पंजाबी मूल के भाई-बहन ने कनाडा की पील पुलिस पर कोर्ट में 558.4 करोड़ रुपए हर्जाने का केस ठोका है। बुधवार 20 मई को अपने वकील फ्रेडरिक शूमान के जरिए ये केस लगाया। 2023 में पंजाबी बुजुर्ग सिख पति-पत्नी की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने अपनी जांच में कहा था कि गलती से ये सब हुआ है। गोलियां मारने वाले हमलावर किसी बॉबी नामक शख्स को ढूंढते हुए आए थे। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनको किसी भी खतरे के बारे में नहीं बताया जबकि घटना से 4 दिन पहले ही घर का विजिट किया था। पंजाब से अपने बच्चों जसप्रीत कौर सिद्धू (31) और गुरदित्त सिद्धू (29) को मिलने गए जगतार सिद्धू और हरभजन सिद्धू की 20 नवंबर 2023 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वे ओंटारियो के कैलेडन शहर में ठहरे थे। उस दिन आधी रात से ठीक पहले पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने जगतार सिद्धू को मृत पाया, जबकि उनकी पत्नी घायल थीं, जिन्होंने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। उनकी बेटी जसप्रीत कौर सिद्धू को भी 13 गोलियां लगी थीं, लेकिन वह जीवित बच गईं। अब वह और उनके भाई गुरदित सिंह सिद्धू ने खतरे की चेतावनी न देने के लिए पील रीजनल पुलिस (PRP) से 80 मिलियन कनाडाई डॉलर के हर्जाने की मांग कर रहे हैं। सिद्धू ने बताया कि हत्याकांड से चार दिन पहले इस पुलिस बल के एक अधिकारी ने उनके घर का दौरा किया था, लेकिन कोई संभावित खतरा नहीं बताया। सिद्धू ने रोते हुए बताया- मुझे उस रात की याद है मेरे माता-पिता की मेरी आंखों के सामने हत्या कर दी। पिता को मेरे सामने गोली मारी गई। मैंने अपनी मां की आखिरी चीखें सुनीं। इसके बाद सिर्फ गोलियों की आवाजें गूंज रही थीं। जीवित बची बेटी शारीरिक और इमोशन हर्जाना मांगा मुकदमे में जसप्रीत कौर सिद्धू ने दावा किया कि 13 गोलियां लगने के बाद मैंने महीनों अस्पताल में बिताए और वह अभी भी उन चोटों से उबर नहीं पा रही हैं जो अपने माता-पिता को खोने से मिली हैं। जसप्रीत कौर ने बताया कि उसे कंधे से लेकर पैरों तक बार-बार गोलियां मारी गईं और उनकी जान बचाने के लिए 18 घंटे लंबा ऑपरेशन चला। उनके गले और पेट में लगी गोलियों के कारण वे कुछ समय तक बोल नहीं पाईं। मुकदमे के अनुसार, एक गोली जिसे निकाला नहीं जा सका, वह अभी भी उनकी रीढ़ के पास फंसी है। दावे के मुताबिक, इस गोलीबारी के बाद से सिद्धू काम करने में असमर्थ हैं। वह नसों के डैमेज होने से चलने-फिरने में असमर्थ हैं और गंभीर मानसिक तनाव से गुजर रही हैं। सिद्धू परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों में से एक फ्रेडरिक शूमान ने कहा कि यह मामला पुलिस को उनकी जवाबदेही का अहसास कराने के लिए है। 4 दिन पहले पुलिस घर का विजिट किया था
स्टेटमेंट आफ क्लेम में भाई-बहन ने तर्क दिया है कि पील पुलिस को इस गंभीर खतरे के बारे में पता होना चाहिए था, क्योंकि यह मामला कनाडाई गैंगस्टर रायन वेडिंग के एक सहयोगी से जुड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने न तो इस मामले की सावधानीपूर्वक जांच की और न ही परिवार को इसकी जानकारी दी। मुकदमे में कहा गया कि यह पूरी तरह से स्पष्ट था कि पीड़ितों को चेतावनी न देने का नतीजा उनकी मौत का कारण बन सकता था। पुलिस ने कहा-उन्हें खतरे के बारे कुछ पता नहीं था
दूसरी तरफ पील पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं थी जिससे यह संकेत मिले कि उस पते पर रहने वाले किसी निवासी को जान का खतरा था। बाद में यह बात सामने आई कि वह पता बॉबी नामक एक व्यक्ति से जुड़ा था, जिसके घर को पहले भी एक गोलीबारी में निशाना बनाया गया था। उत्तरी अमेरिकी ड्रग गैंग के सरगना रायन वेडिंग को इस मामले में जनवरी 2026 में मैक्सिको से गिरफ्तार किया गया था। सिद्धू दंपति की हत्या की जांच ओंटारियो प्रांतीय पुलिस (OPP) की कैलेडन टुकड़ी द्वारा की गई थी। घटना के एक महीने बाद उन्हें पीड़ितों के रूप में पहचाना गया था। ओंटारियो पुलिस ने बाद में कहा कि सिद्धू परिवार हमलावरों का असली निशाना नहीं था। ड्रग्ज की खेप चोरी करने के मामले में हुई थी गलत पहचान
अक्टूबर 2024 में कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय की तरफ से आरोप लगाया गया था कि रायन वेडिंग और उसके सहयोगी एंड्रयू क्लार्क ने कथित तौर पर दक्षिणी कैलिफोर्निया से होकर निकलने वाली ड्रग्स की चोरी हुई खेप का बदला लेने के लिए बॉबी नामक युवक को मारने के आदेश दिए थे। इसी बॉबी की खोज करते हुए हमलावर पंजाबी दंपति के घर पहुंचे और गोलियां चला दीं।