साइबर फ्रॉड ने रिटायर्ड बैंक अधिकारी अमरेंद्र कुमार सिन्हा से 97.06 लाख की ठगी कर ली। उन्होंने फेसबुक पर वेपलोग नाम के एड पर क्लिक किया तो साक्षी अग्रवाल नाम की युवती से बात हुई। उसने खुद को मुंबई की वीवी कंस्ट्रक्शन की सीईओ बताया। दोनों के बीच वीडियो कॉल और वाट्सएप चैट से बातचीत होने लगी। फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए साक्षी ने उन्हें जाल में फंसाया और धीरे-धीरे उनसे निवेश करा लिया। इस कंपनी का पता खोजा सोसाइटी, वैशाली नगर, जोगेश्वरी, वेस्ट मुंबई है। इतनी मोटी रकम निवेश करने के बाद उन्हें केवल 1978 रुपए मिले। अमरेंद्र पुनाईचक में रहते हैं। वे पूर्णिया स्थित एसबीआई की होम लोन ब्रांच के मुख्य प्रबंधक पद से 30 अगस्त 2024 को रिटायर हुए। उन्होंने साइबर थाने में केस दर्ज कराया है। डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि मामले की छानबीन की जा रही है। इमोशनल और टेक्निकल ब्लैकमेलिंग कमीशन के नाम पर 45 लाख : साक्षी ने पॉलीअस फाइनेंस पिक प्लेटफार्म में निवेश करने को कहा। अमरेंद्र ने 43 हजार निवेश किया। इसके बाद 1978 रुपए की निकासी करा भरोसा बढ़ाया। एसेट्स वैल्यू 3.50 लाख तक पहुंच गई। अमरेंद्र ने 1 लाख की निकासी का प्रयास किया तो 45 लाख रुपए एक्सचेंज एंड कमीशन के तौर पर जमा करवाए। ऑडिट के नाम पर 5.33 लाख : इसके बाद ऑडिट के लिए 5.33 लाख जमा करने को कहा तो जमा कर दिया। मां की बीमारी का झांसा : साक्षी ने कहा कि मां बीमार है। डॉक्टर को डॉलर में भुगतान करना है। अमरेंद्र ने डॉलर में कन्वर्ट करके 1 लाख रुपए दे दिए। सिक्योरिटी डिपॉजिट का खेल : कंपनी ने कहा-करीब 95 लाख सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर जमा करने होंगे, तभी टोटल एसेट्स की निकासी होगी। साक्षी ने खुद 95 लाख की व्यवस्था कर जमा कर निकासी का भरोसा दिया। लेकिन कहा कि 5 लाख की कमी हो रही है। इस पर अमरेंद्र ने 5 लाख रुपए जमा कर दिए। पेनाल्टी और फ्रीज का डर इसके बाद साक्षी ने अमरेंद्र को कहा कि स्टाफ सैलरी के तौर पर 1.20 लाख जमा कर दें। परेशान अमरेंद्र ने इतनी रकम खाते में डाल दी। इसी बीच अक्टूबर 2025 के उसके खाते बंद कर दिए गए। बंद खाते से रोक हटाने के लिए साक्षी ने दिल्ली जाने का हवाला देकर भाड़े के तौर पर 30 हजार मदद के तौर पर अमरेंद्र से लिये।