चंडीगढ़ स्नैचिंग केस में शिकायतकर्ता कोर्ट में पलट गया, जिसका फायदा आरोपी को मिला। इस मामले में अदालत ने सिर्फ एक आरोपी वाहिद अली को दोषी माना है। कोर्ट ने उसे आईपीसी की धारा 411 (चोरी का सामान अपने पास रखने) में दोषी करार दिया है। हालांकि स्नैचिंग यानी धारा 379-A के आरोप से उसे बरी कर दिया गया। वहीं दूसरे आरोपी अनीश कुमार को अभी दोषी नहीं ठहराया गया, क्योंकि वह सुनवाई के दौरान फरार हो गया था। अदालत ने उसे जनवरी 2026 में भगोड़ा घोषित किया था। उसके पकड़े जाने या सरेंडर करने के बाद उसके खिलाफ केस की सुनवाई आगे चलेगी। यह फैसला एडिशनल सेशंस जज अमित कुमार ग्रोवर की अदालत ने सुनाया। मामला सेक्टर-39 थाना क्षेत्र का है, जहां नवंबर 2022 में दो लोगों से मोबाइल फोन और नकदी छीने जाने की शिकायत दर्ज हुई थी। 2022 में हुई थी स्नैचिंग की वारदात पुलिस के अनुसार 6 नवंबर 2022 की शाम सेक्टर-54 के पास टैक्सी स्टैंड के नजदीक दो युवकों ने एक्टिवा पर आकर मजदूर कमलेश चंदर और इंतजार से मोबाइल फोन और नकदी छीन ली थी। आरोपियों ने दोनों वारदातों को कुछ मिनट के अंतराल में अंजाम दिया था। शिकायत मिलने के बाद सेक्टर-39 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने वाहिद अली को गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से शिकायतकर्ता का मोबाइल फोन बरामद किया। पुलिस ने यह भी दावा किया कि वारदात में इस्तेमाल एक्टिवा भी बरामद हुई थी, जो पहले चोरी की निकली। अदालत में पलट गए शिकायतकर्ता सुनवाई के दौरान दोनों शिकायतकर्ता अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं कर पाए। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी और मोबाइल बरामदगी उनके सामने नहीं हुई थी। इसके बाद अदालत ने कहा कि स्नैचिंग का आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। हालांकि पुलिस द्वारा बरामद मोबाइल फोन, रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर अदालत ने माना कि वाहिद अली के पास चोरी का मोबाइल मिला था। इसी आधार पर अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 411 के तहत दोषी ठहराया। 9 महीने जेल में रह चुका आरोपी सजा सुनाने के दौरान अदालत ने आरोपी वाहिद अली की पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा। अदालत के सामने बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि आरोपी परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य है। उसके माता-पिता बुजुर्ग हैं और हाल ही में उसकी शादी हुई है, इसलिए पत्नी भी उसी पर निर्भर है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी एक गैस एजेंसी में डिलीवरी बॉय का काम करता है। अदालत को यह भी बताया गया कि आरोपी इस मामले में जांच और ट्रायल के दौरान करीब 9 महीने तक जेल में रह चुका है। अदालत ने माना कि आरोपी की उम्र अभी केवल 25 साल है और मामला वर्ष 2022 से चल रहा था। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने नरमी बरतते हुए फैसला सुनाया कि आरोपी को उतनी ही सजा दी जाए, जितनी अवधि वह पहले ही जेल में काट चुका है। इसके बाद अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी को इस मामले में आगे जेल में रखने की जरूरत नहीं है और उसे रिहा कर दिया जाए।