लुधियाना में NRI महिला मर्डर केस में बड़ा खुलासा:पूर्व SHO-मुंशी के खिलाफ FIR, सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप; मृतक व्यक्ति के बयान किए दर्ज

लुधियाना के चर्चित NRI महिला हत्या मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है। डेहलों थाना पुलिस ने तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर सुखजिंदर सिंह और थाना मुंशी हेड कांस्टेबल संजीव कुमार के खिलाफ FIR दर्ज की है। दोनों पर हत्या मामले की जांच के दौरान सबूतों से छेड़छाड़, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। केस फाइल में कई गंभीर गड़बड़ियां मिली यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर की गई है, जब चल रही जांच के दौरान केस फाइल में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जिस समय यह हाई-प्रोफाइल मर्डर केस दर्ज हुआ था, उस समय इंस्पेक्टर सुखजिंदर सिंह डेहलों थाना के SHO थे और वही जांच की अगुआई कर रहे थे। 18 अगस्त 2025 को रुपिंदर के लापता होने की दी थी शिकायत मामला 72 वर्षीय NRI महिला रुपिंदर कौर के लापता होने और हत्या से जुड़ा है। शिमलापुरी निवासी रुपिंदर कौर अमेरिका में रहती थीं। 18 अगस्त 2025 को गांव किला रायपुर निवासी सुखजीत सिंह ने पुलिस को सूचना दी थी कि रुपिंदर कौर डिप्रेशन से परेशान थीं और कनाडा में शादी समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट जाने की बात कहकर घर से निकली थीं, जिसके बाद वह लापता हो गईं। जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया था कि गुप्त सूचना के आधार पर पता चला कि रुपिंदर कौर की हत्या सुखजीत सिंह के घर के स्टोर रूम में की गई। आरोप था कि हत्या के बाद शव को कमरे में ही जलाया गया, अवशेष दूसरी जगह फेंके गए, फर्श तोड़कर दोबारा बनवाया गया और घर में लगे CCTV कैमरे भी बदल दिए गए ताकि सबूत मिटाए जा सकें। पुलिस ने इस मामले में सुखजीत सिंह को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने कथित तौर पर खुलासा किया था कि उसने UK में रहने वाले NRI चरणजीत सिंह के कहने पर हत्या की और इसके बदले उसे 50 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। इसके बाद पुलिस ने चरणजीत सिंह, उसके भाई मनवीर सिंह उर्फ मनी पहलवान और एक अन्य आरोपी दानिश उर्फ दिनेश कुमार को भी केस में नामजद किया। जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर जली हुई हड्डियां, iPhone के अवशेष, फर्श तोड़ने में इस्तेमाल हथौड़ा और वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद की थी। इसके अलावा रुपिंदर कौर के कुछ वॉयस नोट, चैट और स्क्रीनशॉट भी मिले थे, जिनमें उन्होंने अपनी जान को खतरा बताते हुए आरोपियों पर बड़ी रकम हड़पने के आरोप लगाए थे। मनवीर ने हाईकोर्ट में किया अग्रिम जमानत दौरान दावा-पुलिस ने फर्जी बयान किए दर्ज केस में नया मोड़ तब आया जब आरोपी मनवीर सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए दावा किया कि केस फाइल में शामिल एक गवाह का बयान फर्जी है। याचिका में कहा गया कि गुरप्रीत सिंह नामक व्यक्ति का बयान 19 सितंबर 2025 को दर्ज दिखाया गया, जबकि उसकी मौत 29 मई 2025 को ही हो चुकी थी। फर्जी बयान पर SHO के नहीं थे असली हस्ताक्षर इस खुलासे के बाद गठित SIT ने केस फाइल की जांच की। जांच में पाया गया कि विवादित बयान पर SHO सुखजिंदर सिंह के असली हस्ताक्षर नहीं थे। बाद में पूर्व SHO ने लिखित सफाई देते हुए कहा कि बयान पर किए गए हस्ताक्षर फर्जी हैं और 4 अक्टूबर 2025 को उनके तबादले के बाद केस फाइल थाना रीडर हेड कांस्टेबल संजीव कुमार के पास थी। SIT जांच में एक और संदिग्ध बयान सामने आया, जिस पर भी कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर पाए गए। रिकॉर्ड की जांच के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि हत्या मामले की जांच में सरकारी दस्तावेजों और सबूतों के साथ छेड़छाड़ के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिले हैं। इसके बाद डेहलों थाना पुलिस ने इंस्पेक्टर सुखजिंदर सिंह और हेड कांस्टेबल संजीव कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 228, 229, 336(1) और 340(2) के तहत नया मामला दर्ज किया है। दोनों पर फर्जी साक्ष्य तैयार करने, झूठे दस्तावेज बनाने और जाली रिकॉर्ड का इस्तेमाल करने के आरोप हैं।

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