दुष्यंत-पुलिस विवाद में हाईकोर्ट में 2 नई याचिका:जजपा नेताओं की पत्नी व बेटी ने कहा-हरियाणा पुलिस ने बच्ची पर पैर रखा, गंदी बातें बोली

हिसार में 16-17 अप्रैल की रात को जननायक जनता पार्टी (JJP) कार्यकर्ताओं के घरों में अवैध रूप से घुसने और दहशत फैलाने के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने नए नोटिस जारी किए हैं। जेजेपी कार्यकर्ता गौरव सैनी और विजेंद्र धानक के परिवारजनों की ओर से दायर याचिका पर हाइकोर्ट ने तुरंत सुनवाई करते हुए प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी किया है। याचिका में हरियाणा के DGP, हिसार के SP, DSP, सीआईए इंचार्ज समेत कई पुलिस कर्मचारियों को प्रतिवादी बनाया गया है। गौरव सैनी की पत्नी की याचिका पर अगली सुनवाई 20 मई को और विजेंद्र धानक की बेटी की याचिका पर अगली सुनवाई 27 मई को होगी।

हाईकोर्ट में दाखिल 2 नई याचिकाओं में क्या…

1. घर में जबरदस्ती घुसी पुलिस जेजेपी कार्यकर्ता गौरव सैनी की पत्नी शमा की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि उस रात करीब 4 बजे पुलिस ने जबरदस्ती घर में घुसकर सबको डराया-धमकाया और दहशत फैलाई। सादे कपड़ों में घुसे लोगों ने हथियारों के साथ सबको डराया और महिलाओं के प्रति अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई के दौरान गौरव सैनी के दस वर्षीय बेटे को हथियार से डराया-धमकाया गया जिससे वो आज भी दहशत में है। बच्चे के सामने ही उसके पिता के साथ दुर्व्यवहार किया गया। 2. CCTV की DVR अपने साथ ले गए इसके अलावा घर में घुसे लोग अपने साथ सीसीटीवी की फुटेज की रिकॉर्डिंग वाला डीवीआर भी ले गए। जिसमें परिवार की निजी वीडियो और रात के इस घटनाक्रम की वीडियो भी थी। याचिका में कहा गया है कि 24 अप्रैल को विस्तृत शिकायत दिए जाने के बाद भी आज तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। 3. सुबह 4 बजे बच्चों के कमरे में घुसी पुलिस वहीं, जेजेपी कार्यकर्ता विजेंद्र धानक की बेटी की तरफ से दी गई याचिका में भी हिसार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। धानक की बेटी ने कहा है कि वे पांच बहनें हैं और 16 अप्रैल की रात को घुसे लोगों ने नाबालिग बच्चियों के सामने उनके पिता को हथियार दिखाकर डराया गया। याचिका में कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज की रिकॉर्डिंग का डिवाइस उतारने के लिए एक शख्स सोते हुए बच्चों के कमरे में घुसा और उनके बेड पर चढ़कर डीवीआर उतारी और उस दौरान उसने एक बच्ची के पैर पर पैर रखा। 4. जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया सुबह करीब 4 बजे हुई इस कार्रवाई में विजेंद्र धानक के लिए उसके बच्चों के सामने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इन सभी घटनाओं की जानकारी के साथ दी गई शिकायत पर एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई हिसार पुलिस की तरफ से नहीं की गई है। दोनों याचिकाओं में इन परिवारों द्वारा हिसार पुलिस को दी गई शिकायत पर कार्रवाई करवाने और आरोपी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई के बाद इस विषय में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया है। इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई 20 और 27 मई को होगी। दुष्यंत के केस में 7 को होगी सुनवाई हरियाणा के हिसार में सब्जी मंडी पुल पर CIA इंचार्ज पवन कुमार से हुए विवाद के मामले में पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की याचिका पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई। कोर्ट में हिसार एसपी की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। अब अगली सुनवाई के लिए 7 मई की डेट तय की गई है। दुष्यंत चौटाला ने 23 अप्रैल को याचिका दायर की थी। इसमें हिसार पुलिस पर FIR दर्ज करने समेत कई आरोप लगाए। अब यहां पढ़िए पूर्व डिप्टी CM की पिटीशन में क्या… 1. जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग हाईकोर्ट में दायर याचिका में याची दुष्यंत ने मामले में आरोपियों के खिलाफ ना केवल FIR दर्ज कराने की मांग की, बल्कि जांच को हरियाणा पुलिस से हटाकर किसी स्वतंत्र एजेंसी जैसे, सीबीआई, चंडीगढ़ या पंजाब पुलिस को सौंपने का अनुरोध भी किया है। हिसार के पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले में कार्रवाई नहीं किए जाने के चलते दुष्यंत चौटाला हाईकोर्ट पहुंचे हैं। 2. जान से मारने की धमकी देने का आरोप दुष्यंत चौटाला की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि 17 अप्रैल को हिसार में उनके काफिले को एक सफेद बोलेरो वाहन ने रोक लिया। इसमें सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में मौजूद पुलिस अधिकारी, जिनमें- इंस्पेक्टर पवन कुमार प्रमुख रूप से शामिल है, ने हथियार लहराते हुए उन्हें और उनके सुरक्षाकर्मियों को धमकाया। याची दुष्यंत ने कोर्ट को बताया कि वे वाई-प्लस सुरक्षा श्रेणी के तहत संरक्षित हैं। बावजूद इसके ऐसी घटना होना बेहद गंभीर है। याचिका के अनुसार उनके निजी सुरक्षा अधिकारियों ने भी घटना की पुष्टि करते हुए अलग-अलग शिकायतें दी हैं, जिनमें जान से मारने की धमकी तक का जिक्र है। 3. झूठे मुकदमे दर्ज करने की साजिश याचिका के अनुसार हरियाणा पुलिस ने इस घटना के बाद निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय याची के परिजनों और समर्थकों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दबाव बनाने की कोशिश की। विशेषकर 7 अप्रैल की एक घटना को आधार बनाकर दर्ज FIR को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया गया है। दुष्यंत चौटाला ने कोर्ट के समक्ष यह भी दलील दी कि घटना के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और न ही एफआईआर दर्ज की गई है। 4. साक्ष्य प्रभावित करने की आशंका याचिका के अनुसार मामले को दबाने और साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका जताई गई है। साथ ही कोर्ट से सीसीटीवी फुटेज समेत सभी संबंधित रिकॉर्ड संरक्षित करने के निर्देश देने की मांग की गई है। यहां पढ़िए पूरा विवाद… 1. विवाद की जड़ (GJU घटनाक्रम): 15 अप्रैल 2026 को जेजेपी के युवा प्रदेशाध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के नेतृत्व में छात्र संगठन यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम करना चाहते थे, लेकिन अनुमति न मिलने पर हंगामा हुआ।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का आरोप है कि छात्रों ने VC ऑफिस के गेट को तोड़ने का प्रयास किया और तोड़फोड़ की, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज किया।

2. जेजेपी के आरोप (पुलिस कार्रवाई पर सवाल): पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बदले की भावना से कार्रवाई की और उनके कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की। जेजेपी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने रात में घरों में घुसकर छापेमारी की और महिलाओं के साथ गलत व्यवहार किया।
दुष्यंत चौटाला ने दावा किया कि CIA इंचार्ज ने उनके काफिले को रोकने की कोशिश की और बंदूक तानी।

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