औरंगाबाद में 20 घर जलकर खाक, पीड़ितों का दर्द:बेटी की शादी का पैसा-सामान सब जल गया, खाने तक को मोहताज; 42°C में खुले आसमान में जीवन

दिन- शुक्रवार
तापमान- 42 डिग्री सेल्सियस
जगह- औरंगाबाद मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर मदनपुर प्रखंड के बेरी टोला का पूरन बिगहा गांव। गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर एक चापाकल पर कुछ लड़कियां, महिलाएं छोटे-छोटे बर्तनों में पानी भर रही थीं। उनसे बातचीत की तो उन्होंने बताया कि बुधवार को हमारे गांव में अचानक आग लग गई थी। आग से गांव के 67 घरों में से करीब 20 घर जलकर राख हो गए। जिन घरों में आग लगी, उन घरों में न खाने को अन्न बचा है और न पहनने-ओढ़ने को कपड़ा। गांव के एक व्यक्ति ने कहा कि बेटी की शादी को लेकर कुछ पैसे और दहेज के सामान रखे थे, सब जल गया। अब परिवार खाने तक को मोहताज है। महिलाओं ने बताया कि देर शाम जब आग ठंडी हुई तो हम लोगों ने अपने-अपने घरों में जले सामानों को ये सोचकर हटाया कि कुछ तो बचा होगा, लेकिन कोई ऐसा सामान नहीं बचा, जिसका यूज किया जा सके। टीन के बने बक्से में कपड़े रखे थे, वो भी जलकर राख हो गए। सबसे पहले आग की तीन तस्वीरें देखिए अब पहले उस गांव की कहानी, जहां आग ने 20 घरों को राख बना दिया औरंगाबाद मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर करीब 30 बीघा का एक प्लॉट है। ये जमीन औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील सिंह की है। इस जमीन पर करीब 20 साल से मदनपुर प्रखंड के ही खिरियावां गांव से करीब 60 से अधिक परिवार झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। ये सभी लोग भुईयां समाज से आते हैं। गांव के सभी लोग पेशे से मजदूर हैं। इनके पास न अपनी जमीन है और न ही अपनी खेती। गांव की महिला माधो देवी ने बताया कि घटना के बाद स्थानीय विधायक प्रमोद सिंह गांव पहुंचे थे और चापाकल लगवाने का आश्वासन दिया था। अगले दिन बोरिंग के लिए मशीन भी आई, लेकिन कुछ लोगों ने विवाद शुरू कर दिया, जिससे काम रुक गया है। हमलोग पिछले 20 वर्षों से इस जमीन पर बसे हैं, लेकिन जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट नहीं होने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है। खाना बनाते समय तेज हवा के कारण लगी आग माधो देवी ने बताया कि आग लगने की घटना के करीब 10 मिनट बाद दमकल की पहली गाड़ी गांव में पहुंची, जबकि दूसरी गाड़ी करीब एक घंटे बाद पहुंची। इन दोनों दमकल गाड़ियों ने एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। उन्होंने बताया कि एक घर में मेहमानों के लिए खाना बन रहा था। इसी दौरान तेज हवा चली, जिससे एक चिंगारी निकलकर पास के शिवकुमार भुइयां के मकान तक पहुंच गई। कच्चा घर होने के कारण आग लग गई। तेज हवा की वजह से देखते ही देखते 19 और घर आग की चपेटे में आ गए। कुछ ही मिनटों में सबकुछ जलकर राख हो गया। घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित हर परिवार को 12-12 हजार रुपए का चेक दिया है, जबकि रेड क्रॉस संस्था की ओर से तिरपाल के साथ-साथ कुछ जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए है। आज गांव के दो घरों में दो बेटियों की शादी आज यानी 25 अप्रैल को गांव के दो घरों में दो बेटियों की शादी होनी है। रंजीत भुइयां ने अपनी बड़ी बेटी की शादी के लिए घर में करीब 1 लाख रुपए की ज्वेलरी, 50 हजार रुपए के कपड़े, 50 हजार रुपए कैश, पलंग, अनाज रखा था, जो जलकर राख हो गया है। वहीं, धर्मेन्द्र भुइयां के घर उनके भाई शंकर और बहन की भी आज शादी होनी है। आग ने धर्मेंद्र भुइयां के घर में रखे शादी का सारा सामान जलाकर राख हो गए है। शादी के घर में जो मेहमान आए थे, उनके भी कपड़े और ज्वेलरी जलकर राख हो गए। इसके अलावा, 20 घरों में रखे मोबाइल, आधार कार्ड समेत अन्य जरूरी कागजात, चौकी-खटिया, अनाज का एक-एक दाना जलकर राख हो गया। आग की लपटों में एक बकरी और कई मुर्गियां भी जिंदा जल गईं, जो गरीब परिवारों की आजीविका का साधन थीं। अब जानिए जिन घरों में आग लगी, उनका क्या कहना है? गांव के रहने वाले रंजीत भुइयां ने बताया कि मेरी बेटी की शादी थी। 21 को तिलक थी, 24 को मड़वा था और 25 को बरात आने वाली है। इसी बीच आग से घर में रखे सारे सामान जलकर राख हो गए। गहना और कपड़ा जो कुछ बेटी के लिए खरीदा था, वो सब बर्बाद हो गया। रंजीत ने बताया कि घटना की जानकारी अपने होने वाले समधी और दामाद को भी दी। उन्होंने मुझसे पूछा कि आगे क्या करना है, मैंने उनसे कहा है कि आप लोग तय तारीख पर बारात लेकर आइए, मुझसे जितना और जैसे बन पड़ेगा, मैं खातिरदारी करूंगा। ‘बेटा स्कूल जाता था, उसका स्कूल बैग, किताब सबकुछ जलकर राख हो गया’ उषा देवी ने बताया कि घर में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। झोपड़ी लगाकर किसी तरह बच्चों के साथ रह रहे हैं, जहां छाव होती है, वहां बच्चों को लेकर रह रहे हैं। मेरे तीन बच्चे हैं। बड़ा बच्चा 10 साल का है, जो स्कूल जाता था। उसका भी किताब, स्कूल बैग जलकर राख हो गया। उषा देवी ने बताया कि गांव में बोरिंग भी नहीं है। पानी लाने के लिए 20 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। जिस जमीन पर रह रहे हैं, वो प्राइवेट जमीन है। अगर कही सरकारी जमीन नहीं मिलेगी, तो सड़क पर जाकर रहना पड़ेगा। फूस के छत, सुखी लकड़ियों की वजह से आग ने विकराल रूप लिया शंकर ने बताया कि मेरी छोटी बहन की शादी है। अब कुछ नहीं बचा है, किसी तरह हाथ-पैर जोड़कर बहन की शादी करानी है। लड़के वालों को घटना के बारे में बताया है, अगर वो हमारी मजबूरी समझ लेंगे तो इससे अच्छा कुछ और नहीं हो सकता है। ‘जीविका का रजिस्टर रखा था, जलकर राख हो गया’ संगीता ने बताया कि मैं जीविका समूह में काम करती हूं। यहां तीन महिलाओं को लोन भी दिलाया था। जिन महिलाओं को लोन दिलाया था, उनके घर जीविका से जुड़े और कागजात भी रखे थे, जो जलकर राख हो गए। रजिस्टर में सब हिसाब लिखा था, अब किसका कितना बकाया है, किससे कितना लेना था, कुछ पता नहीं चल रहा है। ‘नेताओं को वोट देकर विधायक बनाया, हमारा राशन कार्ड तक नहीं बना’ लकेसरी देवी ने बताया कि 20 साल से अधिक समय से हम लोग रह रहे हैं। झोपड़ी में ही बच्चों को पालकर बड़ा किया। हम लोगों को आज तक आवासीय योजना का लाभ नहीं मिला। जिस जमीन पर हम लोग रह रहे हैं, वो प्राइवेट जमीन है, लेकिन गांव के मुखिया को हम लोगों के लिए जमीन उपलब्ध कराना चाहिए था। लकेसरी देवी ने बताया कि हम लोगों ने वोट देकर नेताओं को विधायक बनाया, जिला परिषद भी बनाया, लेकिन हम लोगों को आज तक किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला, न राशन कार्ड है। अब हम लोग बेटे-बेटी, बहू, पोते-पोतियों को लेकर कहां जाएंगे।

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