‘अगर एक रुपए की भी गड़बड़ी साबित हुई तो मैं राजनीति छोड़कर मंदिर चला जाउंगा।’ यह कहना है सम्राट सरकार में शिक्षा मंत्री बने मिथिलेश तिवारी का। 7 मई को मंत्री बने तिवारी लाखों रुपए के पुराने घोटाले के आरोपों में घीर गए हैं। भास्कर ने उनसे घोटाले के आरोपों से लेकर बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर बातचीत की। पढ़िए, उनका पूरा जवाब…। सवाल: नई सरकार बनते ही TRE-4 की तैयारी कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज कर दिया गया? जवाब: यह मेरे लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण रहा। मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं थी कि वे उस दिन प्रदर्शन करने वाले थे। मैं अपने कार्यालय कक्ष में काम संभाल रहा था, तभी मीडिया के जरिए पता चला कि TRE-4 के अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज हुआ है। मैंने तुरंत पुलिस के सीनियर अफसरों से बात की। सवाल: टीचर बहाली के लिए कब से आवेदन लिए जाएंगे? कई युवाओं को जेल भी जाना पड़ा है? जवाब: इसकी पूरी तैयारी विभाग में चल रही है। बहुत जल्द इसके सुखद परिणाम सामने आएंगे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस मुद्दे पर बेहद संवेदनशील हैं। उन्होंने मुझे और ACS को बुलाकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। हम तेजी से वर्कआउट कर रहे हैं। आप देखेंगे, जल्द अच्छे परिणाम सामने आएंगे। सवाल: शिक्षा मंत्री बनते ही पुराने मामले में घिर गए। 50 लाख रुपए के गबन का आरोप है। निगरानी में सुनवाई चल रही है? जवाब: 2014 का मामला है। अब तक निगरानी ने हमसे पूछताछ तक नहीं की, एक नोटिस भी नहीं भेजा। हम एक कॉलेज के चेयरमैन थे। जांच हुई और कोई अनियमितता नहीं पाई गई। पैसा शिक्षकों के खाते में जाता था, प्रिंसिपल और सेक्रेटरी के दस्तखत होते थे। चेयरमैन की भूमिका कहां आ गई? मैं सिर्फ एक बैठक में गया था। सवाल: लेकिन केस में तारीख दर तारीख चल रही है? जवाब: निचली अदालत में तारीख चल रही थी। जब मैं लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ रहा था, तब इसे राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया गया। चुनाव जीतने के बाद मैं कोर्ट गया हूं। सवाल: लोग मेवालाल चौधरी को याद कर रहे हैं कि उन्हें कैसे शिक्षा मंत्री पद छोड़ना पड़ा? जवाब: मैं मेवालाल चौधरी नहीं, मिथिलेश तिवारी हूं। जिस दिन मिथिलेश तिवारी पर एक रुपए की अनियमितता भी साबित हो जाएगी, उसी दिन मैं राजनीति छोड़कर मंदिर चला जाऊंगा। मेरे विरोधी अगर मुझे दोषी ठहराना चाहते हैं तो कोर्ट-कचहरी में लड़ें। झूठी खबरें फैलाकर इमेज खराब करने वाले लोग ऐसा कर रहे हैं। जिसने 2014 में यह केस करवाया, वह 2025 में मेरे खिलाफ 15 हजार वोट से हार गया। जनता सब जानती है। झूठ की खेती ज्यादा दिन नहीं चलती। सवाल: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आप पर हमलावर हैं? जवाब: मैंने ‘एजिटेशन’ कहा और तेजस्वी यादव ने उसे ‘एजुकेशन’ समझ लिया। मैं शिक्षा मंत्री हूं, तो उनकी मैट्रिक तक की पढ़ाई सुनिश्चित कराने की जवाबदेही भी मेरी है। सवाल: आप खुद पढ़ाएंगे तेजस्वी यादव को? जवाब: तेजस्वी जी, आप बिहार सरकार के किसी भी विद्यालय में एडमिशन ले लीजिए। एक साल तक मैं खुद टीचर बनकर आपको पढ़ाऊंगा, ताकि ‘एजिटेशन’ और ‘एजुकेशन’ में फर्क साफ समझ आ जाए और बिहार बदनाम होने से बच जाए। सवाल: बिहार में स्कूली शिक्षा पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसको लेकर आपके पास क्या ठोस रोडमैप है? जवाब: रोडमैप तो बहुत सारे हैं। आप जानते हैं लालू प्रसाद के समय बिहार की शिक्षा की क्या हालत थी। नीतीश कुमार जी ने शिक्षा की गुणवत्ता को काफी आगे बढ़ाया। आज बिहार में IIM, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक, आईटीआई हर तरह के संस्थान खुल गए हैं। अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में इसे और आगे ले जाना है। मुख्यमंत्री ने हमें स्पष्ट टास्क दिया है और हम उसे पूरा करने में जुटे हुए हैं। सवाल: शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा अन्य कार्यों में भी लगा दिया जाता है। अभी जनगणना का काम सौंपा गया है। दोनों काम कैसे संभव हैं? जवाब: हां, मुझे भी यह सही नहीं लग रहा है। स्कूल की टाइमिंग सुबह 6:30 बजे से है, उससे पहले जनगणना का काम नहीं हो सकता। इसमें निर्देश जारी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए थी। जिस ACS (बी. राजेन्दर) ने चिट्ठी निकाली थी, वे अब दूसरे विभाग में चले गए हैं। अब हम नए ACS से बात करके जल्द समाधान निकालेंगे। सवाल: शिक्षा विभाग के पत्रों की भाषा अक्सर अजीब होती है। एक ही काम पर ACS का अलग पत्र और डीईओ का अलग। ऐसी स्थिति खत्म होगी? जवाब: इस बार पूरी तरह से लगाम लगेगी। मेरा मकसद शिक्षा विभाग को सहज, सुलभ और फास्ट रिजल्ट देने वाला विभाग बनाना है। गांव में भुंजा बेच रहा आम आदमी अगर सर्टिफिकेट नहीं पा रहा तो जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। 2017-18 के पास आउट स्टूडेंट्स का प्रमाणपत्र अभी तक लंबित है। मैंने बिहार विद्यालय शिक्षा समिति के चेयरमैन आनंद किशोर को बुलाकर साफ कहा है- ग्रिवांस जीरो होना चाहिए। 25 मई से पहले हम ऐसा ऑनलाइन सिस्टम लागू करेंगे जिसमें गांव से ही अप्लाई करने पर यूनिक आईडी मिले और प्रमाणपत्र आसानी से मिल हो सके। सवाल: कई शिक्षकों का आवेदन विभाग में पड़ा है। जरूरतमंद शिक्षिकाओं के ट्रांसफर अटके हुए हैं? जवाब: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नारी शक्ति वंदन अभियान है। अगर महिला शिक्षिकाएं परेशान रहेंगी तो बच्चों को अच्छी शिक्षा कैसे दे पाएंगी? हम जल्द प्रभावी नीति ला रहे हैं ताकि उन्हें सबसे नजदीकी विद्यालय में पोस्टिंग मिल सके। सवाल: पटना के स्कूलों में भी नया सत्र शुरू हो गया, लेकिन कई बच्चों को किताबें अभी तक नहीं मिली हैं? जवाब: मैंने बिहार स्टेट टेक्स बुक कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को बुलाया था। हमें बताया गया कि सारी किताबें ग्राउंड जीरो तक पहुंचा दी गई हैं। फिर भी शिकायतें आ रही हैं। मैंने कंप्लायंस रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कहां-कहां किताबें नहीं पहुंचीं और तुरंत एक्शन लेंगे। सवाल: विशिष्ट शिक्षकों का एरियर बकाया है? जवाब: सब देखा जाएगा। एरियर एक नियमित प्रक्रिया है। हम इसके लिए नीति बनाकर अधिकारियों को जिम्मेदारी देंगे। इस महीने सचिवालय में सिंगल विंडो सिस्टम लागू कर रहे हैं। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, इंटर काउंसिल और पूरे विभाग में इसे लागू करेंगे। हमारी कोशिश है कि शिक्षा विभाग बिहार के हर घर में खुशहाली लाए। सवाल: मुख्यमंत्री ने कहा है कि सरकारी स्कूल ऐसे बनाएंगे कि नेताओं-अफसरों के बच्चे एडमिशन के लिए तरसें। यह कैसे होगा? जवाब: मुख्यमंत्री ने बहुत बड़ी पहल की है। उन्होंने संकल्प लिया है। अब इसे सिद्धि तक पहुंचाना है। जब स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतरीन होगा, क्वालिटी टीचर्स होंगे और माहौल अनुकूल होगा, तभी यह संभव होगा। मुख्यमंत्री ने मॉडल स्कूल बनाने का निर्देश दिया है। अगले कुछ महीनों में इसे धरातल पर उतारेंगे। लोग अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में एडमिशन दिलाने के लिए लालायित रहेंगे। सवाल: छुट्टियों में एकरूपता नहीं है। कहीं रविवार छुट्टी, कहीं शुक्रवार। शनिवार को हाफ डे को फुल डे बना दिया गया। जवाब: इस पर चर्चा चल रही है। कैबिनेट बैठक में भी बात हुई है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री को लेना है। सम्राट सरकार की स्पष्ट नीति जल्द आपके सामने होगी। सवाल: सिलेबस को अपग्रेड करेंगे? जवाब: जो करेंगे, वह आपको जरूर बताएंगे। लेकिन पहले कर तो लें। सवाल: बच्चों के स्कूल बैग का वजन बढ़ रहा है? जवाब: अब स्मार्ट वर्किंग का जमाना है, हार्ड वर्किंग का नहीं। मुगल का जमाना नहीं, गूगल का जमाना है। हम मुगल की जगह गूगल पर भी पूरा ध्यान देंगे।