नीतीश कुमार की सीएम पद से विदाई और सम्राट चौधरी की ताजपोशी ने 2025 के चुनाव परिणाम के बाद ठंडे पड़े विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव में नई जान फूंक दी है। सत्ता बदलने के साथ ही तेजस्वी के तेवर भी बदल गए हैं। एक्टिव और आक्रामक विपक्षी नेता के फॉर्म में दिखने की कोशिश में जुटे हैं। पटना में पार्टी के नेताओं के साथ बैठक की तो ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की बैठक में शामिल हुए। राहुल गांधी के बगल की कुर्सी पर नजर आए। अधिनियम पास न हो सका तो केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। सम्राट चौधरी पर खजाना खाली होने को लेकर अटैक किया। पगरी की बात याद दिलाकर सीएम बनने की बधाई दी। सम्राट चौधरी के सीएम बनने के बाद तेजस्वी यादव की क्या रणनीति है? किस तरह अब राजद भाजपा से आमने-सामने की लड़ाई करने जा रही है। पढ़िए रिपोर्ट..। नीतीश के जाने के बाद तेजस्वी के खास 3 प्लान निशांत की इंट्री से परिवारवाद का आरोप थमा तेजस्वी यादव की सक्रियता ऐसे समय में तेज हुई है जब नीतीश कुमार बिहार से दिल्ली जा चुके हैं। उनकी सहमति से उनके पुत्र निशांत कुमार की एंट्री जेडीयू में हो चुकी है। दूसरी तरफ बीजेपी बिहार में अपना प्रभाव बढ़ा चुकी है। लालू परिवार की मांग थी कि नीतीश कुर्सी छोड़ दें और अपने पुत्र निशांत को राजनीति में लाएं। ऐसी मांग के पीछे सोच थी कि लालू पर लगने वाला परिवारवाद का आरोप कम होगा। परिवारवार के सवाल पर तेजस्वी को नहीं घेरा जाएगा। निशांत के राजनीति में आने से तेजस्वी पर परिवारवाद को लेकर सवाल कम हुए हैं। 2. बीजेपी की सीधी टक्कर आरजेडी से होगी सम्राट के सीएम बनने से अब राजद की सीधी लड़ाई भाजपा से है। नीतीश सीएम थे तब भाजपा नंबर दो की हैसियत में थी। राजद जदयू पर उस आक्रामक तरीके से अटैक नहीं कर पाता था जैसा भाजपा पर कर पाता है। वजह नीतीश के साथ सरकार चलाना और उनकी समाजवादी नेता की छवि। अब लालू की पार्टी सीधे भाजपा के सामने है। आरजेडी MY समीकरण वाली पार्टी है। मुसलमानों के हितों पर मुखर रही है। वहीं, बीजेपी हिंदुत्ववादी पार्टी। भाजपा ने बिहार विधानसभा में एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया था। 2025 का चुनाव जीतकर 11 मुसलमान विधायक बने। इनमें एआईएमआईएम से सर्वाधिक 5 और आरजेडी से तीन हैं। बीजेपी और आरजेडी की सीधी टक्कर इसलिए भी होगी कि बिहार में कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियां कमजोर हैं। लालू प्रसाद की राजनति को बीजेपी के खिलाफ ताकतवर माना जाता रहा है। इसके लिए लोग लालकृष्ण आडवाणी की बिहार में गिरफ्तारी का इतिहास याद करते रहे हैं कि कैसे लालू ने उनका राम रथ रोका था। 3. तेजस्वी VS सम्राट, बदलेगा सामाजिक समीकरण भाजपा ने कोइरी/कुशवाहा समाज से आने वाले सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया है। 2024 लोकसभा चुनाव के समय से लालू यादव और तेजस्वी यादव का कोइरी/कुशवाहा पर ज्यादा फोकस रहा है। इस समाज के नेताओं को लोकसभा चुनाव में ज्यादा टिकट दिए तो रिजल्ट भी ठीक रहा। लेकिन विधानसभा चुनाव में ज्यादा टिकट देने के बाद भी वह कमाल नहीं दिखा। 2025 विधानसभा चुनाव में एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट/पोस्ट पोल सर्वे के मुताबिक, 24% कुशवाहा ने महागठबंधन को वोट किया। यह 2020 की तुलना में 3% कम है। अब जब सम्राट चौधरी को भाजपा मुख्यमंत्री बना चुकी है। ऐसे में RJD के लिए कुशवाहा समाज का वोट पाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में अगर RJD को सत्ता में आना है तो उसे अपने सामाजिक समीकरण के फोकस को बदलना होगा। उसके पास 3 ऑप्शन हैं… 1- अति पिछड़ा वर्ग (EBC): नीतीश के जाने के बाद सेंधमारी करना आसान EBC की बिहार में 36.01% आबादी है। इसे नीतीश कुमार का वोटर माना जाता है। नीतीश के साथ रहने के दौरान भाजपा ने भी इस तबके में अपनी पैठ बढ़ाई है। अब जब नीतीश सीएम नहीं रहे तो उसके वोटरों में तेजस्वी सेंधमारी कर सकते हैं। चूंकि यह तबका कभी लालू यादव के साथ भी मजबूती से जुड़ा रहा है। ऐसे में कुछ हद तक जुड़ाव अभी भी लालू फैमिली से हो सकता है। एक्सिस माय इंडिया के एग्जिट/पोस्ट पोल सर्वे के मुताबिक, 2025 विधानसभा चुनाव में EBC वर्ग के 26% लोगों ने महागठबंधन को वोट किया था। यह 2020 की तुलना में 4% ज्यादा था। हालांकि, EBC वर्ग के 58% लोग अभी भी NDA के साथ हैं। मुकेश सहनी के साथ आने का थोड़ा फायदा तेजस्वी को हुआ है, लेकिन अगर वह लगातार मेहनत करें तो अगले चुनाव तक कुछ भी हो सकता है। 2- दलितः गैर पासवान वोटरों को साधकर बदल सकते हैं समीकरण राज्य में दलित आबादी 19.65% है। दलित समाज को लंबे समय से सिंबालिक प्रतिनिधित्व मिल रहा है। चिराग पासवान और जीतनराम मांझी जैसे नेता NDA के साथ हैं। वहीं, कांग्रेस लगातार दलित वोटरों को अपनी तरफ करने के लिए प्रयासरत है। इसका नतीजा भी दिख रहा है। 2025 चुनाव में 29% दलितों ने महागठबंधन को वोट किया। यह 2020 की तुलना में 5% ज्यादा था। 49% दलितों ने NDA को वोट दिया। यह 2020 की तुलना में 1 फीसदी कम है। दलितों में पासवान जहां बड़ी संख्या में NDA के साथ हैं तो रविदास तेजस्वी-कांग्रेस के साथ। ऐसे में अगर विपक्ष दलितों को लेकर मजबूती से काम करे और फोकस करे तो आगे समीकरण बदल सकता है। 3- सवर्णः एरिया वाइज समीकरण साधकर उठा सकते हैं फायदा राज्य में हिन्दू सवर्ण आबादी 10.5% है। इसे NDA का कोर वोटर माना जाता है। एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक, 2025 विधानसभा चुनाव में 65% सवर्ण लोगों ने NDA को वोट किया, जो 2020 की तुलना में 7% ज्यादा है। 14% सवर्णों ने महागठबंधन को वोट किया, जो 2020 की तुलना में 8% कम था। हाल के दिनों में सवर्ण तबके में कुछ नाराजगी की बातें सामने आ रही हैं। भाजपा सरकार में भी अगर उपेक्षा होगी तब यह तबका कुछ हद तक टूट सकता है। तेजस्वी यादव एरिया के मुताबिक समीकरण साधकर फायदा उठा सकते हैं। जैसे- शाहाबाद एरिया में कुशवाहा वर्सेज राजपूत। तेजस्वी बीजेपी को अगड़ी जाति की पार्टी कहकर लाभ उठा सकते हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि बिहार की राजनीति त्रिकोणीय रही है। जेडीयू, आरजेडी और बीजीपी में से दो कोण मिलकर सरकार बनाते रहे हैं। बीजेपी के पावर में आने से भी तीन कोण तो रहेंगे ही। जेडीयू के कमजोर होने का खतरा है इसलिए निशांत की इंट्री जेडीयू में एकजुटता के लिए कराई गई है। बीजेपी जंगलराज की याद दिलाती रही है। इस लिहाज से कोई बदलाव होता नहीं दिख रहा है।