सिरसा जिले की ABPO नीरू रानी के बर्खास्त करने एवं सेवाएं रेगूलर न करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कोर्ट के स्थगन आदेश का पालन न करने पर जिला प्रशासन के तीन अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने सिरसा डीसी, सीईओ तथा बीडीपीओ डबवाली को नोटिस जारी कर तलब किया है। 29 मई को सभी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने को कहा है। याचिकाकर्ता नीरू के अनुसार, वह डबवाली में एबीपीओ के पद पर कांट्रेक्ट तौर पर कार्यरत है। मनरेगा से जुड़े जांच मामले में नीरू रानी को सितंबर माह में बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद वे हाईकोर्ट चली गई और 19 सितंबर को स्टे के ऑर्डर जारी हो गए। प्रशासन की ओर से उसे जॉइन करवा दिया। मगर उनकी सेवाएं आगे निरंतर जारी नहीं रखी गई। तब तक मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था और अंतिम फैसला नहीं आया। सेवाएं निरंतर जारी न रखने पर नोटिस प्रशासन द्वारा सेवाएं निरंतर जारी न रखने पर अब यह नोटिस जारी हुए हैं। जवाब मांगा कि जब 20 अप्रैल 2026 को भी स्टे जारी था, फिर अनुबंध क्यों नहीं बढ़ाया। नीरू रानी ने दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में बताया, उनका अनुबंध का समय एक सितंबर तक का है। जब होई कोर्ट में सुनवाई की तारीख मिलती रही, तब तक प्रशासन ने सेवाएं निरंतर की। मगर बाद में सेवाएं निरंतर नहीं की और नौकरी से निकाल दिया। वहीं, सीईओ अर्पिल संगल का कहना है कि अभी इस मामले में जल्द जानकारी दी जाएगी। यहां जानिए पूरा मामला एक सितंबर को किया था बर्खास्त याचिकाकर्ता नीरू रानी के अनुसार, एबीपीओ पद पर रहते नीरू रानी को 01 सितंबर 2025 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके विरुद्ध दायर याचिका CWP-27827-2025 में हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2025 को अंतरिम स्थगन आदेश पारित किया था। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि याचिकाकर्ता को सेवा से मुक्त कर दिया है, तो उसे तत्काल वापस लिया जाए तथा 19 सितंबर 2025 से ड्यूटी जॉइन करने दी जाए। कोर्ट के उक्त आदेश की अनुपालना में याचिकाकर्ता को 19 सितंबर 2025 को पुनः कार्यभार ग्रहण करवा दिया गया था। इसके पश्चात 11 दिसंबर 2025 को हुई अगली सुनवाई के बाद भी विभाग द्वारा एक्सटेंशन लेटर जारी कर याचिकाकर्ता को सेवा में बनाए रखा गया। डयूटी जॉइन नहीं करने दी 20 अप्रैल 2026 को हुई सुनवाई में भी कोर्ट द्वारा अंतरिम स्थगन आदेश को जारी रखा गया था। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कर्मवीर सिंह बनियाणा ने अवमानना याचिका CM-8559-CWP-2026 में कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद प्रतिवादी अधिकारियों ने न तो याचिकाकर्ता का अनुबंध बढ़ाने के लिए एक्सटेंशन लेटर जारी किया और न ही उसे ड्यूटी जॉइन करने दी। इसी आधार पर अवमानना याचिका दाखिल की गई थी। अर्जेंट लिस्ट में होगी मामले की सुनवाई जस्टिस मौदगिल ने अपने 26 मई के आदेश में दर्ज किया कि “इस कोर्ट का इरादा स्पष्ट था”। उन्होंने तीनों अधिकारियों – DC सिरसा, CEO-cum-DPC एवं BDPO डबवाली – को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ भारत के संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत अवमानना की कार्रवाई आरंभ की जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि तीनों अधिकारी 29 मई को स्पष्ट निर्देशों एवं स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित हो कि 18.09.2025 के अंतरिम आदेश, जो 20.04.2026 को भी प्रभावी था, का उल्लंघन क्यों किया गया तथा याचिकाकर्ता को सेवा में बने रहने की अनुमति क्यों नहीं दी गई। मामले की सुनवाई “अर्जेंट लिस्ट” में की जाएगी। अनुबंध न बढ़ाना अवहेलना याचिकाकर्ता के अनुसार, यह आदेश स्पष्ट करता है कि एक बार कोर्ट द्वारा स्थगन आदेश पारित होने के बाद प्रत्येक सुनवाई में उसके जारी रहने तक उसकी निरंतर अनुपालना अनिवार्य है। 19.09.2025 एवं 11.12.2025 को आदेश का पालन करने तथा 20.04.2026 को भी स्टे जारी रहने के बावजूद अनुबंध न बढ़ाना कोर्ट की दृष्टि में गंभीर अवहेलना है। अवमानना सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारियों को कारावास या आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।