मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को भाजपा कार्यालय में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो-टूक कहा कि लालू प्रसाद और कांग्रेस नहीं चाहते कि गरीब की बेटी सांसद बने; वे सिर्फ अपने परिवार की बेटियों को सदन में देखना चाहते हैं। सम्राट ने याद दिलाया कि लालू पहले भी महिला आरक्षण बिल को फड़वा चुके हैं, जो उनके महिला विरोधी चेहरे को उजागर करता है। यदि यह बिल समय पर पास होता, तो विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 29 से बढ़कर 122 हो जाती। एनडीए ने हमेशा नीयत साफ रखी है। 2006 में एनडीए सरकार ने ही बिहार के निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया, जिससे आज पंचायतों में उनकी भागीदारी 59% के पार है। इस दौरान कई महिला विधायक व नेता मौजूद रहीं। आधी आबादी के लिए जरूरी
बंपर हिस्सेदारी : बिहार विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 29 से बढ़कर 122 हो जाएगी।
फायदा : निर्माण में महिलाओं की सीधी भागीदारी बढ़ेगी और उनके मुद्दे प्रमुखता से उठेंगे।
बिहार मॉडल : 2006 में पंचायतों में 50% आरक्षण दिया, आज 59% से अधिक महिलाएं प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
फायदा : गरीब परिवारों की महिलाओं को समाज का नेतृत्व करने और सशक्त बनने का मौका मिला।
सीटों का विस्तार : 70 करोड़ पर भी 543 सीटें थीं, 140 करोड़ पर भी उतनी ही हैं। सीटें बढ़नी चाहिए।
फायदा : बढ़ती जनसंख्या को सही और न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे विकास की रफ्तार बढ़ेगी। महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी
मुख्यमंत्री का बयान केवल राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व के एक बड़े मॉडल की ओर इशारा है। 140 करोड़ की आबादी के लिए 816 सांसदों का विजन सीधे तौर पर आधी आबादी को उनका हक देने से जुड़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर सीटों का विस्तार और महिला आरक्षण, नीति-निर्माण में महिलाओं की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। बिहार ने पंचायतों में पहले ही 50% आरक्षण देकर यह साबित किया है कि मौका मिलने पर महिलाएं खुद को हमेशा साबित करती रही हैं।