कनाडा- इमिग्रेशन और PR को लेकर नियम बदले:फर्जी कंसल्टेंट हटेंगे, सर्विस सेक्टर वर्कर्स प्रायोरिटी लिस्ट से बाहर; पंजाबी स्टूडेंट्स को फायदा भी नुकसान भी

कनाडा सरकार ने इमिग्रेशन और सिटीजनशिप कंसल्टेंट्स की निगरानी के साथ परमानेंट रेजिडेंस (PR) को लेकर के लिए बड़े बदलाव की घोषणा की है। कनाडा में अगर कोई कंसलटेंट किसी को ठगता है तो इसके लिए ठगी के शिकार व्यक्ति को मुआवजा मिलेगा। इस नियम का सबसे बड़ा फायदा कनाडा में रहे पंजाबी समुदाय को होगा। बताया जा रहा है कि पंजाब के लोग ही कनाडा में कंसलटेंट की ठगी का शिकार होने वाले सबसे ज्यादा हैं। 6 मई 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, यह नया नियम 15 जुलाई 2026 से पूरी तरह लागू हो जाएगा। इन नियमों का मसौदा सबसे पहले दिसंबर 2024 में पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य आवेदकों को धोखाधड़ी से बचाना और सिस्टम में पारदर्शिता लाना है। हालांकि, पंजाबी स्टूडेंट्स को कनाडाई सरकार ने एक झटका भी दिया है। कनाडा के कई स्टेट ऐसे हैं जिन्होंने फूड सेक्टर व सर्विस सेक्टर को अपनी प्रायोरिटी लिस्ट से हटा दिया। इससे कनाडा में फूड सेक्टर के साथ-साथ सर्विस सेक्टर में काम करने वाले वर्कर्स व स्टूडेंट्स को परमानेंट रेजिडेंस (PR) स्टेटस मिलने पर संकट गहराता जा रहा है। पहले पढ़ें इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स पर क्या फैसला लिया गया… इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स के पास लाइसेंस होना जरूरी कनाडाई कानून के अनुसार, इमिग्रेशन सलाह देने या फाइल तैयार करने के बदले पैसे लेने वाले व्यक्ति के पास लाइसेंस होना जरूरी है।
यह लाइसेंस या तो किसी स्टेट लॉ सोसाइटी का होना चाहिए या सीआईसीईसी का। नए नियमों के तहत अब सरकार को कॉलेज के बोर्ड के कामकाज में दखल देने और निगरानी करने के ज्यादा अधिकार मिल गए हैं, ताकि सलाहकार अपनी मनमानी न कर सकें। पंजाबी-गुजराती स्टूडेंट्स के 10 हजार फर्जी एडमिशन पकड़े साल 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा के इमिग्रेशन विभाग (IRCC) ने लगभग 10 हजार फर्जी एडमिशन लेटर पकड़े थे। इनमें से करीब 80 फीसद मामले अकेले पंजाब और गुजरात से जुड़े थे। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार कनाडा में करीब 30 हजार प्रवासियों पर निर्वासन की तलवार लटकी है। इनमें से 9 हजार से अधिक अकेले पंजाब के छात्र और शरणार्थी हैं। जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे शहरों में सक्रिय कंसल्टेंट्स के कारण सबसे ज्यादा ठगी होती है। 2023 के मशहूर 700 छात्र ठगी मामले में भी मुख्य आरोपी जालंधर का ही एक एजेंट था। सख्त नियम और भारी जुर्माना
कनाडा सरकार ने इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स के लिए नए सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है। अब गलत काम करने वाले एजेंटों पर 9 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही उनका लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द किया जा सकता है और 6 महीने से 2 साल तक की जेल भी हो सकती है। धोखाधड़ी पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा
धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों की मदद के लिए मुआवजा फंड भी बनाया जाएगा। अगर किसी लाइसेंस प्राप्त कंसल्टेंट ने पैसे हड़पे या गलत जानकारी देकर नुकसान पहुंचाया, तो पीड़ित इस फंड से मुआवजा मांग सकेंगे। ऑनलाइन जारी होगी कंसल्टेंट्स की लिस्ट
अप्रैल 2027 से कंसल्टेंट्स की ऑनलाइन पब्लिक लिस्ट जारी होगी। इसमें उनके लाइसेंस और पहले हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध रहेगी, ताकि लोग सही और भरोसेमंद सलाहकार चुन सकें। PR नियम बदलने से किन वर्कर्स-स्टूडेंट्स की बढ़ी परेशानी, जानिए.. सबसे ज्यादा पंजाबी स्टूडेंट्स को नुकसान कनाडा सरकार की इस पॉलिसी का सबसे ज्यादा नुकसान पंजाबी स्टूडेंट्स व वर्कर्स को झेलना पड़ेगा क्योंकि कनाडा में फूड व सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा पंजाबी काम करते हैं। कनाडा के अलग-अलग राज्यों ने स्टूडेंट्स व वर्कर्स की PR फाइल्स रिजेक्ट करना शुरू कर दिया। कनाडा के नोवा स्कोटिया के हैलिफैक्स स्थित गुरुद्वारा साहिब में कुछ स्टूडेंट्स व वर्कर्स पीआर फाइल्स रिजेक्ट होने के कारण धरने पर बैठे हैं। दरअसल उनका वीजा समाप्त होने वाला है और उन्होंने सरकार के पास पीआर की फाइल लगाई थी जिन्हें सरकार ने रिजेक्ट कर दिया है। स्टूडेंट्स की डिमांड है कि उन्होंने पीआर की फाइल्स तब लगाई थी जब सरकार ने फूड व सर्विस सेक्टर को प्रायोरिटी लिस्ट से बाहर नहीं किया था। उनकी कनाडा व स्टेट सरकार से डिमांड है कि उनकी पीआर फाइल को पुराने नियमों के हिसाब से अप्रूव करें। कनाडा जाने वालों में 70 फीसदी पंजाबी कनाडा जाने वाले भारतीयों में पंजाबियों की संख्या सबसे अधिक है। हालिया आंकड़ों के अनुसार फर्जी ऑफर लेटर और जाली दस्तावेजों के कारण जिन हजारों छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है, उनमें से करीब 60 से 70 प्रतिशत युवा अकेले पंजाब के जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे शहरों से हैं। ये परिवार अक्सर अपनी जमीन बेचकर या भारी कर्ज लेकर 15 से 25 लाख रुपए तक इन कंसल्टेंट्स को दे देते हैं, जिनका कोई कानूनी रिकॉर्ड नहीं होता। यही कारण है कि 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाले नए नियम और मुआवजा फंड पंजाब के परिवारों के लिए संजीवनी साबित होंगे।

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