गुरुग्राम में सिलोखरा स्थित चर्चित धीरेंद्र शास्त्री के ‘अपर्णा आश्रम’ की जमीन और बाबा के नाम का सहारा लेकर करोड़ों रुपए की ठगी करने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने निवेशकों को फर्जी रियल एस्टेट परियोजनाओं का झांसा देकर और जाली दस्तावेजों के आधार पर भारी निवेश कराया था। आरोपियों की पहचान अशोक चौधरी (60) निवासी गौतम नगर, दिल्ली व चंद्रकांत चौधरी (40) निवासी बृज विहार जिला गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। आर्थिक अपराध शाखा-2 ने इन्हें नोएडा से अरेस्ट किया है। 15 अप्रैल को पीड़ित ने एक लिखित शिकायत देकर पुलिस को बताया था कि सीकेसी इंफ्रा कंपनी के डायरेक्टर अशोक चौधरी व चंद्रकांत चौधरी तथा इनके अन्य साथियों द्वारा अपर्णा आश्रम व वैशाली में कथित रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश के नाम पर झूठे दस्तावेज व सेलिंग राइट्स के झूठे आश्वासन देकर उसे विश्वास में लिया। कोई वैध एग्रीमेंट नहीं किया उनसे अलग-अलग समय पर निवेश कराया गया। भुगतान के बावजूद न तो कोई वैध एग्रीमेंट किया गया, न परियोजना पर कोई कार्य शुरू किया गया और न ही समझौते के अनुसार सेलिंग राइट्स दिए गए। बाद में शिकायतकर्ता को जानकारी मिली कि अपर्णा आश्रम की संबंधित भूमि विवादित है तथा हरियाणा सरकार कब्जे में है। विवादित भूमि को साफ बताकर ठगी की पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी सीक्रेसी इंफ्रा कंपनी के डायरेक्टर हैं, जिन्होंने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से फर्जी रियल एस्टेट परियोजनाओं के नाम पर शिकायतकर्ता को झांसा दिया तथा उससे निवेश के रूप में करोड़ों रुपए प्राप्त किए। एक करोड़ रुपए ले लिए आरोपियों द्वारा अपर्णा आश्रम की जमीन पर परियोजना के नाम पर लगभग 01 करोड़ रुपए तथा वैशाली (नोएडा) स्थित परियोजना में निवेश के नाम पर लगभग 04 करोड़ 50 लाख रुपए प्राप्त किए गए। इस राशि में से लगभग 01 करोड़ रुपए सीकेसी इंफ्रा कंपनी के बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए गए, जिसे बाद में आरोपियों द्वारा आपस में बांट लिया गया। आरोपियों ने इस राशि प्राप्त कर न तो समझौते के अनुसार सेलिंग राइट्स दिए और न ही कोई वैध कार्यवाही की, बल्कि शिकायतकर्ता के साथ धोखाधड़ी की वारदात को अंजाम दिया। फर्जी दस्तावेज और गुमराह करने की साजिश पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने निवेशकों को फंसाने के लिए बाकायदा फर्जी एग्रीमेंट और सरकारी विभागों के कूटरचित (जाली) दस्तावेज तैयार किए थे। उन्होंने यह जानते हुए भी कि जमीन कानूनी विवादों में फंसी है और उस पर किसी भी प्रकार का निर्माण या बिक्री प्रतिबंधित है, शिकायतकर्ता को गुमराह किया। आरोपियों ने झूठे वादे किए कि इस परियोजना में निवेश करने से कुछ ही समय में करोड़ों का मुनाफा होगा। पुलिस की सावधान रहने की अपील पुलिस पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि किसी भी रियल एस्टेट परियोजना में निवेश करने से पहले जमीन के मालिकाना हक और दस्तावेजों की जांच ‘हरेरा’ (HRERA) या संबंधित सरकारी कार्यालयों से जरूर कर लें। किसी भी धार्मिक नाम या बड़े चेहरे का इस्तेमाल करने वाले विज्ञापनों के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई निवेश न करें। पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है, ताकि इस घोटाले की पूरी चेन और ठगी गई रकम की बरामदगी की जा सके।