हरियाणा में सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों के करीब 1500 टीचर पिछले दो माह से वेतन न मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। हरियाणा के लगभग 96 एडेड कॉलेजों में कार्यरत टीचर अब सरकार के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर वेतन भुगतान को ट्रेजरी प्रणाली के अधीन लाने की मांग उठाई है। एसोसिएशन के प्रधान डॉ. सुदीप कुमार ने कहा कि टीचर शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उन्हें ही समय पर वेतन नहीं मिल रहा। उन्होंने इसे “सभ्य समाज पर कलंक” बताते हुए कहा कि अब टीचर चुप नहीं बैठेंगे। शिक्षकों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर दो-तीन माह बाद वेतन भुगतान में देरी से टीचरों और उनके परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ट्रेजरी सिस्टम ही समाधान एडेड कॉलेजों के टीचरों का वेतन सीधे ट्रेजरी सिस्टम के जरिए जारी किया जाए, ताकि भुगतान तय समय पर हो सके। शिक्षकों का तर्क है कि राज्य के अन्य सरकारी कर्मचारियों को नियमित वेतन मिलता है, जबकि एडेड कॉलेजों के शिक्षकों को हर बार इंतजार करना पड़ता है। प्रदेश में एडेड कॉलेजों का मुद्दा पहले भी कई बार उठ चुका है। पिछले वर्ष भी करीब 96 एडेड कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों को तीन माह तक वेतन नहीं मिलने का मामला सामने आया था। परिवारों पर बढ़ा संकट वेतन अटकने से टीचरों के सामने घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की फीस, बैंक की किस्तें और रोजमर्रा के खर्च प्रभावित हो रहे हैं। कई टीचर कर्ज लेकर परिवार चला रहे हैं। इसका असर कॉलेजों की पढ़ाई और छात्रों के भविष्य पर भी पड़ने लगा है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो प्रदेशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को अब अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि स्थायी व्यवस्था लागू करनी होगी। क्या है ट्रेजरी सिस्टम ट्रेजरी प्रणाली के तहत कर्मचारियों का वेतन सीधे सरकारी खजाने से तय तारीख पर जारी होता है। टीचरों का मानना है कि इस व्यवस्था से वेतन भुगतान में पारदर्शिता और नियमितता आएगी। हरियाणा में उच्च शिक्षा व्यवस्था पहले ही टीचरों की कमी और रिक्त पदों की समस्या से जूझ रही है। हाल ही में RTI में खुलासा हुआ था कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में हजारों पद खाली पड़े हैं।