हाईकोर्ट से गीतू राम तंवर को राहत:अगली सुनवाई तक नहीं होगी कोई सख्त कार्रवाई, जाट और झोटा टिप्पणी विवाद पर कोर्ट सख्त

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी कर राज्य सरकार और दूसरे पक्ष को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए साफ किया कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की जबरदस्ती की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे याचिकाकर्ता को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। वकीलों की मौजूदगी में हुई सुनवाई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता गीतू राम तंवर की ओर से सीनियर एडवोकेट हेमंत बस्सी के साथ एडवोकेट सलोनी छाबड़ा और गुरसिमरन कौर मौजूद रहीं। उन्होंने कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखा। हरियाणा सरकार की ओर से सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल महिमा यशपाल सिंगला पेश हुईं और नोटिस स्वीकार किया। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूरी दे दी। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से एडवोकेट शोभित रपरिया भी कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने भी नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने की अनुमति ली। 11 मई को होगी अगली सुनवाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 मई 2026 तय की है। साथ ही केस को अर्जेंट लिस्ट में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इस पर जल्द सुनवाई हो सके। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि अगली तारीख तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी सख्त या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। क्या है पूरा मामला सोनीपत शहर में बिजली विभाग के एसई गीतू राम तंवर की “जाट और झोटा” वाली टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद सोनीपत के एडवोकेट प्रणय दीप सिंह ने शिकायत दी, जिसके आधार पर कार्रवाई शुरू हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वीडियो में जाति विशेष के खिलाफ भड़काऊ और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था, जिससे समाज में वैमनस्य फैलने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ। वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद शिकायत के अनुसार, वायरल वीडियो में गीतू राम तंवर (जो उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड से जुड़े बताए जा रहे हैं) कथित रूप से जाति विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा बोलते नजर आए। वीडियो में “जाट और झोटा जहां भी मिलेंगे, लठ मारूंगा” जैसे शब्द बोले जाने का आरोप है। इस बयान के सामने आने के बाद समाज में आक्रोश फैल गया और मामला तूल पकड़ गया। एडवोकेट ने दर्ज कराई शिकायत सोनीपत के एडवोकेट प्रणय दीप सिंह ने पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर कहा कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ते हैं और विभिन्न वर्गों के बीच तनाव पैदा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी संबंधित समाज से हैं और इस बयान से आहत हैं। उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। ब्लैकमेल और वसूली के भी लगे आरोप शिकायत में यह भी कहा गया कि एक अन्य वायरल वीडियो में गीतू राम तंवर द्वारा एसीआर लिखने के नाम पर लोगों को ब्लैकमेल करने के आरोप सामने आए हैं। इसे प्रथम दृष्टया जबरन वसूली से जुड़ा मामला बताया गया है, जो एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। पुलिस ने दर्ज किया केस मामले में पुलिस ने बीती 10 अप्रैल को थाना शहर सोनीपत में केस दर्ज किया था। प्रारंभिक जांच के दौरान संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच शुरू की गई। साथ ही शिकायत में मांग की गई कि सभी आपत्तिजनक वीडियो जब्त कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाए जाएं, ताकि कानून-व्यवस्था पर असर न पड़े। वीडियो को लेकर तंवर की सफाई विवाद बढ़ने के बाद 2 अप्रैल को गीतू राम तंवर ने करनाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो करीब पांच-छह महीने पुराना है और इसे काटकर गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका कहना था कि पूरी वीडियो देखने पर स्थिति साफ हो जाएगी और यह बातचीत हंसी-मजाक के दौरान की गई थी। 22 दिसंबर 2025 का बताया वीडियो गीतू राम तंवर के अनुसार यह वीडियो सोनीपत के तत्कालीन डीसी सुशील सारवान के कैंप ऑफिस का है, जहां 22 दिसंबर 2025 को अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। इसी दौरान यह वीडियो बनाया गया था। वीडियो में क्या कहा गया वीडियो में गीतू राम तंवर पंचायत के बीच झूठ न बोलने की बात कहते हुए नजर आते हैं। वे सांप के उदाहरण से समझाते हैं कि छोटा-बड़ा कुछ नहीं होता, उसमें जहर होता है। एसीआर लिखने के विषय में वे कहते हैं कि जो लिखूंगा, सही लिखूंगा। वीडियो में वे यह भी कहते नजर आते हैं कि अगर लोग संविधान को मानते तो भीमराव आंबेडकर की तस्वीर नहीं तोड़ी जाती। इस दौरान वहां मौजूद एक व्यक्ति चौधरी देवीलाल की तस्वीर तोड़े जाने का जिक्र करता है। जातिवाद पर भी दिए बयान वीडियो में गीतू राम तंवर कहते हैं कि कुछ लोग विभाग में जातिवाद की बात करते हैं। अगर जातिवाद है तो खुलकर करना चाहिए। वे यह भी कहते हैं कि उनके पास 20 अधिकारी गवाह हैं, जो यह कहकर साइन कर रहे हैं कि संबंधित अधिकारी जाटों के खिलाफ है। बातचीत के दौरान वे यह भी कहते हैं कि उनके यहां खुलकर कास्टिज्म है और वे खुलकर बात करेंगे। विवादित बयान से बढ़ा मामला इसी दौरान वीडियो में वे यह कहते नजर आते हैं कि “जाट और झोटा जहां मिलेगा, वहीं लठ मारूंगा।” इसी बयान के सामने आने के बाद विवाद और बढ़ गया और मामला पुलिस तक पहुंच गया। माफी और जांच की मांग गीतू राम तंवर ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने कभी किसी के साथ जातीय भेदभाव नहीं किया। उस समय बैठक में अलग-अलग समाज के लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यदि उनकी बातों से किसी को ठेस पहुंची है तो वे दिल से माफी मांगते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने विभाग को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग की है और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। हाईकोर्ट से मिली राहत अब इस पूरे मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए अगली सुनवाई तक किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इससे याचिकाकर्ता को बड़ी राहत मिली है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 11 मई 2026 को होगी।

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