नीतीश की तरह हरनौत से चुनाव लड़कर विधानसभा जाएंगे निशांत!:सेलेक्टेड नहीं, इलेक्टेड नेता की इमेज बनाएंगे, 40 दिन नापेंगे बिहार, कार्यकर्ताओं से वन-टू-वन

पूर्व सीएम नीतीश कुमार के बिहार सरकार के मार्गदर्शक मंडल में जाने के बाद उनके बेटे निशांत कुमार अब पॉलिटिक्स में एक्टिव हैं। वे रोज पार्टी कार्यालय पहुंच रहे हैं। अलग-अलग जिलों के कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। जेठ की तपती गर्मी में 3 मई से करीब 40 दिनों की यात्रा पर निकलने वाले हैं। इन सबके बीच 2 सवाल हैं, जिनका जवाब जदयू के कोई नेता स्पष्ट देने से बच रहे हैं। इन दोनों सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने टीम निशांत, जदयू में नीतीश के करीबी नेता और नालंदा के कुछ नेताओं से बात की। स्पष्ट तौर पर कोई कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में समझिए एक्टिव पॉलिटिक्स को लेकर क्या है निशांत की रणनीति। निशांत के लिए दोनों ऑप्शन खुले रखना चाहती है पार्टी टीम निशांत के एक अहम नेता ने भास्कर को बताया कि निशांत क्या करेंगे, इसका फैसला लेने का पूरा अधिकार उनके पास है। यही कारण है कि जदयू के सभी नेता चाहते थे कि 15 अप्रैल को हुए सम्राट सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में निशांत कुमार डिप्टी सीएम पद की शपथ लें, लेकिन आखिरी समय तक वह इसके लिए राजी नहीं हुए। पार्टी को प्लान बी पर काम करना पड़ा। निशांत मान गए तो हरनौत से चुनाव लड़ाने की चर्चा दरअसल, निशांत कुमार अभी तक किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। निशांत के साथ CM नीतीश कुमार भी चाहते हैं कि उनपर परिवार के दम पर राजनीति में आगे बढ़ने के आरोप न लगे। वे पहले विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना चाहते हैं। इसके बाद सरकार में शामिल होंगे। ऐसे में पार्टी के आलाकमान चाहते हैं कि करियर की शुरुआत में ही बैकडोर पॉलिटिक्स की बजाए निशांत सीधे जनता से चुनकर सदन में पहुंचें। उनके चुनाव लड़ने के लिए नालंदा जिले की हरनौत सीट को आइडेंटिफाइ किया जा रहा है। नीतीश ने भी अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत इसी सीट से की थी। 1985 में वह पहली बार यहीं से विधायक बने थे। ये उनका गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में पार्टी के टॉप लीडरशिप की इच्छा है कि वे यहीं से चुनाव लड़े। प्लानिंग के मुताबिक यहां के मौजूदा विधायक हरि नारायण सिंह से स्वैच्छिक इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है। वह इस्तीफा देते हैं तो 6 महीने के भीतर उपचुनाव होगा और निशांत कुमार चुनाव लड़ सकते हैं। टीम निशांत के एक अहम साथी ने बताया, ‘इस फैसले के लिए हरिनारायण सिंह के साथ निशांत कुमार को भी मनाना पड़ेगा। क्योंकि निशांत कुमार की सबसे बड़ी डिमांड यही है कि उनके कारण किसी को कोई नुकसान नहीं हो।’ हरनौत विधायक बोले- नीतीश चाहेंगे तभी इस्तीफा देंगे इस सूचना की पुष्टि के लिए भास्कर ने हरनौत से 10 बार के विधायक हरिनारायण सिंह से बात की। उनसे पूछा क्या आपको इस संबंध में कोई सूचना दी गई है? हरिनारायण ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- आपको विधान परिषद भेजने की तैयारी है, क्या इसे स्वीकार करेंगे? इस सवाल पर हरिनारायण सिंह ने कहा, मैं 10 बार से विधानसभा का चुनाव लड़ रहा हूं। चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचता रहा हूं। बैक डोर पॉलिटिक्स क्यों करूंगा? हां, अगर नीतीश कुमार कोई आदेश देंगे तो इस पर विचार किया जाएगा। जिलाध्यक्ष बोले- निशांत चुनाव लड़ें तो एकतरफा जीत होगी
हरनौत विधायक के बाद हमने जदयू के नालंदा जिलाध्यक्ष मोहम्मद अरशद से बात की। उनसे समझने की कोशिश की कि क्या हरनौत में चुनाव लड़ने को लेकर सांगठनिक स्तर पर कोई तैयारी की जा रही है? अरशद ने बताया, ’यह निर्णय पार्टी के बड़े नेता लेंगे। हमलोगों को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है। निशांत कुमार अगर हरनौत से चुनाव लड़ेंगे तो यहां से कोई लड़ाई ही नहीं रह जाएगी। निशांत एक तरफा चुनाव जीतेंगे। ये फैसला केवल नीतीश कुमार ही ले सकते हैं।’ हरनौत से बात नहीं बनी तो MLC बनेंगे निशांत अगर हरनौत से चुनाव लड़ने पर बात नहीं बनती है तब निशांत कुमार को MLC बनाया जाएगा। नीतीश कुमार ने MLC पद से इस्तीफा दिया है। उनकी सीट खाली है। इस सीट से निशांत को विधान परिषद भेजा जा सकता है। इसमें कोई बाधा नहीं है। सदन से पहले सड़क का अनुभव लेना चाहते हैं निशांत निशांत परिवारवाद का ठप्पा लगाने की बजाए जमीन पर संघर्ष करके सदन तक पहुंचना चाहते हैं। यही कारण है कि मई-जून की भयंकर गर्मी में उन्होंने बिहार घूमने का फैसला लिया है। वह पश्चिम चंपारण से अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे। पार्टी सूत्रों की मानें तो अलग-अलग फेज में बिहार के हर जिले में पहुंचेंगे। यात्रा के दौरान अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। उनसे वन टू वन बात करेंगे। उनका मकसद बिहार और बिहार की पॉलिटिक्स को समझना है। दरअसल, अभी तक पॉलिटिक्स से दूर रहने वाले निशांत ऐसा कोई फैसला नहीं लेना चाहते हैं, जिससे उनके और उनके पिता की छवि पर कोई आंच आए। निशांत को डिप्टी सीएम बनने के लिए मनाने वालों में शामिल एक विधायक ने भास्कर को बताया, ‘वे पूरी तैयारी के साथ सरकार में शामिल होना चाहते हैं। इसके लिए राज्य की यात्रा कर लोगों की समस्या, सरकार की फंक्शनिंग और राजनीति के उतार-चढ़ाव जानने-समझने के बाद ही सरकार में शामिल होना चाहते हैं।’ दरअसल, निशांत राजनीति में मात्र एक महीने पुराने हैं। मार्च में उन्होंने JDU की औपचारिक सदस्यता ग्रहण की है। चुनाव से पहले उन्होंने पॉलिटिकल एक्विविटी में शामिल होना शुरू किया था। इससे पहले पॉलिटिक्स से ज्यादा अध्यात्म में इंटरेस्टेड थे। उन्हें इस बात का डर है कि अगर वे पूरी तरह तैयार होकर नहीं आए तो राजनीति की शुरुआत में ही एक्सपोज हो जाएंगे। कुर्मी को पार्टी और भूमिहार को सत्ता, नीतीश का फॉर्मूला बरकरारा नीतीश कुमार भले बिहार सरकार में एक्टिव तौर पर नहीं हैं, लेकिन जदयू के भीतर उन्होंने अपनी सोशल इंजीनियरिंग बरकरार रखी है। जिस सोेशल इंजीनियरिंग के भरोसे वह 20 साल तक बिहार की सत्ता में बने रहे, उसे अपने बेटे के लिए भी तैयार किया है। जदयू के अगर मौजूदा समीकरण को देखें तो कुर्मी जाति से आने वाले श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता बनाया है। श्रवण सदन के भीतर जदयू के 85 विधायकों के नेता होंगे। वहीं, सरकार में पार्टी का चेहरा भूमिहार जाति से आने वाले विजय कुमार चौधरी को बनाया गया है। ये दोनों न केवल नीतीश कुमार के भरोसेमंद हैं, बल्कि 2005 में नीतीश कुमार को सत्ता में लाने में इन दोनों जातियों की सबसे अहम भूमिका रही है। यही कारण है कि 2005 से 2014 तक नीतीश कुमार भूमिहार और कुर्मी को सरकार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी देते थे। अभी भूमिहार जाति को BJP का सबसे वफादार वोटर माना जाता है। इन सबके अलावा नीतीश कुमार ने अपने सबसे भरोसेमंद और पुराने साथी बिजेंद्र यादव को डिप्टी CM बनाकर उन्होंने यादव जाति को भी मैसेज दिया है कि अगर मौका मिला तो वे केवल परिवार को ही नहीं कार्यकर्ता को भी पावर देंगे।

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