पंजाब के AAP मंत्री संजीव अरोड़ा को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया है। इसके बाद टीम उन्हें चंडीगढ़ से दिल्ली ले गई। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, राजनीति में आने से पहले तक उन पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। लुधियाना के कारोबारी परिवार से निकले संजीव अरोड़ा ने 1986 में कपड़ों के एक्सपोर्ट कारोबार से शुरुआत की थी। बाद में नुकसान झेलने के बाद उन्होंने रियल एस्टेट सेक्टर में कदम रखा और फिर पंजाब के बड़े उद्योगपतियों में शामिल हो गए। रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड से लेकर ‘हैम्पटन स्काई रियल्टी’ और ‘फेमेला’ जैसे ब्रांड तक उनका कारोबारी नेटवर्क फैला। समाज सेवा के जरिए भी उन्होंने शहर में अलग पहचान बनाई। 2022 में सत्ता में आते ही AAP ने उन्हें राज्यसभा भेजा। 3 साल बाद इस्तीफा दिया और फिर 2025 में लुधियाना वेस्ट उपचुनाव के जरिए एक्टिव राजनीति में उतारा। चुनाव जीतने के 2 महीने बाद उन्हें इंडस्ट्री, बिजली और स्थानीय निकाय जैसे अहम विभाग दिए गए, जिसके बाद उनका कद सीएम मान के बाद दूसरे नंबर पर आ गया। अब ED की कार्रवाई के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं, एक्सपोर्ट कारोबार से शुरू हुआ सफर आखिर पंजाब की सत्ता के सबसे प्रभावशाली गलियारों तक कैसे पहुंचा? कारोबारी से पावरफुल मंत्री बनने के पीछे की पूरी कहानी क्या है? और पंजाब की राजनीति में संजीव अरोड़ा का प्रभाव इतना मजबूत कैसे हुआ..पढ़ें पूरी रिपोर्ट… टेक्सटाइल से फैशन इंडस्ट्री तक की कहानी… समाज सेवा से पहचान संजीव अरोड़ा सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने अपने माता-पिता को कैंसर के कारण खो दिया था। उनकी याद में उन्होंने ‘कृष्णा प्राण ब्रेस्ट कैंसर चेरिटेबल ट्रस्ट’ शुरू किया। यह ट्रस्ट आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर मरीजों, खासकर महिलाओं की मदद करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रस्ट के जरिए 160 से अधिक मरीजों का मुफ्त इलाज कराया गया।इसके अलावा दयानंद मेडिकल कॉलेज (DMC) के प्रबंधन से जुड़ाव के कारण शहर के डॉक्टरों और मध्यम वर्ग के बीच भी उनकी मजबूत पहचान बनी। राज्यसभा से पॉलिटिक्स में एंट्री 2022 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल की। इसके बाद पार्टी को शहरी और कारोबारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले चेहरे की जरूरत थी। सरकार बनने के करीब एक महीने बाद संजीव अरोड़ा को राज्यसभा भेजा गया। विपक्ष ने उस समय इस फैसले को ‘धनबल’ से जोड़कर निशाना बनाया था। हालांकि उन्होंने 3 साल 3 महीने बाद इस पद से इस्तीफा दे दिया था। केजरीवाल के कहने पर उपचुनाव लड़ा लुधियाना वेस्ट से AAP विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी की गोली लगने से मौत के बाद जून 2025 में उपचुनाव हुए। पार्टी ने संजीव अरोड़ा को एक्टिव राजनीति में उतारा। संजीव अरोड़ा एक्टिव राजनीति से दूर रहना चाहते थे और राज्यसभा छोड़ने के पक्ष में नहीं थे। बाद में पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के भरोसे के बाद उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने लुधियाना वेस्ट उपचुनाव को एक कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट की तरह लड़ा और कांग्रेस नेता भारत भूषण आशु को 10,637 वोटों के अंतर से हराया। मंत्री बनने के बाद बढ़ा कद चुनाव जीतने के बाद चर्चा रही कि संजीव अरोड़ा डिप्टी सीएम पद चाहते थे, लेकिन सीएम भगवंत मान इसके लिए तैयार नहीं थे। बाद में उन्हें चुनाव जीतने के करीब 2 महीने बाद ही इंडस्ट्री और NRI मामलों का मंत्री बनाया गया। बताया जाता है कि वह अपने शुरुआती विभागों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद उन्हें इंडस्ट्री के साथ-साथ बिजली और स्थानीय निकाय विभाग भी सौंपे गए। स्थानीय निकाय विभाग पहले मंत्री रवजोत सिंह के पास था, उन्हें इसकी जगह अरोड़ा का NRI विभाग दे दिया गया। स्थानीय निकाय विभाग को पंजाब की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा के मुताबिक, पंजाब में स्थानीय निकाय मंत्री को लंबे समय से सरकार में नंबर-दो की भूमिका वाला नेता माना जाता रहा है। बिजली, इंडस्ट्री और स्थानीय निकाय जैसे बड़े विभाग मिलने के बाद संजीव अरोड़ा पंजाब सरकार के सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में गिने जाने लगे। 308 करोड़ की संपत्ति के मालिक अरोड़ा संजीव अरोड़ा के जून 2025 में लुधियाना वेस्ट विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल चल-अचल संपत्ति ₹308.30 करोड़ रुपए से अधिक है। वे पंजाब के सबसे अमीर राजनेताओं में गिने जाते हैं। इसमें देनदारियां ₹24.12 करोड़। उनकी स्वयं की वार्षिक आय ₹1.76 करोड़ थी। इसके अलावा ज्वैलरी में उनके और उनकी पत्नी के पास कुल मिलाकर लगभग 5.3 किलो सोना और हीरा और 11 किलो चांदी है। गाड़ियों में ₹38 लाख की टोयोटा फॉर्च्यूनर (2022 मॉडल) का जिक्र किया था। इसके साथ ही लुधियाना के पास विभिन्न स्थानों पर करोड़ों की कृषि भूमि। लुधियाना के गुरुदेव नगर में आलीशान कोठी (बाजार मूल्य ₹17.30 करोड़)। पार्टी को दो तरफा नुकसान पॉलिटिकल एक्सपर्ट इंजीनियर पवनदीप शर्मा ने कहा कि संजीव अरोड़ा मास लीडर नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी में अहम जगह बना ली है। वो इंडस्ट्रिलिस्ट हैं और उसकी के बल पर राज्यसभा गए। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से नजदीकियां बढ़ी और अब वो पंजाब में पार्टी और सरकार में नंबर दो पर हैं। शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ ईडी की रेड से पार्टी को दो तरफा नुकसान हो सकता है। एक तो पार्टी के बड़े नेता पर भ्रष्टाचार के आरोप लग गए और दूसरा इंडस्ट्रिलिस्ट को केंद्रीय नेताओं से मिलाने वाला अब और नेता पार्टी के पास फिलहाल नहीं है। *********** ये खबर भी पढ़ें: पंजाब के AAP मंत्री मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार: ED टीम अरोड़ा को चंडीगढ़ से दिल्ली ले गई; केजरीवाल बोले- पार्टी तोड़ने की कोशिश केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह हुई रेड के वक्त वह चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित अपनी सरकारी कोठी पर ही थे। (पढ़ें पूरी खबर)