पठानकोट के विधानसभा हलका भोआ के गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक मां पर अपने ही 16 दिन के मासूम को कथित तौर पर आग लगाने के आरोप लगे हैं। हालांकि यह मामला 4 महीने पुराना बताया जा रहा है लेकिन, महिला के ससुराल पक्ष ने वीरवार को एसएसपी को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस तरह के मामले को लेकर अधिकारी भी सकते में हैं। फिलहाल मामले की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। पति का आरोप, गुस्से में आपा खो देती है पत्नी
बच्चे के पिता मंदीप सिंह ने बताया कि उनकी शादी 6 साल पहले हुई थी। शुरुआत में परिवार संयुक्त था, लेकिन पत्नी अक्सर घर में झगड़ा और कलेश करती थी। मंदीप के अनुसार, उसकी पत्नी को जब गुस्सा आता है, तो वह आपा खो देती है और पागलों जैसी हरकतें करने लगती है। यहां तक कि गर्भावस्था के दौरान उसने अपने पेट पर मुक्के मारकर बच्चे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की थी। पहले हो चुकी 16 दिन के बच्चे की मौत
मंदीप ने आरोप लगाया कि 4 साल पहले उनका पहला बच्चा जब मात्र 16 दिन का था, तब उसकी भी मौत आग लगने से हुई थी। तब पत्नी ने बहाना बनाया कि वह दूसरे घर में कोई सामान लेने गई थी और पीछे से आग लग गई, लेकिन आग लगने का कारण आज तक स्पष्ट नहीं हो सका। अब 11 दिन के बच्चे को लगी आग
मंदीप ने आरोप लगाया कि 4 महीने पहले जब दूसरा बेटा हुआ तो पत्नी ने फिर से गर्भपात की कोशिश की थी। बच्चा होने के मात्र 11 दिन बाद जब मंदीप और उनके पिता दवाई लेने बाहर गए थे तो पत्नी ने फोन कर सामान मंगवाया। उसके मात्र 5 मिनट बाद फोन आया कि बच्चे को आग लग गई है। उसका भी कारण स्पष्ट नहीं हो पाया।
लेकिन, इससे बच्चे की दोनों टांगें बुरी तरह झुलस गईं। मंदीप ने बताया कि जब उन्होंने ससुराल पक्ष से शिकायत की, तो उन्होंने अपनी बेटी को समझाने के बजाय पल्ला झाड़ लिया। पड़ोसियों ने बचाई बच्चे की जान
मंदीप सिंह के पिता सुरिंदर पाल ने बताया कि घटना वाले दिन वह बीमार थे और अपने बेटे मंदीप के साथ सवा नौ बजे घर से दवाई लेने निकले थे। जब वे साढ़े नौ बजे वापस आने वाले थे, तभी खबर मिली कि उनके छोटे पोते को आग लग गई है। जब आग लगी तो उनके पड़ोसियों ने शोर सुना और बच्चे को बचाकर बाहर निकाला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पड़ोसियों ने बच्चा उनकी बहू को देना चाहा, तो उसने बच्चे को पकड़ा तक नहीं। इसके बाद बच्चे को गंभीर हालत में चौहान अस्पताल, फिर रंधावा और अंत में पंकज शर्मा अस्पताल ले जाया गया। जहां बच्चे का ईलाज करवाया गया है। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पीड़ित पिता का आरोप है कि वह पिछले चार महीनों से थाने के चक्कर काट रहे हैं। बच्चे का इलाज चल रहा है और आर्थिक तंगी है, लेकिन स्थानीय एसएचओ उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं। सुरिंदर पाल ने बताया कि वे तीन-चार बार थाना सदर के चक्कर काट चुके हैं। सुनवाई न होने पर आज वे एसएसपी से न्याय की मांग करने आए हैं।
पोती की सुरक्षा की गुहार
सुरिंदर पाल ने प्रशासन से इंसाफ की मांग करते हुए कहा कि उनकी बहू फिलहाल अपने मायके में है। उन्होंने चिंता जताई कि उनकी 5 साल की पोती भी है, जिसकी जान को वे अपनी बहू से खतरा मानते हैं। उन्होंने मांग की है कि उनकी पोती को उनके पास वापस दिलाया जाए। आरोपी बहू के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
एसपी ने मामले पर जताई हैरानी
पठानकोट एसपी सुखविंदर पाल सिंह ने मामले पर हैरानी जताते कहा कि भोआ निवासी मंदीप सिंह और उनका परिवार उनके समक्ष पेश हुआ। उन्होंने बताया कि मैंने खुद बच्चे के पैरों को देखा है,जो बुरी तरह झुलसे हुए हैं। यह समझ से परे है कि दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जो अपने ही मासूम बच्चे को आग लगा सकते हैं। जांच डीएसपी रूरल को सौंपी
एसपी सुखविंदर पाल सिंह ने जानकारी दी कि परिवार के गंभीर आरोपों को देखते हुए इस मामले की गहराई से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा,डीएसपी रूरल से बात की है और यह केस उन्हें मार्क कर दिया है। इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। डीएसपी को आदेश दिए गए हैं कि वे इमीडिएट एक्शन (तत्काल कार्रवाई) करें।
मेडिकल बोर्ड द्वारा होगी बच्चे की जांच
एसपी ने बताया कि आज या कल में ही डॉक्टरों की टीम (मेडिकल बोर्ड) से बच्चे की जांच करवाई जाएगी और उसकी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी महिला के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उसके खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई निश्चित की जाएगी।