चंडीगढ़ | हाईकोर्ट ने 3 दशक पुराने सेवा विवाद में हरियाणा स्टेट फेडरेशन ऑफ कंज्यूमर को-ऑपरेटिव होलसेल स्टोर्स लिमिटेड (कॉन्फेड) की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। जस्टिस एचएस बराड़ ने कर्मचारी दूनी चंद से 81 माह तक काम लेने के बावजूद वेतन न देने को ‘प्रशासनिक उदासीनता’, ‘मानवीय गरिमा पर प्रहार’ करार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य स्वयं शोषणकर्ता की भूमिका में नहीं हो सकता। कोर्ट ने कॉन्फेड पर 2 लाख रुपए हर्जाना लगाया। पीड़ित कर्मचारी को अक्टूबर 1989 से जुलाई 1996 तक का बकाया वेतन, सभी सेवा लाभ 6% वार्षिक ब्याज समेत 3 महीने के भीतर देने का निर्देश दिया है।दूनी को 1979 में सेल्समैन नियुक्त किया था। उनसे लगातार काम लिया गया, वेतन नहीं दिया गया। कॉन्फेड का यह तर्क कि वह उनका कर्मचारी नहीं है, कोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर खारिज कर दिया। पीड़ित 1991 से अदालतों के चक्कर काट रहा था।