स्मार्ट प्रीपेड मीटर की जांच के लिए गठित समिति की जांच पर सोमवार को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सवाल उठाए हैं। परिषद ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर जांच लेसा के लैब से कराई जा रही है। जबकि लेसा की लैब में मीटर की जांच के लिए पर्याप्त हाईटेक सुविधाएं ही नहीं हैं। एमडीएम हार्डवेयर–सॉफ्टवेयर की जांच के लिए वहां कोई एक्सपर्ट भी नहीं है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर की जांच के लिए गठित तकनीकी जांच कमेटी गुपचुप तरीके से काम कर रही है, जो पारदर्शिता के खिलाफ है। परिषद ने जांच कमेटी से मांग की है कि वह किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले स्मार्ट प्रीपेड मीटर के सभी कंपोनेंट्स एमडीएम, एचईएस, आईटी व ओटी सिस्टम, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की गहन जांच जरूरी है। साथ ही 45 डिग्री तापमान में कार्यक्षमता, वोल्टेज के उतार-चढ़ाव पर प्रदर्शन, तथा 35 केवी सर्ज टेस्ट जैसे महत्वपूर्ण परीक्षण भी अनिवार्य रूप से कराए जाने चाहिए। अवधेश वर्मा ने दावा करते हुए कहा कि 2012 में परिषद के दबाव पर आईआईटी कानपुर में दो कंपनियों के मीटरों की जांच हुई थी, जिसमें दोनों असफल हुए थे। ऐसे में यह सवाल उठता है कि पावर कॉरपोरेशन अपनी ही लैब में निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित करेगा। पावर कारपोरेशन को याद होगा कि जो दोनों मीटर कंपनियां असफल पाई गई थी, वहीं आज स्मार्ट प्रीपेड मीटर भी बना रही हैं उन्होंने कहा कि यदि पावर कॉरपोरेशन के अभियंता ही जांच प्रक्रिया का हिस्सा होंगे, तो निष्पक्षता पर संदेह बना रहेग। प्रबंधन पहले ही कई बार सार्वजनिक रूप से यह दावा कर चुका है कि सभी मीटर सही कार्य कर रहे हैं। वह लगातार चेक मीटर एवं स्मार्ट मीटर की रीडिंग में कोई अंतर नहीं मिलने का दावा करती रही है। परिषद ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से करानी चाहिए। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी निष्पक्ष हो।