हिसार मिलिट्री कैंट में तैनात महाराष्ट्र के रहने वाले भारतीय सेना के एक जवान से शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ₹15 लाख 88 हजार 200 की बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने जवान को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर ‘ALUA’ नामक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया और 300% रिटर्न वाले IPO का लालच देकर बैंकों से लोन तक मंगवा लिया। साइबर अपराध थाना हिसार ने पीड़ित जवान की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4)और 61 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जवान मूलरूप से कोल्हापुर (महाराष्ट्र) का रहने वाला है। हिसार कैंट के अब्दुल हमीद विहार में रह रहे पीड़ित जवान डलवी सुमित मारुती ने पुलिस को बताया कि वे पिछले 4-5 सालों से म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। इसी दौरान उन्हें एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया। ग्रुप में लोग रोज स्क्रीनशॉट भेजकर 30% से 35% तक मासिक मुनाफे का दावा कर रहे थे। ‘ALUA’ एप डाउनलोड कराया, परफॉर्मेंस के नाम पर बदला ग्रुप बाकी लोगों का प्रॉफिट देखकर सुमित ने भी ठगों के बताए ‘ALUA’ नामक एक ट्रेडिंग एप्लीकेशन को मोबाइल में इंस्टॉल कर लिया और शुरुआत में ₹50,000 निवेश किए। इसके बाद ठगों ने ‘अच्छे परफॉर्मेंस’ का झांसा देकर उन्हें एक दूसरे ग्रुप ’28- स्पेशल ट्रेनिंग टीम ए’ में शिफ्ट कर दिया। इस ग्रुप का एडमिन पीयूष शर्मा और उसकी असिस्टेंट जीनल पटेल थी, जो सुमित से व्हाट्सएप चैट के जरिए निवेश की डील्स तय करते थे। भारतीय सेना के जवान से ठगी… 300% रिटर्न वाले IPO का लालच दिया जालसाजों ने सुमित को फाइनेंशियल फ्रीडम का सपना दिखाया। इसी बीच ग्रुप में एक ऐसे IPO के बारे में बताया गया, जो 300% का रिटर्न देने वाला था। सुमित ने जब इस पर अप्लाई किया, तो ठगों ने गेम खेलते हुए उन्हें ‘ओवर अलॉटमेंट’ (जितना अप्लाई किया, उससे कई गुना ज्यादा अलॉटमेंट) दिखा दिया। पैसे निकालने के नाम पर फंसाया पेंच जब सुमित ने अलॉटमेंट मिलने के बाद प्रॉफिट निकालना चाहा, तो ठगों ने शर्त रख दी कि ‘जब तक आप अलॉटमेंट की पूरी भारी-भरकम राशि जमा नहीं करते, तब तक एक रुपया भी विड्रॉ नहीं होगा।’ झांसे में आकर जवान ने बैंकों से और ज्यादा लोन उठाया और पैसे ट्रांसफर कर दिए। 10 ट्रांजैक्शन में ऐंठे ₹15.88 लाख, फिर सारे नंबर हुए बंद पीड़ित जवान ने एसबीआई (SBI) के अपने दो खातों से ठगों द्वारा दिए गए YES बैंक, कैनरा बैंक, एसबीआई और सेंट्रल बैंक के विभिन्न फर्जी खातों में 15 मार्च से 26 मार्च के बीच ₹50,000 से लेकर ₹4,70,000 तक की रकम ट्रांसफर की। जब 4 दिनों तक पैसा विड्रॉ नहीं हुआ और आरोपियों के सभी मोबाइल नंबर स्विच ऑफ आने लगे, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। स्पेशल रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी मामले की जांच कर रहे एएसआई (ASI) नरेंद्र कुमार ने बताया कि परिवादी के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। अपराध की गंभीरता को देखते हुए केस दर्ज कर स्पेशल रिपोर्ट मेल के जरिए उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। जल्द ही इसकी कॉपी इलाका मजिस्ट्रेट को भेजी जाएगी और बैंक खातों व मोबाइल नंबर्स को ट्रैक कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।