भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर तोड़ा था इंद्रदेव जी का अहंकार: शास्त्री

भास्कर न्यूज | अमृतसर लोहगढ़ गेट स्थित प्राचीन सिद्ध श्री बाबा बालक नाथ मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गोवर्धन पूजा की गई। कथा दौरान ब्यास गद्दी पर विराजमान पंडित देवानंद शास्त्री ने भक्तों को कथा सुनाई। पंडित रमन शर्मा की अध्यक्षता और शर्मा परिवार की अध्यक्षता मेंं चल रही कथा में कई भक्त पहुंचे। पवित्र ज्योति जलाने के बाद सभी भक्तों ने मिलकर श्री ग्रंथ की पूजा की। कथा दौरान गोवर्धन पूजा का वर्णन किया। पंडित शास्त्री ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने इंद्रदेव जी का अंहकार भंग करने को गांव वासियों से भगवान गोवर्धन की पूजा कराई। उन्होंने गांव के लोगों को समझाया कि गोवर्धन पर्वत गाय के लिए हरा चारे समेत खाने को अन्न उगाने में सहायता करते है। इसलिए इंद्रदेव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए। जिससे इंद्रदेव के अंदर अंहकार आया और उन्होंने इंद्रदेव ने बारिश और तूफान बढ़ा दिया। परंतु भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर गौ और गांव को लोगों को उसके नीचे आश्रय दिया। इससे इंद्रदेव का अंहकार टूटा और उन्होंने भगवान कृष्ण से माफी मांगी। जिसके बाद गांव को लोग हर साल गोवर्धन पूजा करने लगे। कथा दौरान गाय के गोबर से भगवान गोवर्धन की प्रतिमा बनाकर पूजा की। इस मौके पर पंडित मदन लाल, महंत रमन कुमार, कैशियर अश्वनी खन्ना, पं रामपाल,,दुर्ग्याणा के मुख्य पुजारी ओम प्रकाश शर्मा, कमल शर्मा, पियूष शर्मा, मंदिर कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।

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