सम्राट सरकार ने राजस्व विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल को हटा दिया है। विजय सिन्हा इस विभाग के ही मंत्री रहे हैं। विजय सिन्हा के मंत्री रहते 200 से ज्यादा कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था, जिसे सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री बनते ही निलंबन वापस ले लिया था। उन्हें काम पर लौटने को कहा गया था। सीके अनिल को अगले आदेश तक बिहार राज्य योजना परिषद में परामर्शी के पद पर भेजा गया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। इस फेरबदल को राजस्व अधिकारियों और अंचल अधिकारियों की चल रही हड़ताल से जोड़कर देखा जा रहा है। सीके अनिल का काम जय सिंह देखेंगे 1991 बैच के आईएएस अधिकारी सीके अनिल बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पूर्व प्रधान सचिव थे। जिन्हें अप्रैल 2026 में प्रशासनिक फेरबदल के तहत विभाग से हटाकर बिहार राज्य योजना परिषद में परामर्शी नियुक्त किया गया है। उनके स्थान पर आईएएस अधिकारी जय सिंह को राजस्व विभाग का प्रभार सौंपा गया है। हड़ताल के बीच बड़ा फैसला राजस्व अधिकारियों और अंचल अधिकारियों की हड़ताल के बीच प्रधान सचिव सीके अनिल को हटाने का निर्णय सरकार की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। माना जा रहा है कि विभाग में चल रहे गतिरोध और प्रशासनिक दबाव के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। काफी लंबे समय से उन्हें हटाने की मांग भी चल रही है। राजस्व कर्मचारियों ने की थी सीके अनिक को हटाने की मांग लंबे समय से हड़ताल कर रहे राजस्वकर्मियों ने आईएएस अधिकारी सीके अनिल के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज करते हुए कार्रवाई की मांग उठाई थी। राजस्वकर्मियों का कहना था कि सीके अनिल का व्यवहार कर्मचारियों के प्रति कठोर और असहयोगात्मक है। कामकाज के दौरान अनुचित दबाव और अपमानजनक रवैया अपनाया जा रहा है। सीके अनिल को उनके पद से हटाया जाए। कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। हड़ताली कर्मचारियों का आरोप था कि लगातार दबाव और सख्ती के कारण काम करना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना था कि प्रशासनिक सख्ती के नाम पर कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की अनदेखी की जा रही है। कई जिला बंदोबस्त पदाधिकारियों का तबादला सीके अनिल के साथ बिहार प्रशासनिक सेवा के कई अधिकारियों का भी ट्रांसफर किया गया है। जारी अधिसूचना के अनुसार कई जिलों में नए जिला बंदोबस्त पदाधिकारी तैनात किए गए हैं। औरंगाबाद, जहानाबाद, बेगूसराय, सुपौल, वैशाली, पूर्णिया, जमुई और सारण में नए बंदोबस्त पदाधिकारियों की पोस्टिंग की गई है। नए आदेश के तहत, पुरुषोत्तम को औरंगाबाद,किरण सिंह को जहानाबाद, गुलशन ऐन को बेगूसराय, बुद्ध प्रकाश को सुपौल, पायल प्रिया को वैशाली, विनोद कुमार तिवारी को पूर्णिया, संजय कुमार राय को जमुई, अखिलेश कुमार को सारण भेजा गया है। अपर सचिव ने निलंबन रद्द करने का लेटर जारी किया था राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव महेंद्र पाल ने सभी जिलों के DM को लेटर लिखा था। साथ ही 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच सस्पेंड कर्मचारियों को बहाल करने के निर्देश दिए थे। दरअसल, अपनी मांगों को लेकर पूरे बिहार के राजस्व कर्मतारी हड़ताल पर चले गए थे। अब जानिए सरकार के लेटर में क्या था 17 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को प्रधान सचिव की अध्यक्षता में राजस्व कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इस बैठक में तय किया गया कि 11 फरवरी 2026 से हड़ताल/सामूहिक अवकाश पर गए कर्मचारियों की इस अवधि को नियमित माना जाएगा।पहले निर्णय था कि इस अवधि के लिए असाधारण अवकाश (Extra Ordinary Leave) दिया जाएगा, लेकिन अब इसे बदलते हुए फैसला लिया गया है कि कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश (Earned Leave) दिया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी के पास अवकाश शेष नहीं है, तो उसे अग्रिम उपार्जित अवकाश दिया जाएगा। साथ ही, सभी संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि जो कर्मचारी वापस काम पर लौट आए हैं, उनके मामले में इन नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। अब जानिए पूरा मामला क्या है 47 CO भी किए गए थे सस्पेंड पूर्व राजस्व मंत्री विजय सिन्हा ने 224 राजस्व कर्मचारियों के साथ 47 अंचल अधिकारियों (CO) को भी सस्पेंड किया था। सरकारी आदेश के अनुसार, सस्पेंडेड अधिकारियों पर कई आरोप लगाए गए थे, जिनमें सरकारी कार्यक्रमों में भाग नहीं लेना, सीनियर अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी करना और प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही बरतना शामिल था। अधिसूचना में यह भी कहा गया था कि इन अधिकारियों के कारण राजस्व संग्रह के तय लक्ष्य पूरे नहीं हो सके। कई स्थानों पर लक्ष्य के मुकाबले काफी कम राजस्व वसूली हुई, जिससे राज्य के फाइनेंशियल मैनेजमेंट पर असर पड़ा। इसके अलावा अतिक्रमण हटाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी लापरवाही बरती गई, जिसे न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन माना गया। राष्ट्रीय कार्यों में परेशानी डालने का आरोप सरकार ने यह भी कहा कि कुछ अधिकारियों ने राष्ट्रीय महत्व के कार्यों, जैसे जनगणना-2027 की तैयारियों में भी बाधा डालने का प्रयास किया। इस तरह की हरकत सरकारी सेवा नियमों के खिलाफ है। सरकार ने इसे गंभीर अनुशासनहीन माना। इन सभी मामलों को बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के उल्लंघन के रूप में देखा गया है, जिसमें कर्तव्य के प्रति पूर्ण निष्ठा बनाए रखना जरूरी है। इसी आधार पर अधिकारियों को बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहतसस्पेंड किया गया है। डिपार्टमेंटल प्रोसिडिंग भी चालू सस्पेंशन अवधि के दौरान सभी अधिकारियों का मुख्यालय संबंधित प्रमंडल के आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) दिया जाएगा। साथ ही विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी अलग से की जाएगी। 9 मार्च से हड़ताल पर हैं CO बता दें कि 9 मार्च से करीब 1100 राजस्व अधिकारी और 11 फरवरी से 3500 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसके चलते 537 अंचलों में काम बंद है। रोज 5,500 म्यूटेशन और 10,000 परिमार्जन के आवेदन पेंडिंग हो रहे हैं। 40 लाख से ज्यादा मामले लटक गए हैं।