लुधियाना में सिविल अस्पताल में इलाज में देरी और डॉक्टर के कथित गलत व्यवहार से नाराज लोगों ने बीती रात इमरजेंसी के बाहर धरना दे दिया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए और व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। धरना दे रहे पार्षद अरुण शर्मा, लक्की कपूर और पूर्व पार्षद मंगतराय ने आरोप लगाया कि अस्पताल में मरीजों को टोकन देकर घंटों बैठा दिया जाता है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि उनका नंबर कब आएगा। उनका कहना है कि कई बार मरीजों को दोपहर में टोकन दिया जाता है और नंबर शाम या देर रात में आता है। सफाई सेवक लगाते मरीजों के टांकें प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इमरजेंसी में कई बार सफाई सेवक ही मरीजों को स्टिच (टांके) लगा देते हैं, जिससे अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उनका कहना है कि सरकार भले ही लोगों के लिए हेल्थ कार्ड जैसी योजनाएं बना रही है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का मरीजों के साथ व्यवहार ठीक नहीं है। एक्सीडेंट के बाद 3 घंटे कराया इंतजार पीड़ित गुरमीत सिंह ने बताया कि वह लोहारा में इलेक्ट्रॉनिक का काम करता है। उसे एक बाइक सवार ने टक्कर मार दी थी, जिसके बाद वह निजी डॉक्टर के पास गया। एक्स-रे करवाने पर हड्डी में फ्रैक्चर सामने आया। गुरमीत के मुताबिक वह शाम करीब 6 बजे सिविल अस्पताल इलाज के लिए पहुंचा, लेकिन इमरजेंसी में मौजूद महिला डॉक्टर ने उसे करीब तीन घंटे तक इंतजार करवाया। इस दौरान डॉक्टर कभी चाय पीने चली गईं तो कभी अपनी सीट से उठ जाती थीं। बाद में उनसे गलत व्यवहार किया गया, जिसके चलते लोगों को धरना देना पड़ा। शिकायत करने पर कहा- SMO से कह दो लक्की कपूर ने आरोप लगाया कि जब डॉक्टर को कहा गया कि मामले की शिकायत एसएमओ से करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि “जाओ, जो कहना है एसएमओ से कह दो।” हालांकि बाद में अस्पताल प्रशासन की ओर से सरकारी डॉक्टर अजय मौके पर पहुंचे और लोगों से बातचीत कर मामला शांत कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अस्पताल प्रशासन की ओर से सुधार का आश्वासन मिला है, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया। लोगों ने चेतावनी दी कि अगर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो फिर से धरना दिया जाएगा।