में ड्रोन सर्वे का काम पूरा हो चुका है। अब प्रशासन की टीमें घर-घर जाकर संपत्ति स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कर रही हैं। इस परियोजना के तहत इमारतों और जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। सर्वे टीम हर संपत्ति की तस्वीर, क्षेत्रफल, ऊंचाई और उपयोग से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज कर रही है। 20 टीमें कर रही हैं काम प्रशासन ने सर्वे के लिए 20 टीमों का गठन किया है। ये टीमें अलग-अलग सेक्टरों और गांवों में जाकर डेटा जुटा रही हैं। अब तक संपत्तियों का रिकॉर्ड मैनुअल तरीके से रखा जाता था, जिसके कारण कई बार रिकॉर्ड में गड़बड़ी, सीमाओं को लेकर विवाद और मालिकाना हक संबंधी समस्याएं सामने आती थीं। 30.61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हो रहा सर्वे प्रोजेक्ट का कुल क्षेत्रफल 30.61 वर्ग किलोमीटर है, जहां करीब 1 लाख 47 हजार लोग रहते हैं। प्रशासन का लक्ष्य शहर की सभी इमारतों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है। यह परियोजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा भूमि प्रशासन के आधुनिकीकरण के तहत शुरू की गई है। इसमें ड्रोन सर्वे, हाई-रिजॉल्यूशन इमेजरी और GIS मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। संपत्ति विवाद कम होने की उम्मीद शहरी गांवों में पुराने मैनुअल रिकॉर्ड, ओवरलैपिंग दावे और अस्पष्ट सीमाओं के कारण लंबे समय से संपत्ति विवाद होते रहे हैं। डिजिटल रिकॉर्ड बनने के बाद मालिकाना हक में पारदर्शिता आएगी और कानूनी स्पष्टता बढ़ेगी। इससे जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद कम होने की उम्मीद है। खरीद-फरोख्त और लोन प्रक्रिया होगी आसान डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और लीज प्रक्रिया तेज और सुरक्षित बनेगी। साथ ही धोखाधड़ी की संभावनाएं भी कम होंगी। बैंक और वित्तीय संस्थानों को भी संपत्ति के मालिकाना सत्यापन में आसानी होगी, जिससे लोन स्वीकृति प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

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