डॉ. ठाकर सिंह इकोलाहा के बलिदान, संघर्ष और योगदान पर लिखी ​किताब

चंडीगढ़ | भारत के स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों में शामिल स्वतंत्रता सेनानी और दार्शनिक डॉ. ठाकर सिंह इकोलाहा पर उनके परपोते रोटेरियन हसन सिंह मेजी ने जीवनी लिखी है। इसे उन्होंने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को दी। पंजाब लोक भवन में हुई मुलाकात के दौरान हसन मेजी ने राज्यपाल को डॉ. ठाकर सिंह के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जानकारी दी। सामाजिक सेवा हसन सिंह मेजी ने कहा कि यह केवल डॉ. ठाकर सिंह की जीवनी नहीं, बल्कि उन असंख्य गुमनाम नायकों की कहानी है जिनके बलिदान 1947 की नींव थे। पुस्तक में बलिदान, कर्म में आस्था, अंतरराष्ट्रीय प्रतिरोध और भारत की स्वतंत्रता में सिख योगदान जैसे विषयों के बारे में भी लिखा है। साथ ही यह लंदन स्थित इम्पीरियल लाइब्रेरी के अभिलेखों, एसजीपीसी रिकॉर्ड, अखबारें और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर आधारित है। डॉ. ठाकर ​सिंह के बारे में उन्होंने बताया​ कि वे चिकित्सक, राजनेता और क्रांतिकारी के रूप में सक्रिय रहे और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पहले महासचिव और शिरोमणि अकाली दल के पूर्व अध्यक्ष थे। ब्रिटिश शासन के खिलाफ गतिविधियों के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। निर्वासन के दौरान चीन के कैंटन स्थित उनका निवास भारतीय और एशियाई स्वतंत्रता आंदोलनों का केंद्र बना रहा। यहां क्रांतिकारी रास बिहारी बोस, राजा मोहिंदर प्रताप सिंह समेत कई स्वतंत्रता सेनानी और विचारक जुटते थे। यहां आंदोलन की रणनीति बनाई जाती थी और क्रांतिकारियों को शरण भी दी जाती थी।

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