पंजाब ट्राइडेंट समूह और प्रदूषण बोर्ड विवाद पर सुनवाई:हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, वैध कंसेंट-क्लियरेंस मौजूद; आरोप सिरे से खारिज

ट्राइडेंट समूह और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच चल रहे विवाद पर सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान ट्राइडेंट समूह ने कहा कि बोर्ड की कार्रवाई बदले की भावना से की गई है। कंपनी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि संस्थापक व राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता के राजनीतिक रुख बदलने के तुरंत बाद बोर्ड ने फैक्टरी के खिलाफ असामान्य कार्रवाई शुरू कर दी और सुरक्षा भी वापस ले ली गई। वैध कंसेंट और क्लियरेंस मौजूद याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि कंपनी के विभिन्न डिवीजनों के पास वैध कंसेंट और क्लियरेंस मौजूद हैं। यार्न व अन्य इकाइयों को 7 और 13 अप्रैल 2026 तक अनुमति प्राप्त थी, जबकि टॉवल डिवीजन का आवेदन लंबित है। इसके बावजूद अचानक 30 सदस्यीय टीम द्वारा शाम के समय निरीक्षण किया गया, जिसमें प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। ट्राइडेंट समूह ने यह भी आरोप लगाया कि सैंपल लेने के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ। नमूनों को सही तरीके से सील नहीं किया गया और न ही निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। सभी आरोपों को सिरे से किया खारिज वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह रेड नहीं, बल्कि नियमों के तहत सामान्य जांच थी। बड़े उद्योगों की समय-समय पर जांच जरूरी होती है और पिछले छह महीनों में सैकड़ों निरीक्षण किए गए हैं। बोर्ड ने कहा कि अभी कंपनी के खिलाफ कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हुई, इसलिए याचिका जल्दबाजी में दायर की गई है। अगर आगे कोई आदेश आता है, तो कंपनी एनजीटी में अपील कर सकती है।

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