डायबिटिक अल्सर-एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का इलाज होगा आसान:भाषा विश्वविद्यालय के शिक्षक के शोध से जगी उम्मीद, ट्रायल में मरीजों को जल्द मिली राहत

लखनऊ के ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के शिक्षक ने एक ऐसा ड्रेसिंग जेल तैयार किया है जिससे डायबिटिक अल्सर जैसे कई जटिल घावों को आसानी से भरा जा सकेगा। इसके साथ ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के इलाज में भी ये बहुत उपयोगी होगा। डुअल-फंक्शनल हाइड्रोजेल ड्रेसिंग से संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया को रोकने में प्रभावी हैं। ये शोध के जरिए इसे भाषा विश्वविद्यालय के प्रो.कुनाल ने BBAU और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPER) के सहयोग से तैयार किया है। ये हैं खूबी डॉ.कुनाल ने बताया कि आजकल एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस यानी एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम होता जा रहा है, जो एक गंभीर वैश्विक समस्या बन चुकी है। इसके कारण सामान्य संक्रमण भी खतरनाक रूप ले लेते हैं। खासकर संक्रमित घावों को ठीक करना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे समय में यह खास हाइड्रोजेल ड्रेसिंग नई उम्मीद साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि शुरुआती ट्रायल में मरीजों को इससे जल्दी रिकवरी हुईं है। ऐसे काम करता है यह हाइड्रोजेल ड्रेसिंग यह खास ड्रेसिंग घाव में मौजूद संक्रमण को कम करती है। बैक्टीरिया को नियंत्रित करने के साथ ही यह नए ऊतकों के बनने में मदद करती है, जिससे घाव जल्दी भरता है। इसमें ग्रैमिसिडिन-डी नामक तत्व है जो बैक्टीरिया को खत्म करता है। साथ ही इसमें ट्रेहेलोज नामक शर्करा का उपयोग किया गया है। यह नई तकनीक एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस से निपटने में मददगार साबित होगी। साथ ही संक्रमण रोकने और डायबिटिक अल्सर जैसे जटिल घावों के इलाज व घाव भरने में यह प्रभावी पाया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *