हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में चेस्टरहिल-2 और चेस्टरहिल-4 से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर माकपा (CPIM) ने प्रदेश सरकार के कार्यकारी मुख्य सचिव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में माकपा ने मामले की न्यायिक जांच कराने और संबंधित अधिकारी को पद से हटाने की मांग की। माकपा नेता ने बताया कि सोलन के एसडीएम की जांच में जमीन खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और कथित बेनामी संपत्ति के संकेत मिले थे। आरोप है कि जब एसडीएम ने कार्रवाई की सिफारिश की, तो जांच को दबा दिया गया। गंभीर मामले को आपसी विवाद के रूप में पेश कर रही सरकार माकपा के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि पार्टी इस मामले को निर्णायक मोड़ तक लेकर जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस गंभीर मामले को अधिकारियों के आपसी विवाद के रूप में पेश कर रही है, जबकि इसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। चौहान ने चेतावनी दी कि यदि सरकार कार्रवाई नहीं करती, तो माकपा प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन शुरू करेगी और जनता को इस मुद्दे पर एकजुट करेगी। मुख्य सचिव पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो चौहान ने यह भी बताया कि किसान सभा के बैनर तले प्रभावित परिवार उपायुक्त सोलन से मिल चुके हैं। उन्होंने मांग की कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कार्यकारी मुख्य सचिव द्वारा पूर्व मुख्य सचिव और एक वर्तमान अतिरिक्त मुख्य सचिव पर लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। माकपा ने सरकार से सभी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर न्यायिक जांच करवाने की मांग की। चेस्टरहिल प्रकरण में शामिल अधिकारियों को तुरंत हटाए संजय चौहान ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने ‘संदिग्ध सत्यनिष्ठा’ (doubtful integrity) वाले अधिकारियों को अहम पदों से हटाने की बात कही थी। माकपा ने मांग की कि चेस्टरहिल प्रकरण में शामिल अधिकारियों को तुरंत हटाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लैंड और रियल एस्टेट माफिया की उच्च अधिकारियों के साथ सांठगांठ से ‘लैंड ग्रैब’ के मामले बढ़ रहे हैं। माकपा ने सरकार से इस पर सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया।