हरियाणा में आज बंद रहेंगे 20 हजार मेडिकल स्टोर:ऑनलाइन दवा बिक्री, ई- फार्मेंसी का विरोध, सिर्फ इमरजेंसी मरीजों को मिलेगी दवा

ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में बुधवार को हरियाणा के करीब 20 हजार मेडिकल स्टोर 24 घंटे के लिए बंद रहेंगे। यह बंद रात 12 बजे से शुरू होकर बुधवार रात 12 बजे तक जारी रहेगा। हालांकि, गंभीर मरीजों को दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनी रहेगी और अस्पतालों के अंदर संचालित केमिस्ट शॉप, जनऔषधि केंद्र तथा मेडिकल चेन स्टोर खुले रहेंगे। इस हड़ताल से कुछ केमिस्ट एसोसिएशनों ने दूरी बना ली है। पंचकूला में सभी दवा दुकानें सामान्य रूप से खुली रहेंगी। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मरीजों को दवाओं की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी। ड्रग कंट्रोलर ने जारी की अपील हरियाणा के ड्रग कंट्रोलर सिपुन मेहला ने बताया कि अस्पतालों के भीतर बनी केमिस्ट शॉप, प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र और मेडिकल फार्मेसी चेन की दुकानें खुली रहेंगी। उन्होंने केमिस्ट एसोसिएशनों से अपील की है कि गंभीर और आपातकालीन मरीजों को दवा देने से इनकार न किया जाए। ऑनलाइन दवा बिक्री पर उठाए सवाल हरियाणा स्टेट ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष मनजीत शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियों के पास आवश्यक लाइसेंस हैं या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अनियंत्रित ऑनलाइन बिक्री के कारण पारंपरिक मेडिकल स्टोर संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। मार्जिन में भारी अंतर एसोसिएशन के अनुसार, दवा निर्माता कंपनियों के साथ समझौते के तहत मेडिकल स्टोर संचालकों को सामान्य तौर पर 18 से 20 प्रतिशत तक का मार्जिन मिलता है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 30 प्रतिशत तक की छूट देकर बाजार पर कब्जा कर रहे हैं। इससे छोटे और मध्यम स्तर के केमिस्टों के सामने कारोबार बचाए रखना चुनौती बन गया है। मरीजों को हो सकती है परेशानी हड़ताल के कारण सामान्य मरीजों को दवाएं खरीदने में कुछ दिक्कत आ सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्थानीय केमिस्ट दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। हालांकि सरकार और एसोसिएशन दोनों ने आपातकालीन और गंभीर मरीजों के लिए दवा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। सरकार और कारोबारियों के बीच टकराव यह हड़ताल पारंपरिक दवा विक्रेताओं और तेजी से बढ़ते ई-फार्मेसी कारोबार के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। केमिस्टों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जा सकता है।

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