भागलपुर में अतिक्रमण हटाने पहुंची जिला प्रशासन की टीम पर कल हमला हुआ था। इस घटना का वीडियो सामने आया है। मामला कहलगांव अनुमंडल अंतर्गत सिया पंचायत स्थित बरैनी पोखर का है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में बरैनी पोखर को अतिक्रमण मुक्त कराने और उसके जीर्णोद्धार का काम चल रहा था। इसी दौरान वहां मौजूद लोगों की भीड़ अचानक उग्र हो गई और प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ ने सरकारी काम में बाधा डालते हुए हंगामा शुरू कर दिया। वीडियो में आक्रोशित लोग मुखिया पति को दौड़ा-दौड़ा कर पीटते नजर आ रहे हैं। वहीं, जेसीबी ड्राइवर के साथ भी मारपीट की गई। घटना में मुखिया पति गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके सिर से खून बहने लगा। उग्र भीड़ ने कार्यपालक दंडाधिकारी के सरकारी गाड़ी का शीशा भी तोड़ दिया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कुछ महिलाओं ने भी लाठी-डंडे के साथ आक्रामक व्यवहार कियाऔर अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की करने का प्रयास किया गया। स्थिति बिगड़ने के बाद मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया, जिसके बाद हालात पर काबू पाया जा सका। जानिए क्या है पूरा मामला दरअसल, एक सरकारी पोखर को भरकर ग्रामीणों ने बच्चों के खेलने के लिए मैदान बनाया था। मत्स्य विभाग की तरफ से पोखर निर्माण कर उसमें मछली पालन करने का निर्णय लिया गया था। जिनके खनन के लिए कल टीम पहुंची थी। लेकिन, ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। सूचना के बाद पुलिस टीम पहुंची। घटना की सूचना मिलते ही अनुमंडल पदाधिकारी, एसडीपीओ-1, एसडीपीओ-2 समेत अनुमंडल के विभिन्न थानों की पुलिस बल मौके पर पहुंची। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया। पुलिस पर लाठी चलाने का आरोप प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विरोध कर रहे ग्रामीणों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठी भी चलाई। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाओं के साथ भी मारपीट की गई। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जिला प्रशासन के अनुसार बरैनी पोखर मत्स्य विभाग की भूमि है और बिहार सरकार के सात निश्चय अभियान पार्ट-वन के तहत इसके पुनर्जीवन और जीर्णोद्धार की योजना चल रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी जल निकायों को उनके पुराने स्वरूप में बनाए रखने और अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। इसी के तहत मत्स्य विभाग की ओर से ग्राम पंचायत को एनओसी दिए जाने के बाद प्रशासनिक निगरानी में पोखर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने और खुदाई का काम कराया जा रहा था। प्रशासन के अनुसार मुखिया की ओर से जेसीबी मशीन के माध्यम से मिट्टी खुदाई का काम चल रहा था, तभी कुछ प्रभावशाली लोगों की ओर से पहले से जुटाई गई भीड़ ने विरोध शुरू कर दिया। वीडियो फुटेज में कुछ लोग “मारो इसको” कहकर भीड़ को उकसाते नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने इसे मॉब लिंचिंग जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश बताया है। पुलिस ने 28 लोगों को किया अरेस्ट घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में 28 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पूरे इलाके में फ्लैग मार्च निकालकर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी काम में बाधा डालने, लोक सेवकों पर हमला करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है।