नाम रिशु श्री, पूरा नाम रिशु रंजन सिन्हा। उम्र 39 साल। कबाड़ ठेकेदार के रूप में काम शुरू करने वाले रिशु श्री को सचिवालय के लोग रिशु बाबू के नाम से जानते थे। अधिकारियों के साथ उठने-बैठने वाले लोगों के बीच रिशु की पहचान ऐसे जादूगर के रूप में थी, जो बड़े-बड़े अधिकारियों से काम करा दे, चाहे टेंडर पास कराना हो या ट्रांसफर-पोस्टिंग। यही, वजह है कि ठेकेदार से लेकर अधिकारी-कर्मचारी तक अपना काम निकालने के लिए उसके पास पहुंचते थे। बुधवार को बिहार पुलिस की इकाई SVU (Special Vigilance Unit) ने पटना में रिशु श्री के ठिकाने पर छापेमारी की। गुरुवार को रिशु श्री को गिरफ्तार कर विशेष निगरानी कोर्ट में पेश किया। वहां से उसे 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में बेउर जेल भेज दिया गया है। छापेमारी के दौरान रिशु श्री के घर से करोड़ों रुपए के जेवरात और लाखों रुपए कैश मिले हैं। SVU की टीम दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच में जुटी है। रिशु श्री कौन है? किस तरह अधिकारियों से काम निकलवाता था? कैसे कमीशन लेता था? पढ़िए रिपोर्ट…। कौन है रिशु श्री? रिशु श्री मूल रूप से बिहार के सारण जिले का निवासी है। सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस और अन्य IAS अधिकारियों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी है। उसके खिलाफ SVU ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। ED की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु ने सरकारी कर्मचारियों/अधिकारियों को फायदा पहुंचाया। इसके बदले उसे सरकारी टेंडरों से जुड़ी अहम जानकारी पहले ही मिल जाती थी। रिशु अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर टेंडर में फेरबदल करा लेता था। मनचाहे ठेकेदार को टेंडर दिलाता था। इसके बदले कमीशन लेता था। कमीशन का हिस्सा संबंधित अधिकारी तक भी पहुंचता था। हजारों करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट्स में दलाली करता था रिशु श्री? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED की जांच में पता चला है कि रिशु कुछ अहम सरकारी विभागों में हजारों करोड़ रुपए के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाता था। कबाड़ ठेकेदार से सबसे बड़ा दलाल बना रिशु रिशु श्री पहले कबाड़ ठेकेदार था। कबाड़ खरीदने का ठेका लेने के लिए उसका सरकारी ऑफिस में आना जाना शुरू हुआ। उसने जल्द सरकारी बोर्डों, संगठनों और विभागों में पैठ बना ली। जैसे-जैसे रसूख बढ़ा बड़े-बड़े ठेकों से जुड़ गया। 2021 में उसे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में सलाहकार नियुक्त किया गया था। देखते-देखते रिशु शहरी विकास, आवास, जल संसाधन और स्वास्थ्य जैसे विभागों में ठेकेदारों और अधिकारियों के लिए ऐसा व्यक्ति बन गया, जिसकी मदद के बिना सौदा नहीं हो। आरोप है कि उसने कई ‘शेल कंपनियां’ बनाई। इनमें IAS अधिकारियों का निवेश था। कैसे काम करता था रिशु श्री? रिशु मीठी जुबान में बात कर सकता था। वह बड़े अधिकारियों के करीब पहुंच जाता था। उनके काम कराता। धीरे-धीरे, उसने कई अधिकारियों का भरोसा जीता। उनके साथ अच्छे संबंध बनाए। महंगे तोहफे दिए। अधिकारियों और उनके परिवार के लोगों के घूमने-फिरने का इंतजाम किया। अधिकारियों की पत्नियों और बच्चों के जन्मदिन पर बधाई देता था। उनके लिए शानदार पार्टियों का इंतजाम करता था। इन सबके बदले उसे अधिकारियों से मनचाहे ठेकेदार को टेंडर दिलाने और दूसरे काम कराने में मदद मिलती थी। कैसी है रिशु श्री की लाइफ स्टाइल? ठेकेदारी और दलाली से अकूत कमाई करने वाला रिशु लैविश लाइफ जीता है। महंगे कपड़े और घड़ियां पहनता है। पटना से बाहर जाने पर वह महंगे होटलों में ठहरता था। आरोप है कि रिशु ने पिछले 7-8 साल में 58 करोड़ रुपए से ज्यादा की 61 संपत्तियां खरीदी हैं। एक उदाहरण से समझिए, रिशु ने कैसे सरकारी ठेकों से की कमाई 2018 में सुपौल जिले के बीरपुर में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनाने के लिए टेंडर जारी हुआ था। उस वक्त संजीव हंस जल संसाधन विभाग में सचिव थे। करीब 125 करोड़ रुपए खर्च कर सेंटर तैयार होना था। यह कोसी और बिहार की दूसरी नदियों के प्रवाह के अध्ययन का केंद्र बनने वाला था। रिपोर्ट्स के अनुसार टेंडर में रिशु ने ऐसी शर्तें रखवाईं, जिससे उसके क्लाइंट अहमदाबाद की सेवरोक्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को ठेका मिल गया। रिशु ने मातृसेवा कंस्ट्रक्शन नाम की कंपनी को इस प्रोजेक्ट सब-कॉन्ट्रैक्ट दिलाया। मातृसेवा कंस्ट्रक्शन कंपनी रिशु के स्टाफ संतोष कुमार के नाम पर थी। संतोष रिशु की कंपनी रिलायबल इंफ्रा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड में काम करता था। मातृसेवा कंस्ट्रक्शन को मिले सब-कॉन्ट्रैक्ट के जरिए रिशु को फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनाने का ठेका दिलाने के बदले 8 से 10% कमीशन दिया गया। बाद में पता चला कि मातृसेवा कंपनी की तरफ से सचिव संजीव हंस को 67 लाख रुपए दिए गए। रिशु श्री के ठिकानों पर कब-कब हुई छापेमारी 13 जून 2025: ईडी ने देश भर में रिशु श्री के नौ ठिकानों पर दबिश दी। पटना, मुजफ्फरपुर, पानीपत और सूरत के ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई हुई। पटना में गोला रोड स्थित सामान्य प्रशासन विभाग के अंडर सेक्रेटरी विनोद कुमार सिंह के आवास पर भी दिन भर छापेमारी चली। विनोद कुमार सिंह रिशु श्री के इशारे पर सामान्य प्रशासन के माध्यम से छोटे कर्मचारियों का ट्रांसफर पोस्टिंग करवाने का काम देखते थे। ईडी को संदेह है कि रिशु श्री की ट्रांसफर-पोस्टिंग सिंडिकेट में मजबूत पकड़ थी और वह कई जिलों में अपने नेटवर्क के जरिए अधिकारियों-कर्मचारियों की पोस्टिंग तय करता था। 26 नवंबर 2025: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिशु श्री से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहमदाबाद, सूरत, गुड़गांव और नई दिल्ली में 9 ठिकानों पर छापेमारी की। करीब 33 लाख नकद, कई डिजिटल उपकरण और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए। 27 मई 2026: SVU ने पटना के मीठापुर स्थित रिशु श्री के ठिकाने कांताराम सखी एंक्लेव में छापेमारी की। जेवरात और कैश मिले।