बैसाखी और खालसा साजना दिवस के पावन अवसर पर पाकिस्तान के ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए गया 1763 सिख श्रद्धालुओं का जत्था आज अटारी-वाघा सीमा के रास्ते भारत लौट रहा है। यह जत्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी एसजीपीसी के नेतृत्व में पाकिस्तान गया था, जिसमें पंजाब के विभिन्न जिलों से सैकड़ों श्रद्धालु शामिल थे। जत्थे के दोपहर के बाद लौटने की उम्मीद है। जत्थे ने पाकिस्तान में स्थित अन्य प्रमुख गुरुद्वारों के भी दर्शन किए, जहां से गुरु साहिबानों की पवित्र यादें जुड़ी हुई हैं। इस यात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सिख इतिहास और विरासत से जुड़ने का अवसर भी प्रदान किया। कुछ श्रद्धालुओं ने 1947 के विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने बुजुर्गों से गुरुद्वारों की कहानियां सुनीं थीं। अब खुद वहां जाकर माथा टेकने का अवसर मिलने पर वह खुश हैं। 10 अप्रैल को रवाना हुआ था जत्था जानकारी के अनुसार यह जत्था 10 अप्रैल को भारत से रवाना हुआ था और आज 19 अप्रैल को अपनी यात्रा पूरी कर वापस लौट रहा है। गौरतलब है कि पहले इस जत्थे का कार्यक्रम 12 अप्रैल को रवाना होकर 21 अप्रैल को वापस लौटने का तय किया गया था, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया।