हरियाणा मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकारी कोठी का पीनल रेंट माफ करने का मामला चर्चा में तो आया। लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो सका है। इसकी अब असली वजह सामने आई है। दरअसल, जब सैनी मंत्रिमंडल की बैठक में ये मुद्दा चर्चा के लिए लाया गया तो इस दौरान 3 कैबिनेट मंत्रियों ने इस प्रस्ताव पर स्पष्ट आपत्ति दर्ज कर दी। जिसके चलते सीएम सैनी ने मामला फिलहाल टल दिया है। साल 2019 में कांग्रेस की ओर से भूपेंद्र हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष का पद मिला था। नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट रैंक का दर्जा होता है। ऐसे में उन्हें सेक्टर 7 में 70 नंबर कोठी अलॉट की गई थी। इस कोठी में पिछले 5 वर्षों से कांग्रेस की गतिविधियां संचालित हो रही थी। इससे पहले वर्ष 2014 से 2019 तक हुड्डा चंडीगढ़ के सेक्टर 3 स्थित MLA फ्लैट में रहते थे। यहां पढ़िए मीटिंग में क्या बोले मंत्री… एक साल के खर्च की डिटेल मांगी सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही पीनल रेंट माफी का मुद्दा उठाया गया, कुछ मंत्रियों ने कहा कि बिना पूरी वित्तीय जानकारी के इतनी बड़ी राशि माफ करना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि संबंधित विभाग से कोठी के रखरखाव पर हुए मेंटेनेंस, बिजली, पानी और मैनपावर सहित सभी खर्चों का विस्तृत ब्यौरा पहले लिया जाए। बताया जा रहा है कि मंत्रियों का तर्क था कि जब तक कुल बकाया और वास्तविक खर्च की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती, तब तक किसी भी तरह की राहत देने का निर्णय जल्दबाजी माना जाएगा। इसी कारण बैठक में इस विषय पर आगे चर्चा रोक दी गई और विभाग को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा को आवंटित सरकारी कोठी का करीब ₹16.49 लाख पेनल रेंट बकाया है। अगली कैबिनेट में फिर उठेगा मुद्दा एक कैबिनेट स्तर के मंत्री का कहना है कि अब संभावना जताई जा रही है कि संबंधित विभाग से पूरी जानकारी मिलने के बाद यह मुद्दा अगली कैबिनेट बैठक में फिर से उठाया जाएगा। राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले को लेकर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मामला पूर्व सीएम से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील माना जा रहा है। क्यों लगा हुड्डा पर पीनल रेंट नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर पीनल रेंट अगस्त 2024 से 2025 के अंत तक चंडीगढ़ के सेक्टर-7 स्थित सरकारी आवास में ओवरस्टे के कारण लगा है। जब हुड्डा के पास नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं था। अब उन्होंने इस पेनल रेंट माफ करने का सरकार से अनुरोध किया है। जिसके बाद सरकार की ओर से इसे माफ करने के लिए मंत्रिमंडल की बैठक में मुद्दा उठाया था। क्या हैं नियम नियमों के अनुसार नई सरकार बनने के बाद पूर्व सीएम हुड्डा को 15 दिन के भीतर यह कोठी नंबर 70 खाली करनी थी, मगर उन्होंने कोठी नहीं छोड़ी। हरियाणा में विधानसभा चुनाव का रिजल्ट 8 अक्टूबर 2024 को आया था। जिसमें भाजपा ने 90 में से 48 सीटें जीतकर सरकार बनाई। इसके बाद CM नायब सैनी और उनके मंत्रियों ने 17 अक्टूबर 2024 को शपथ ली थी। सरकार ने भूपेंद्र हुड्डा को दिसंबर 2024 में कोठी खाली करने कहा था। हुड्डा ने इसके लिए 15 दिन का टाइम मांगा था, लेकिन अब एक साल से ज्यादा समय हो चुका है। हालांकि अब हुड्डा नेता प्रतिपक्ष बन चुके हैं। इसलिए अब इस कोठी को नहीं खाली कराया जाएगा। 400 गुना तक पीनल रेंट वसूलने का प्रावधान हरियाणा लोक निर्माण विभाग के नियमानुसार सरकार के किसी भी मंत्री या विधायक को नई सरकार बनने के 15 दिन में सरकारी आवास खाली करना होता है। यदि वह तय समय पर नहीं खाली करता है तो उसके खिलाफ पीनल रेंट की कार्रवाई होती है। पहले महीने मकान खाली नहीं होने पर 50 गुना किराया वसूल किया जाता है। वहीं दूसरे महीने में 100 गुना और तीसरे महीने 200 गुना पीनल रेंट वसूला जाता है। इसके बाद भी कोई कोठी खाली नहीं करता है, तो फिर चौथे महीने से 400 गुना पीनल रेंट वसूल किया जाता है।