हिमाचल प्रदेश में नेशनल हाईवे-5 शिमला-ठियोग-नारकंडा की हालत गांव की पगडंडियों से भी बदतर हो गई है। खासकर छराबड़ा से फागू के बीच NH पर कई जगह एक से डेढ़ फीट गहरे गड्ढे बन चुके हैं। इससे वाहनों को नुकसान हो रहा है और हादसे भी हो रहे हैं। बीते गुरुवार को भी कुफरी के समीप ‘गलू’ में एक पिकअप गहरे गड्ढों से बचने के दौरान सड़क किनारे बनी ड्रेन में गिर गई। NH की ऐसी दुर्दशा के बावजूद न केंद्र और न ही राज्य सरकार इसकी सुध ले रही है। NH पर मैटलिंग का काम केंद्र सरकार करती है, जबकि इसके रखरखाव का दायित्व राज्य सरकार का है। राज्य के सबसे मशहूर पर्यटन स्थल कुफरी और नारकंडा को जोड़ने वाले इस हाईवे के खस्ताहाल होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 8 विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ता है NH-5, फिर भी खस्ताहाल शिमला-ठियोग-रामपुर NH पर कसुम्पटी, चौपाल, जुब्बल-कोटखाई, रोहड़ू, रामपुर, ठियोग, किन्नौर और आनी विधानसभा क्षेत्रों के सैकड़ों लोग रोजाना सफर करते हैं। इसी सड़क से लगभग 4000 करोड़ रुपये का सेब भी देश की विभिन्न मंडियों तक पहुंचता है। फिर भी इस सड़क की हालत पिछले दो साल से चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि, बीते साल मानसून के बाद NH पर पैचवर्क किया गया था, जो कि कई जगह पूरी तरह उखड़ चुका है। लंबे समय से मैटलिंग (टारिंग) नहीं होने से लोगों में रोष है। मैटलिंग नहीं होने के कारण साफ मौसम में धूल और बारिश में कीचड़ लोगों को परेशान कर रहा है। गर्भवती महिलाएं और मरीज परेशान बारिश में पानी से भरी सड़क पर वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है। बीमार व्यक्तियों और गर्भवती महिलाओं के लिए इस मार्ग से सफर करना बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है। गड्ढों से भरी सड़क पर स्पेयर पार्ट्स खराब हो रहे गड्ढों से भरी सड़क पर वाहन चालकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स बार-बार खराब या टूट रहे हैं, जिससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। चीफ इंजीनियर बोले- 10 मई से पहले पैचवर्क पूरा करेंगे चीफ इंजीनियर NH अजय कपूर ने बताया कि ढली से छराबड़ा तक पैचवर्क का काम पूरा कर दिया गया है। इससे आगे बारिश के कारण काम रोक दिया गया। विभाग ने 10 मई से पहले पैचवर्क कंप्लीट करने का टारगेट रखा है। उन्होंने बताया कि विभाग ने 86 करोड़ रुपए की डीपीआर भी तैयार करके केंद्र को भेज दी है। केंद्र से डीपीआर को सेक्शन मिलने के बाद मैटलिंग का काम भी होगा।