जालंधर में पोस्टेड मेजर ने विज्ञापन देख की शादी:55 लाख के जेवर हड़पने का आरोप, तलाक दे ढोल पर नाची पत्नी

जालंधर कैंट में तैनात मेजर गौरव अग्निहोत्री से तलाक लेकर ढोल पर नाचने वाली प्रणिता पर कई आरोप लगे हैं। मेजर ने कैमरे के सामने न आते हुए बताया कि प्रणिता से शादी अखबार से विज्ञापन से हुई थी। उन्होंने भी विज्ञापन दिया था, जिसे देख लड़की वालों ने बात की और मिले। दोनों में बात बनी तो रिश्ता तय हो गया। शादी के 11 महीने तक सब ठीक चला लेकिन इसके बाद ससुराल की दखलअंदाजी बढ़ गई और प्रणिता ने झगड़ा करना शुरू कर दिया। मेजर के पिता रिटायर्ड सूबेदार श्याम किशोर अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि बहू 55 लाख के गहने भी हड़प कर गई है, जबकि वह उनका सामान वापस कर रहे हैं। पिता रिटायर्ड सूबेदार श्याम किशोर अग्निहोत्री ने कहा कि बहू ने प्रापर्टी को लेकर भी झगड़े किए और कहने लगी कि मेरे नाम पर भी जमीन करवाओ, इसके चलते मैंने उसके नाम पर 3 बीघा जमीन करवाई, जिसके डॉक्यूमेंट भी उनके पास हैं। शादी के एक साल बाद ही बहू ने प्रताड़ित करने का आरोप लगा उनको अरेस्ट करवाना चाहा। बिना दहेज की शादी, नहीं तो जेल में होता- मेजर के पिता
मेजर के पिता ने कहा कि अभी उन्होंने बिना दहेज के शादी की है, नहीं तो वो जरूर जेल में होते। मेजर के पिता रिटायर्ड सूबेदार श्याम किशोर अग्निहोत्री ने बताया कि 14 दिसंबर 2018 को शाहजहांपुर निवासी उनके बेटे (आर्मी मेजर) की शादी मेरठ की प्रणिता शर्मा से हुई थी। एक बार बहू को मनाकर लाए भी
हमारे बेटे ने इस रिश्ते को बचाने के लिए कई प्रयास किए। एक बार बहू को मनाकर लाए भी, लेकिन अब हमारे पोते में बहू के पिता को अपना बेटा नजर आने लगा तो ये सारा षड़यंत्र रचा गया। दादा श्याम किशोर का छलका दर्द, बोले-
उसने मुझसे दादा होने का अधिकार छीन लिया। हम आज भी 2019 के उन झूठे मुकदमों का दंश झेल रहे हैं जो उन्होंने हमें जेल भेजने के लिए किए थे।
समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर बेटे की पहचान उजागर की
पिता रिटायर्ड सूबेदार श्याम किशोर अग्निहोत्री ने बताया कि दोनों परिवारों के बीच लिखित एग्रीमेंट हुआ था कि तलाक के बाद कोई भी एक-दूसरे की सोशल लाइफ, नाम या रैंक का खुलासा मीडिया में नहीं करेगा। हालांकि प्रणिता ने मेजर का नाम और पद सार्वजनिक कर पूरे देश में परिवार को बदनाम किया है। बच्चे को उसके पिता से छीन लिया गया
पिता रिटायर्ड सूबेदार श्याम किशोर अग्निहोत्री ने रुंधे गले से कहा कि बहू के पिता रिटायर्ड जज हैं, जिनके दबाव में उन्होंने कागजों पर साइन किए। प्रणिता ने उनसे उनका पोता और बेटे से उसका बच्चा छीन लिया है। अब उन्हें बच्चे से मिलने तक नहीं दिया जा रहा। मीडिया ट्रायल के कारण बेटा डिप्रेशन में
जालंधर में तैनात मेजर के माता-पिता के अनुसार, इस पूरे विवाद और मीडिया ट्रायल के कारण उनका बेटा डिप्रेशन में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रणिता द्वारा लगाए गए प्रताड़ना के आरोप झूठे हैं, बल्कि असलियत में प्रताड़ना उनके परिवार ने झेली है। मेजर की मां ने बताईं 3 अहम बातें… बहू नहीं उसके मायके ने षड्यंत्र रचा: मेजर गौरव की मां अनीता अग्निहोत्री ने कहा कि यह तलाक सामान्य विवाद नहीं, बल्कि बहू के मायके वालों की ओर से रचा गया षड्यंत्र है। बहू के परिवार ने अपने बेटे की एक्सीडेंट में मौत के बाद उनके पोते पर अधिकार जमाने के उद्देश्य से यह सब किया। उनके अनुसार, बहू पर दबाव डालकर जानबूझकर झगड़े करवाए गए, ताकि बच्चे को पिता और दादा-दादी से अलग किया जा सके। माता-पिता को अलग कर क्या कोई बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर सकता है? मैंने बहू को हमेशा बेटी की तरह माना: अनीता ने बताया कि उन्होंने अपनी बहू को हमेशा बेटी की तरह माना। अपने दूसरे बीमार बेटे को छोड़कर उसकी सेवा की। इसके बावजूद उन्हें कभी सम्मान नहीं मिला। अनीता के अनुसार, बहू का परिवार रसूखदार (वकील और जज) होने के कारण उन पर हमेशा मानसिक दबाव बनाता रहा और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की। उन्होंने अपने बेटे के घर को बचाने के लिए लंबे समय तक हर अत्याचार को चुपचाप सहा। तलाक के बाद फौज को बदनाम किया: मेजर की मां ने कहा- समझौते के बावजूद मेरे बेटे की पहचान, फोटो और लोकेशन को सार्वजनिक किया गया। तलाक के बाद भी हमारा भरोसा तोड़ दिया। एक फौजी की सुरक्षा और गरिमा के साथ खिलवाड़ भी किया गया। जिस बेटे ने मीडिया में एक शब्द नहीं बोला, उसे इस तरह बदनाम करना गलत है। मैंने अपनी बहू की तन-मन-धन से सेवा की, लेकिन अंत में मुझे केवल बदनामी और अपने पोते से जुदाई ही मिली। एक-दूसरे के खिलाफ न बोलने के एग्रीमेंट को तोड़कर भारतीय सेना को भी बदनाम किया। जानिए मायके वालों ने क्या बताया पूरा मामला…
मेरठ में रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया कि मेरी बेटी प्रणिता शर्मा के लिए शादी के बाद से ही ससुराल वालों का व्यवहार ठीक नहीं रहा। 7 सालों में उसने काफी परेशानियां झेलीं। पति और ससुराल के लोग उसे प्रताड़ित करने लगे। इस दौरान उसका एक बेटा भी हुआ, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद भी हालात नहीं बदले। मेरठ फैमिली कोर्ट में अर्जी लगाई
ससुराल वाले उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते। आखिरकार प्रणिता ने तलाक लेने का फैसला किया। उसने मेरठ फैमिली कोर्ट में अर्जी लगाई। 4 अप्रैल को कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया। इसके बाद परिवार बेटी प्रणिता शर्मा को पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाया है। बेटी शादी में बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी
पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा कि अगर मेरी बेटी शादी में दुखी थी, तो उसे खुशी देना मेरा दायित्व था। बेटी शादी में बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी। आज मैं उसे उसी सम्मान के साथ वापस लाया हूं। मैंने उन लोगों से कोई एलीमनी या सामान नहीं लिया। बेटी को ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत
उन्होंने कहा कि बेटी को हर हाल में ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है। बेटी कोई सामान नहीं, वह परिवार का हिस्सा है। महिलाओं का सशक्तीकरण सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे जमीन पर उतारना जरूरी है।

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